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शराबबंदी के बाद भी महीने में इलाज कराने 300 से अधिक आते हैं मरीज

अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी के बाद भी नशा मुक्ति केन्द्र में मरीजों का आना बंद नहीं है। पहले शराब, फिर गांजा-भांग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 05:25 AM IST

अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी के बाद भी नशा मुक्ति केन्द्र में मरीजों का आना बंद नहीं है। पहले शराब, फिर गांजा-भांग और अब यहां स्मैक के नशे के आदी आ रहे हैं। सदर अस्पताल में खुले नशा मुक्ति केन्द्र काे दो वर्ष से ज्यादा हो चुका है। इस वार्ड का संचालन 5 अप्रैल 2016 से जिला अस्पताल में शुरू की गई थी।

आंकड़ों पर गौर करें तो 5 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2018 तक 727 लोगों का भर्ती कर इलाज किया जा चुका है। यहां प्रतिदिन ओपीडी में 10 से 15 मरीजों को देखा जाता है। इस वार्ड के काउंसलर अरुण लाल और संजीव रंजन बताते हैं कि यहां ऐसे शराबी या अन्य नशे की लत वाले लोग आते हैं, उनकी हरकतों को देखकर मौजूद डॉक्टर और वार्ड के अन्य मरीज और उनके साथ आए अटेंडेंट भी डर जाते हैं। ये ऐसे मरीज होते हैं कि कभी भी खतरनाक हरकतें करने लगते हैं। जिसे देख कर वार्ड में मौजूद अन्य रोगी भी डर जाते है। इन्हें कंट्रोल करने के लिए वार्ड में काउंसलर और गार्ड की मौजूदगी होती है।

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