अब ऑनलाइन मिलेगी दुधारू पशुओं की पूरी जानकारी विभाग जिले के सभी पशुओं के कानों में लगाए जाएंगे टैग

Sitamarhi News - जिला में पशु संजीवनी कार्यक्रम के तहत दुधारू पशुओं की संख्या के साथ अन्य जानकारी ऑनलाइन किया जायेगा। पशुपालन...

Dec 04, 2019, 09:30 AM IST
Sitamarhi News - now complete information about milch animals will be tagged in the ears of all the animals of the district
जिला में पशु संजीवनी कार्यक्रम के तहत दुधारू पशुओं की संख्या के साथ अन्य जानकारी ऑनलाइन किया जायेगा। पशुपालन विभाग जिले के सभी गर्भाधान केन्द्रों पर पशुओं के कान में टैग लगाएगा। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति किसी भी दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल, दूध देने की क्षमता उसके पालक के अलावा पशु से संबंधित कई तरह की जानकारी घर बैठे मोबाइल से ले सकेंगे। इसके साथ ही किसानों को पशुपालन विभाग के साइट पर उन्हें जरूरी जानकारी मिल पाएगी।

इयर टैगिंग का तय किया गया लक्ष्य

20वीं पशु गणना के अनुसार 50628 दुधारू पशुओं के इयर टैगिंग किए जाने का लक्ष्य है। जिला पशुपालन पदाधिकारी राजीव रंजन चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। दुधारू पशुओं की पूरी जानकारी कहीं से कोई व्यक्ति ले सके, इसके लिए इयर टैगिंग का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मनुष्य की तरह पशुओं का भी हेल्थ कार्ड बनाया जा रहा है। कोई पशुपालक पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान के लिए सेंटर पर लेकर आते है, तो सबसे पहले उस पशु का निबंधन होगा। इसके बाद पशुपालक के पास कितनी और किस नस्ल की पशु है, इसकी जानकारी ली जाएगी। पशु ने कितना बच्चा दिया है, यह जानकारी भी दर्ज होगी। साथ में पशुपालक की भी पूरी जानकारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सारी जानकारी को एक यूनिक नंबर देकर विभाग के साइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। वहीं यूनिक नंबर का टैग के कान में लगाया जाएगा।

कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों पर इयर टैगिंग की सुविधा

जिले के 22 कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र के सहायक कर्मी के द्वारा पशुओं को इयर टैगिंग कर रही है। जिसमें अब तक जिला में कुल 335 पशुओं को टैगिंग किया गया है। इसके बाद प्रखंड स्तर पर एक टीम बनाकर गांव स्तर पर दुधारू पशुओं को टैग लगाया जाएगा। इन सभी कार्य की देख-रेख प्रखंड स्तर पर नोडल पदाधिकारी को दी गई है।

इयर टैकिंग करने के ये हैं फायदे

जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि इयर टैगिंग वाले पशुओं के किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा। टीकाकरण एवं कृमि नाशक दवाओं से डीवामिंग के ब्योरे के साथ नस्ल एवं दुग्ध उत्पादन क्षमता की जानकारी लेना भी टैगिंग से संभव है। फसल बीमा की तरह पशुओं की बीमा की योजना भी लागू होने वाली है। जिसके लिए टैगिंग अनिवार्य है। पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान कार्य का चरणबद्ध प्रगति ऑनलाइन अपडेट करने एवं नस्ल सुधार को नियंत्रित करने में मददगार एवं पशुओं के वंशावली का रिकॉर्ड रखने में सहायक होता है। टैगिंग के बाद पशु की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहने पर खरीद बिक्री में सुविधा होगी। पशुपालक पशुओं को खरीदना चाहते है तो उसके बारे में सारी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। ऐसे में किसी तरह की ठगी की संभावना नहीं रहेगी। बिचौलियों पर भी अंकुश लगेगा।

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