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जर्जर भवन में खुद असुरक्षित हैं मंडल कारा की सुरक्षा करने वाले बंदी रक्षक

जिला जेल की सुरक्षा में लगे बंदी रक्षकों की खुद की सुरक्षा खतरे में है। जेल की सुरक्षा में लगे सैकड़ों बंदी रक्षकों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 05:40 AM IST

  • जर्जर भवन में खुद असुरक्षित हैं मंडल कारा की सुरक्षा करने वाले बंदी रक्षक
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    जिला जेल की सुरक्षा में लगे बंदी रक्षकों की खुद की सुरक्षा खतरे में है। जेल की सुरक्षा में लगे सैकड़ों बंदी रक्षकों को मौत के साये में सोना पड़ता है। ऐसे जर्जर भवन में सोते समय पुलिसकर्मियों की रूह कांपती है। जरा बारिश हुई नहीं कि भवन में रहने वाले पुलिसकर्मी भगवान का नाम जपने लगते हैं। इसका कारण है कि रहने वाला भवन इतना जर्जर हो चुका है कि चारों ओर की दीवारों की सीलन से घर में रखे कपड़े और खाने का सामान तक खराब हो जाते हैं। बंदी रक्षकों के इस भवन का शौचालय तक खराब हो चुका है। शौच जाने के लिए इन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है। इस भवन रहने वाली महिला पुलिसकर्मियों को तो और आफत है। मजबूरी में उन्हें शौच करने के लिए बाहर जाना पड़ता है। बंदी रक्षकों के रहने के लिए दो बिल्डिंग भवन निर्माण विभाग से बना हुआ है, जिसमें लगभग 28 कमरा है।

    शौचालय तक खराब हो चुका है, शौच जाने के लिए इन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है

    बंदी रक्षकों का रहने वाला जर्जर भवन।

    छत से पानी के साथ सीमेंट और पत्थर के टुकड़े गिरते हैं

    लेकिन भवन जर्जर होने से उसमें रहने वाले सुरक्षाकर्मियों को काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उनके जान को भी खतरा है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। मंडल कारा में तैनात पुलिसकर्मी सुरेन्द्र राय ने बताया कि महिला और पुरुष बंदी रक्षकों के रहने के लिए बना दोनों भवन जर्जर हो चुका है। जब बारिश होती है तो सोना छोड़कर कर पानी गिरने वाले स्थानों पर बाल्टी व मग लगाया जाता है। दरवाजा और खिड़की टूट जाने से आवारा जानवर भी घरों में घुस जाते हैं और खाने के लिए समान को नुकसान पहुंचाते हैं। बरसात होने पर छत से पानी के साथ-साथ सीमेंट और पत्थर का टुकड़ा भी गिरता है जिससे इनके बेड पर लगे चादर और तकिया तक खराब हो जाता है।

    खतरे को दावत देता भवन की छत।

    क्या कहते हैं जेल अधीक्षक

    जिला जेल के सुरक्षाकर्मियों को रहने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नये भवन बनवाने के लिए विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। बंदी रक्षकों के लिए 2012 में भवन निर्माण विभाग से 18 बेड का बैरक पास हुआ था लेकिन आजतक नहीं बना। राकेश कुमार, जेल अधीक्षक, सीवान

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