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महेंद्रनाथ मंदिर में 7 को दूध से होगा अभिषेक

जिले के सिसवन प्रखंड के महेन्द्रनाथ मंदिर में सावन मास में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु़ओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। रोज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 05, 2018, 05:45 AM IST

महेंद्रनाथ मंदिर में 7 को दूध से होगा अभिषेक
जिले के सिसवन प्रखंड के महेन्द्रनाथ मंदिर में सावन मास में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु़ओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। रोज बड़ी संख्या में श्रद्वालु जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं।

हालांकि यह संख्या शुक्रवार व सोमवार को बढ़ जा रही है। इस मंदिर में सीवान, छपरा, गोपालगंज समेत यूपी से भी श्रद्वालु आ रहे हैं। इधर 7 अगस्त को महेन्द्रनाथ मंदिर में एक बूंद भी जल से जलाभिषेक नहीं होगा। उस दिन पूरी तरह जल चढ़ाना वर्जित होगा। कई परम्परा कई साल से चली आ रही है। सावन मास की एकादशी को यादव समाज के लोग इस दिन दूध से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। इस साल भी दूध से अभिषेक करने की तैयारी की जा रही है। उस दिन बड़ी संख्या में श्रद्वालु जुटेंगे। इसलिए सुरक्षा की भी मांग की गई है।

इसके लिए बाबा महेन्द्रनाथ शिव मंदिर अरघा समिति के अध्यक्ष ब्रज किशोर यादव ने सिसवन के एसडीओ, एएसपी, सीओ व चैनपुर ओपी प्रभारी को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि 7 अगस्त को बिहार व यूपी के श्रद्वालु दूध चढ़ाने के लिए आएंगे। इसके लिए पुलिस व महिला सुरक्षा कर्मियों को भी तैनात करने का अनुरोध किया गया है।

यादव समाज के लाेग कर रहे हैं अरघा की तैयारी, सुरक्षा के इंतजाम के लिए लिखा पत्र

समिति कर रही है प्रचार प्रसार | महेन्द्रनाथ मंदिर में अरघा को लेकर प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। समिति से जुड़े हरेराम यादव, गौतम यादव, ललन यादव, बबन चौधरी, अवधेश यादव, भरत चौधरी, कन्हैया यादव, शिवनाथ यादव, रामनाथ यादव, दीनानाथ यादव राजदेव यादव, राजकिशोर प्रसाद, शम्भू यादव समेत अन्य लोग इसकी प्रचार में जुटे हैं।

क्या है महेन्द्रनाथ मंदिर में अरघा

महेन्द्रनाथ मंदिर में कई साल से यह परम्परा है कि सावन मास की एकादशी को शिवलिंग वाले गर्भ गृह को दूध से भरा जाता है। गर्भगृह से जल निकासी की राह को बंद कर दिया जाता है। इसके बाद भगवान भोलेनाथ की लिंग पर दूध चढ़ाया जाता है। इस तरह गर्भगृह भर जाता है। इसे अरघा कहा जाता है। जब गर्भ गृह भर जाता है तो उसे खोल दिया जाता है। ताकि दूध अमृततुल्य कमलदाह सरोवर में जा सके। हालांकि कई श्रद्वालु इस दूध का नाली से प्रसाद के रूप में उठाव भी करते हैं। पिछले साल अरघा को 26 बार भरा गया था। इस बार इससे भी ज्यादा भरने की तैयारी की जा रही है।

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