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पुरानी किताबों से ही नए सत्र में पढ़ रहे हैं 4.50 लाख बच्चे

सिटी रिपोर्टर| सीवान सरकारी स्कूलाें में नए सत्र में पढ़ाई शुरू हो गई है लेकिन अभी तक किसी भी स्कूल के बच्चों को...

Bhaskar News Network| Last Modified - Jul 22, 2018, 05:50 AM IST

पुरानी किताबों से ही नए सत्र में पढ़ रहे हैं 4.50 लाख बच्चे
पुरानी किताबों से ही नए सत्र में पढ़ रहे हैं 4.50 लाख बच्चे
सिटी रिपोर्टर| सीवान

सरकारी स्कूलाें में नए सत्र में पढ़ाई शुरू हो गई है लेकिन अभी तक किसी भी स्कूल के बच्चों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं। बच्चे पुरानी किताबों से ही नए सत्र में पढ़ाई कर रहे हैं। सरकार की इस व्यवस्था से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों को किताब खरीदने के लिए निर्धारित राशि शिक्षा समिति के खाते से बच्चों के खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है।

किसी भी छात्र के पास अभी तक नहीं हैं किताबें, वीएसएस के एकाउंट में पड़ी हैं अभी किताबों की 5 करोड़ राशि

जिले में मौजूद स्कूल

899

जिले में मिडिल स्कूल

1202

जिले में प्राइमरी स्कूल

बच्चों की संख्या

4.5 लाख

कक्षा एक से आठ में नामांकित बच्चे

स्टॉल लगाकर किताबों कि बिक्री की जाएगी

विभाग ने पत्र भेज कर राज्य परियोजना निदेशक, शिक्षा को जिले में किताब उपलब्ध न होने की सूचना दी गई है। जल्द ही जिले में विक्रेता द्वारा स्टॉल लगाकर किताबों कि बिक्री की जाएगी। और जिन बच्चों के खाते में अभी तक पैसा नहीं पहुंचा है उन्हें भी जल्द से जल्द भेजे जाएंगे। समर बहादुर सिंह, डीपीओ, सर्व शिक्षा अभियान

शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों को भेजी जाने वाली राशि

कक्षा एक Rs.120

कक्षा दो Rs.135

कक्षा तीन Rs.135

कक्षा चार Rs.155

कक्षा पांच Rs.125

कक्षा छह Rs.250

कक्षा सात Rs.310

कक्षा आठ Rs.295

बच्चों के खाते में नहीं गई किताबों की राशि

विद्यालयों एवं विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से आधे से अधिक छात्रों को किताब की राशि अबतक नहीं दी गई है। सीवान सर्व शिक्षा विभाग के किताब प्रभारी रंजीत मांझी ने बताया कि जिले के छात्रों को किताब खरीदने के लिए 8 करोड़ राशि आई है। जिसमें से लगभग 5 करोड़ राशि विद्यालय शिक्षा समिति के खाते में वितरण के लिए चली गई है। लेकिन स्कूलों द्वारा समय से सूची उपलब्ध ना कराये जाने से बच्चों को राशि मिलने में विलंब हो रही है। इस वर्ष बाजार में भी बच्चों कि किताबें शिक्षा विभाग द्वारा ही उपलब्ध कराया जाना है। लेकिन व

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