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बाबा महेन्द्रनाथ : मेंहदार आने वाले भक्त नहीं लौटते खाली हाथ

मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना द्वापरयुग में दैत्यराज वाणासुर ने अपनी पुत्री उषा के लिए करायी थी।

कृष्णमुरारी पाण्डेय | Last Modified - Jul 23, 2014, 06:37 AM IST

सीवान.सीवान में बिहार व यूपी की सीमा पर स्थित मेंहदार के प्राचीन शिवमंदिर में बाबा महेन्द्रनाथ का दर्शन करने वाले खाली हाथ नहीं लौटते। यहां प्रतिदिन हजारों भक्तजन आते हैं। सावन में भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है। मंदिर का निर्माण नेपाल नरेश ने कराया था। मेंहदार में बाबा के दर्शन पूजन के लिए गोपालगंज, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, वैशाली, गया, आरा, कोलकाता, झारखंड व यूपी के अतिरिक्त नेपाल से भी लोग आते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मनोकामना पूर्ति के लिए यहां मत्था टेक चुके हैं और रुद्राभिषेक कर चुके हैं। यहां से लोगों की अपार आस्था जुड़ी हुई है।
13 वां ज्योतिर्लिंग हैं सोहागरा के बाबा हंसनाथ
सीवान में गुठनी स्थित सोहागरा शिव मंदिर के बाबा हंसनाथ की ख्याति दूर-दूर तक है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना द्वापरयुग में दैत्यराज वाणासुर ने अपनी पुत्री उषा के लिए करायी थी। मंदिर का विशाल शिवलिंग स्वयंभू है, इसे 13वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मान्यता है कि सवा माह तक सोमवार के पूजन से पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है। जन श्रुति के अनुसार ऐसे भी प्रमाण मिले हैं कि हंसध्वज के पुत्र तुंगध्वज ने संतान प्राप्ति के लिए सोहागरा मंदिर में पूजा अर्चना की थी।
जलाभिषेक करने पर चर्म रोग से मिलती है निजात
मान्यता है कि मेंहदार के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने पर नि:संतानों को संतान व चर्म रोगियों को रोग से निजात मिल जाती है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व नेपाल नरेश को कुष्ठ हो गया था। मायूस राजा राजपाट त्याग कर निकल पड़े और चलते-चलते सीवान जिलांतर्गत सिसवन प्रखंड के ग्यासपुर गांव के चंवर में पहुंचे। शौच के बाद हाथ धोने के लिए पानी तलाश रहे थे। उन्हें छोटे से गड्ढे में गंदा पानी मिला।
राजा विवश हो उसी से हाथ धोने लगे। जैसे ही गंदा पानी कुष्ठ हाथ पर पड़ा, हाथ का घाव व कुष्ठ गायब हो गया। फिर क्या था राजा ने उसी पानी से स्नान कर लिया और उनका कुष्ठ समाप्त हो गया। बाद में स्वप्न में आए भगवान शिव की प्रेरणा से राजा ने वहीं एक विशाल पोखरा खोदवाया और शिव मंदिर का निर्माण करवाया, जो आगे चलकर मेंहदार शिवमंदिर के नाम से प्रचलित हुआ।
(सावन में बढ़ जाती है दर्शन को आने वाले लोगों की तादाद)
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