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अल्पावासगृह में शुरू हुई परित्यक्त महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन-यापन की ट्रेनिंग

सीवान के महिला अल्पावास गृह ने परित्यक्त महिलाओं की जिन्दगी संवारने के लिए एक नई पहल शुरू की है। महिला अल्पावास...

Dainik Bhaskar

Aug 05, 2018, 05:45 AM IST
अल्पावासगृह में शुरू हुई परित्यक्त महिलाओं के सम्मानपूर्वक जीवन-यापन की ट्रेनिंग
सीवान के महिला अल्पावास गृह ने परित्यक्त महिलाओं की जिन्दगी संवारने के लिए एक नई पहल शुरू की है। महिला अल्पावास गृह में रह रही लड़कियों की काउंसलिंग तो प्रतिदिन हो ही रही है, साथ ही वह गलत रास्ते पर न जाएं इसके लिए लड़कियों को सिलाई कटाई भी सिखाई जा रही है। इसके लिए मशीन रखी गई है। इतना ही नहीं उन्हें संगीत की भी शिक्षा वहीं दी जा रही है, इसके लिए अल्पावास गृह में वाद्य यंत्र भी मंगाया गया है। ताकि लड़कियां संगीत सीख सके और उसका उपयाेग व्यवहारिक जिन्दगी में कर सकें। कैरम बोर्ड के अलावा अन्य खेलने के सामान भी यहां उपलब्ध कराए गए हैं।

पहले यह भी हो चुका है बदनाम

उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर व छपरा कांड की तरह सीवान में भी मामला उजागर हो चुका है। यह बात अलग है कि वर्तमान में सब कुछ बदला बदला है। वर्ष 2014 में तब यह अपने तरह का सारण कमिश्नरी का पहला मामला था। तब इस अल्पावास गृह की 12 अबलाएं एक साथ खिड़की के रास्ते भागी थीं और महिला थाना में जाकर शरण लिया था। मामला 15 अप्रैल 2014 का है। पीड़ित अबलाओं ने संचालक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे और यौन शोषण की शिकायत महिला थानाप्रभारी से की थी।

मुजफ्फरपुर व छपरा कांड की तरह सीवान में भी मामला हो चुका है उजागर

टाउन थाने में दर्ज हुई थी प्राथमिकी

तब जिला प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया था और इस मामले में टाउन थाने में एफआईआर दर्ज करवाया। केस की आईओ सह तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष पूनम कुमारी ने इस मामले में आरोपित संचालक रणधीर समेत आठ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में सभी 10 आरोपितों के खिलाफ तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष ने जांच में मामले को सत्य पाते हुए कोर्ट में आरोप पत्र भी दाखिल किया। यहां से भागने का मामला दो बार सामने आया था। 18 जनवरी 2014 और 15 अप्रैल 2014 शामिल है। अप्रैल में तो 12 लड़कियां भागी थीं।

छपरा से 26 आई थीं सीवान

छपरा अल्पावासगृह में मामले के उजागर होने के बाद वहां से 26 लड़कियों को प्रशासन के आदेश पर छपरा मुफस्सिल थाने की महिला एसआई पूनम कुमारी ने सीवान अल्पावासगृह में लाकर रख दिया गया। हालांकि इसमें से कई लड़कियां आने माता- पिता के पास भी चली गई या अपने ससुराल चली गई। कोर्ट अभी सीवान अल्पावासगृह में 25 लड़कियां हैं। इसमें सीवान की 6 जबकि अन्य छपरा से लाई गई है। यह अभी लड़कियां विभिन्न मामलों में यहां है। इसमें सबसे ज्यादा प्रेम प्रसंग के बाद घर से भागने के बाद उसके माता या पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद रखी गई है। जबकि कई लड़कियों को पुलिस ने लावारिस हालत में बरामद किया है।

घटना के बाद लगाए गए सीसीटीवी कैमरे

सीवान अल्पावासगृह अब सीसीटीवी कैमरे की नजर में है। वहां पर आने व जाने वाले हर व्यक्ति कैमरे की रडार पर रहते हैं। वर्ष 2016 में चार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। जबकि मार्च 2017 में 5 कैमरे लगाए गए। इस तरह समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित अल्पावासगृह की निगरानी इन दिनों 9 सीसीटीवी कैमरे से होती है। हालांकि सुरक्षा के लिए महिला जवान की भी तैनाती की गई है। जबकि दो महिला पुनर्वास पदाधिकारी की भी पदस्थापना हुई है।

माता-पिता के अलावा किसी से मिलने की अनुमति नहीं

अल्पावासगृह में रह रही लड़कियों से केवल माता- पिता के ही मिलने की अनुमति दी जाती है। वह भी बिना लड़कियों की सहमति से। अगर माता- पिता आते हैं तो लड़कियों से पहले पहचान कराई जाती है। कई बार लड़कियां अपने माता-पिता से भी मिलने से इनकार कर देती हैं।

घटना के बाद हटाई गईं थीं लड़कियां



वर्ष 2014 में हुई घटना के बाद सीवान अल्पावासगृह में रह रही लड़कियों को भी यहां से हटाया गया था। दूसरे जिले की अल्पावास गृह में रखा गया था। यहां के संचालक के जेल जाने के बाद संचालन के लिए नई एजेंसी की तलाश की गई। फिलहाल भाभा इंस्च्टीच्यूट ऑफ सोशल सर्विसेस छपरा इसका संचालन कर रहा है। इसके संचालन की जिम्मेवारी 14 नवम्बर 2014 से मिली है। इसके पहले जो एजेंसी संचालन कर रही है। वहीं एजेंसी छपरा में भी संचालन कर रही है। सीवान में सचिव के जेल जाने के बाद प्रशासन ने सबक नहीं लिया और छपरा में भी वह महिला अल्पावासगृह का संचालन करते रहा। इसका सामने आ गया।

मनोरमा देवी के बयान पर दर्ज हुआ था केस

15 अप्रैल 2014 को भागी 12 अबलाओं के मामले में अल्पावास गृह की पदाधिकारी मनोरमा देवी के बयान पर अल्पावास गृह को चलाने वाली संस्था के सचिव रणधीर प्रसाद, होमगार्ड के जवान राजेश्वर प्रसाद, रामायण चौधरी, शर्मा जी साह, अक्षयलाल साह, रामजी प्रसाद, महिला सिपाही अनुपमा देवी, हितकारी टोपो, संतोष कुमार, शीला देवी, सीता देवी काे नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसकी जांच की जिम्मेवारी तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष पूनम कुमारी को दी गई थी। भगाने वाली कई संवासिनों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। साथ ही वहां की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया था।

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