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सीवान में धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, तीन दिनों में 9500 हेक्टेयर खेतों में हुई रोपनी

जिले में धान की रोपनी रफ्तार पकड़ ली है। तीन दिनों के अंदर किसानाें ने 10 फीसदी खेतों में रोपनी की है। जबकि इसके पहले...

Dainik Bhaskar

Jul 24, 2018, 05:45 AM IST
सीवान में धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, तीन दिनों में 9500 हेक्टेयर खेतों में हुई रोपनी
जिले में धान की रोपनी रफ्तार पकड़ ली है। तीन दिनों के अंदर किसानाें ने 10 फीसदी खेतों में रोपनी की है। जबकि इसके पहले भी 9500 हेक्टेयर में रोपनी की गई थी। इस वजह से किसान 20 फीसदी रोपनी का लक्ष्य पूरा कर चुके हैं। इधर बारिश के बाद खेतों में पानी लग गया है। जहां पर पानी की कमी महसूस हो रही है, वहां किसान मशीन से पानी खरीद कर रोपनी कर रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि शनिवार को जिस तरह से बारिश हुई है। उससे और बारिश होगी और धान की रोपनी के लिए लाभदायक होगा। अच्छी बारिश की उम्मीद में किसान सोमवार को भी धान की रोपनी करते रहे। वहीं मक्का व अरहर की खेती में भी तेजी आ गई है। ऊंचाई वाले खेत जहां पर बारिश के बाद नमी आ गई है।

लेकिन वहां पर पानी नहीं ठहरता है। वहां मक्का व अरहर की भी खेती की जा रही है। जबकि चंवरी क्षेत्र में खेतों में पानी लगा हुआ है। इसलिए रोपनी करना आसान हो गया है। इधर रविवार व सोमवार को झमाझम बारिश नहीं हुई। इससे किसान चिंतित दिखे। हालांकि छिटपुट बारिश हुई।

अभी तक 20 फीसदी रोपनी का लक्ष्य हुआ पूरा

बादल देखक किसान खुश

जिले में छिटपुट बारिश होने व आकाश में बादल को देखकर किसान खुश हुए। किसानों का कहना है कि जब बादल मंडरा रहा है तो तेज बारिश जरूर होगी। जिला कृषि पदाधिकारी अशाेक कुमार राव ने बताया कि बारिश की उम्मीद बनी हुई है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस माह के अंत तक अच्छी बारिश होगी। शनिवार को जो बारिश हुई है। उस पानी से रोपनी की जा रही है। इधर दूसरे दिन बारिश नहीं होने से हसनपुरा, दरौंदा व सिसवन के किसान ज्यादा चिंतित है। हसनपुरा व दरौंदा प्रखंड में बारिश हुई ही नहीं थी।

70.06 एमएम बारिश हुई है जुलाई माह में जिले में

हसनपुरा व दरौंदा प्रखंड में बारिश हुई ही नहीं थी

09.04 एमएम बारिश हुई जिले में दो दिनों के अंदर

03 एमएम बारिश से ही सिसवन किसानों को करना पड़ा था संतोष

आकाश में बादल मंडराते हुए देखकर किसानों के बीच उम्मीद बढ़ी हुई है। किसानों का कहना है कि बरसात के मौसम में थोड़ा-बहुत रोज बारिश होने से फसल के लिए लाभदायक होता है। साथ ही किसानों को भी उम्मीद रहती है कि बारिश हो रही है तो उसे पानी खरीदना नहीं पड़ेगा। धान की फसल के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है। इसलिए पानी खरीद कर धान की फसल अंतिम समय तक तैयार करना संभव नहीं होता है। किसानों का कहना है कि जितनी धान होगी। उससे ज्यादा पानी खरीदने में पैसे लग जाएंगे।

02 दिनों में नहीं हुई सिसवन में एक बूंद भी बारिश

15 एमएम बारिश हुई दो दिनाें में दरौंदा प्रखंड में

जिले में सबसे कम सिसवन में बारिश

जिले में सिसवन प्रखंड क्षेत्र में सबसे कम बारिश हुई है। जिले में शनिवार को जहां पर झमाझम बारिश हुई थी। वहीं सिसवन प्रखंड में 3 एमएम ही बारिश हुई थी। जबकि शनिवार की सुबह आठ बजे लेकर सोमवार की सुबह आठ बजे तक सिसवन में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। हालांकि सोमवार की दोपहर में थेड़ी बारिश हुई। हसनपुरा व दरौंदा में बिल्कुल बारिश नहीं हुई थी। लेकिन दरौंदा में दो दिनाें में 15 एमएम बारिश हुई है। जबकि हसनपुरा प्रखंड में भी पिछले दो दिनों के अंदर 49 एमएम बारिश हुई थी। इसलिए इस दोनों प्रखंडों में भी धान की रोपनी शुरू हो गई है।

क्या कहते हैं डीएओ


49 एमएम बारिश हुई दो दिनों में हसनपुरा प्रखंड में

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