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सरकार विरोधी नारा लगाते हुए शिक्षकों ने 26वें दिन हड़ताल रखी जारी, कहा- 24 फरवरी तक लगन से काम किया है, हमें वेतन दो
विभिन्न मांगों के समर्थन में नियोजित शिक्षकों का हड़ताल लगातार जारी है। बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के तत्वावधान में शुक्रवार का मुख्यालय डुमरा स्थित बीआरसी पर शिक्षकों ने धरना दिया। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए प्रदर्शन भी किया। शिक्षकों ने कहा कि नियोजित प्रारंभिक शिक्षकों का हड़ताल 26वें दिन भी जारी रहा। कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी हठधर्मिता पर अड़े है तो शिक्षक भी इस बार मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे है। जब तक मांग पूरी नहीं हाेती है आंदोलन जारी रहेगा। सरकार आंदोलन को असफल करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। लेकिन, हड़ताली शिक्षक इन हथकंडों से विचलित नहीं होनेवाली है। चट्टानी एकता के साथ आंदोलन को और धारदार बनाया जाएगा। मौके पर पवन कुमार, शिवेंद्र पाठक, सुरेश सिंह, राधेश्याम राधे, बाल किशोर झा, अभिषेक कुमार, राजेश झा, माघवेंद्र प्रसाद यादव, मनीष कुमार सिंह, सुरेश भारती, सबील अहमद, द्विजेंदु कुमार, राम कुमार, अरुण तिवारी, मनोज मधुकर, अनिल मिश्र, ललित कुमार, रमण कुमार, अजीत कुमार, चंद्रशेखर पासवान आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
शिक्षकों ने कहा- अहंकारी सरकार के खिलाफ जारी रहेगा आंदोलन
सुप्पी | बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति प्रखंड इकाई सुप्पी के बैनर तले शुक्रवार को संयोजक राणा आकाश दीप की अध्यक्षता में हड़ताली शिक्षकों ने धरना दिया। मंच संचालन बलराम राय ने किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने होली जैसे पर्व में भी शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। जिससे बिहार के करीब चार लाख शिक्षकों की परिवार की होली फीकी रही। कहा कि जब तक यह अहंकारी सरकार हमारी मांगें मान नहीं लेगी तब तक हड़ताल अनवरत जारी रहेगा। मौके पर मनीष कुमार, प्रकाश झा, अखलाक कुरैशी,अ निल ठाकुर, उमाशंकर सिंह, रामबाबू पासवान, रणधीर कुमार, अमरनाथ कुमार, रजनी सिंह, सुनीता कुमारी, ललिता कुमारी, बविता कुमारी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराने का हथकंडा नहीं होगा सफल
इधर माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले माध्यमिक शिक्षकों ने मुख्यालय डुमरा स्थित आंबेडकर स्थल पर धरना दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिक्षक विरोधी नीति पर चल रही है। वे शिक्षक प्रतिनिधियों से वार्ता करने के बजाए शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज करवा रही है। नीतीश सरकार का यह हथकंडा कभी सफल नहीं होगा। शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में चट्टानी एकता के साथ डटे है। जब तक मांगे पूरी नहीं होती है हड़ताल जारी रहेगा। मौके पर आलोक रंजन, सुरंेद्र कुमार, कर्मवीर पासवान, आशुतोष कुमार, मुर्तुजा शाह, पंकज कुमार, संगीता चौधरी, डॉ. प्रवीण कुमार, उमेश कुमार आलोक, अजीत कुमार, अशोक कुमार आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।
वेतन भुगतान को लेकर स्थापना कार्यालय पर किया प्रदर्शन
इधर माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने शुक्रवार को लंबित वेतन भुगतान को लेकर डीपीओ स्थापना कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रभारी डीपीओ नरेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। कहा कि माध्यमिक शिक्षक गत 25 फरवरी से हड़ताल पर है। 24 फरवरी तक सभी माध्यमिक शिक्षकों ने पूरी लगन से काम किया है। इसके बावजूद फरवरी माह तक का वेतन भुगतान नहीं किया गया है। कहा कि अगर शीघ्र लंबित वेतन भुगतान नहीं किया गया तो कार्यालय का घेराव किया जाएगा। अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार ने बताया कि डीपीओ स्थापना कार्यालय पर धरना देने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अधिकारियों द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण प्रदर्शन के साथ ज्ञापन सौंपा गया है। मौके पर सचिव आलोक रंजन, मोहन सिंह, एसएन झा, संगीता चौधरी, राजीव कुमार पांडेय, विजय कुमार, कर्मवीर पासवान अादि शिक्षक शामिल थे।
पेंटिंग व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को करेंेगे जागरूक
बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ की बैठक बीआरसी परिसर में जिलाध्यक्ष पवन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस अवसर पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 20 मार्च तक नुक्कड़ नाटक व पेंटिंग के माध्यम से सरकार की शिक्षा व शिक्षक विरोधी नीति से आम लोगों को जागरूक किया जाएगा। कहा कि हर चौक चौराहे पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सरकार की शिक्षा विरोधी नीति के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी। इसके लिए उन्होंने शिक्षकों को अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। मौके पर अभिषेक कुमार, जितेंद्र पासवान, उमेश कुमार, अभय कुमार, नमोनाथ प्रसाद, जगदीश ठाकुर, शंकर साह, श्रवण कुमार, सुरेश कुमार, अजय पराशर, रामकुमार, प्रेम कुमार आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
सुप्पी में धरना देते आंदोलनकारी शिक्षक।
अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर धरना देते आंदोलनकारी शिक्षक।
डुमरा बीआरसी के बाहर प्रदर्शन करते आंदोलनकारी शिक्षक।