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सीतामढ़ी में नाॅर्थ बिहार का पहला भव्य जैन मंदिर जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ व 21वें तीर्थंकर नमिनाथ की जन्मस्थली है : नाहटा

Sitamarhi News - मुख्यालय डुमरा स्थित नवनिर्मत जैन मंदिर में पांच दिवसीय धर्मसभा का आयोजन मंगलवार को शुरू हुई। पूरे भक्ति भाव से...

Jan 29, 2020, 09:40 AM IST
Sitamarhi News - the first grand jain temple of north bihar at sitamarhi is the birthplace of 19th tirthankar mallinath of jainism and 21st tirthankar naminath nahata

मुख्यालय डुमरा स्थित नवनिर्मत जैन मंदिर में पांच दिवसीय धर्मसभा का आयोजन मंगलवार को शुरू हुई। पूरे भक्ति भाव से दूर दूर से आए संतों के द्वारा इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जैन श्वेतांबर कल्याणक तीर्थ न्यास के अध्यक्ष ललित कुमार नाहटा ने बताया कि डुमरा स्थित इस मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है। करोड़ों रुपये की लागत से नवनिर्मित इस मंदिर के निर्माण में 6 वर्ष लगे। इस मंदिर में 13 फरवरी 2015 को जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ व 21वें तीर्थंकर नमिनाथ की प्रतिमा स्थापित की गई। धर्मसभा कार्यक्रम मंे आगामी 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व पर्यटन मंत्री के आगमन का कार्यक्रम है। यह मंदिर वास्तु व स्थापत्य कला पर आधारित है। इसमें लोहा अथवा किसी अन्य धातु का उपयोग नहीं किया गया है। बेशकीमती पत्थरों से मंदिर को संवारा गया है। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शिव कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह मंदिर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और पर्यटक स्थल के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

सीतामढ़ी में अवतरित हुए थे 19वें और 21 वें तीर्थंकर : नाहटा

नाहटा ने बताया कि जैन धर्म में जैन परंपरा के तहत धर्म को प्ररूपित करने वाले महामानव को तीर्थंकर कहा जाता है। तीर्थंकर का अर्थ है- तारने वाला। इनको अरिहंत भी कहा जाता है। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं। इनमें महावीर आखिरी थे। 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ व 21वें तीर्थंकर नमिनाथ का अवतरण सीतामढ़ी की धरती पर हुआ था। मल्लिनाथ के पिता का नाम कुंभराज और माता का नाम प्रभावती (रक्षिता) था। वहीं, नमिनाथ के पिता का नाम विजय और माता का नाम सुभद्रा (सुभ्रदा-वप्र) था। वे मिथिला के राजा थे। तुलसीदास ने मिथिला को अभूतपूर्व नगरी लिखते हुए मल्लिनाथ व नमिनाथ के बारे में आना आदरभाव प्रकट किया है।

विभिन्न प्रदेशों से आए संतों द्वारा मंगलवार को जैन मंदिर परिसर में पांच दिवसीय धर्मसभा का आयोजन किया गया। कोलकाता के आचार्य सृजन पियूष सागर सुरेश्वर जी महाराज, सिलिगुड़ी के आचार्य विनय सागर सुरेश्वर जी महाराज व टाटानगर से आए साध्वी के नेतृत्व में धर्मसभा का आयोजन किया गया है।

साध्वी के नेतृत्व में हुआ कार्यक्रम

पूजा-अर्चना करते श्रद्धालुगण।

जैन मंदिर में स्थापित प्रतिमा।

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