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कृषि विभाग के आदेश के 19 महीने बाद भी सिर्फ सात पंचायतों में ही खोला जा सका कृषि यंत्र बैंक, किसान अब भी कर रहे इंतजार

Sitamarhi News - जिले के किसान जो अब भी आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग न के बराबर करते हुए परंपरागत ढंग से खेती-बारी कर रहे है, वैसे...

Feb 15, 2020, 09:56 AM IST
Sitamarhi News - even after 19 months of the order of the agriculture department only seven panchayats could be opened in the agricultural equipment bank farmers are still waiting

जिले के किसान जो अब भी आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग न के बराबर करते हुए परंपरागत ढंग से खेती-बारी कर रहे है, वैसे किसानों को अपने नजदीक में कृषि यंत्र उपलब्ध हो इसके लिए कृषि विभाग द्वारा लायी गई स्कीम करीब डेढ़ साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सका है। पंचायत स्तर पर कृषि यंत्र बैंक खोलने की योजना सिर्फ फाइल में ही दबकर रह गई। अब तक 273 पंचायतों में सिर्फ सात पंचायतों में कृषि यंत्र बैंक खोले गए है। उसमें बोखड़ा प्रखंड के महिसौथा और चकौती पंचायत, रीगा प्रखंड के रीगा प्रथम पंचायत, रुन्नीसैदपुर प्रखंड के टिकौली पंचायत, सोनबरसा प्रखंड के दलकावा, पिपरा परसाइन एवं सोनबरसा पंचायत शामिल है। 266 पंचायतों के किसानों को अब भी कृषि यंत्र बैंक खुलने का इंतजार है। किसानों के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना में जिला कृषि पदाधिकारी को नोडल एजेंसी बनाया गया था। कृषि यंत्रों की खरीदारी कृषि निदेशालय द्वारा रजिस्टर्ड वितरक से ही करनी थी। इस योजना के तहत रजिस्टर्ड वितरक द्वारा 10 लाख से 40 लाख तक की लागत वाले यंत्र बैंक स्थापना करने पर लागत मूल्य का अधिकतम 40 प्रतिशत अनुदान एवं ग्रुप व संगठन द्वारा यंत्र बैंक स्थापना पर 10 लाख तक के लिए 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था सरकार ने कर रखी है।

कृषि यंत्र बैंक खोलने का यह है उद्देश्य

बिहार सरकार के कृषि विभाग ने आधुनिक तौर-तरीके से कृषि कार्य कर लघु और सीमांत किसान उपज प्राप्त करें, इसके लिए पंचायत स्तर पर कृषि यंत्र बैंक की स्थापना की योजना को फोकस किया गया था। अब से 19 माह पहले जिला कृषि कार्यालय को इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। बिहार कृषि विभाग ने महसूस किया था कि कृषि यंत्रों की अनुपलब्धता में छोटे मध्यम किसान परंपरागत ढंग से कृषि कार्य करते है। इस लिए उत्पादन लागत अधिक आती है। उनके नजदीक में कृषि यंत्र बैंक खोल दिया जाए, तो किसान किराए पर लेकर उसका उपयोग कर सकेंगे। कृषि बैंक में हार्वेस्टर, पंप सेट आदि विभिन्न तरह के कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी है।


यंत्र बैंक के लिए इन्हें माना गया है पात्र | कृषि यंत्र बैंक की स्थापना के लिए जीविका संगठन, नाबार्ड के समूह, स्वयं सहायता समूह, आत्मा के समूह, उद्यमी और पैक्स व व्यापार मंडल आदि को प्राथमिकता देनी है। इसके माध्यम से किसानों को किराए पर विभिन्न कृषि यंत्रों को चलाने की व्यवस्था करनी थी। लेकिन जिले के पैक्स और व्यापार मंडल ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। जिसका परिणाम हुआ कि जिले में 273 पंचायतें है, उनमें अब तक सात पंचायतों में ही कृषि यंत्र बैंक खुल पाया है।

जिला कृषि कार्यालय।

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