धान की रोपनी शुरू,अबतक जिले में 66 एमएम बारिश / धान की रोपनी शुरू,अबतक जिले में 66 एमएम बारिश

Siwan News - सीवान में 16 दिन बाद झमाझ़म बारिश होने से किसानों से किसानों के चेहरे खिल गए। किसान सुबह में उठे और खेतों की तरफ गए।...

Bhaskar News Network

Jul 22, 2018, 05:50 AM IST
धान की रोपनी शुरू,अबतक जिले में 66 एमएम बारिश
सीवान में 16 दिन बाद झमाझ़म बारिश होने से किसानों से किसानों के चेहरे खिल गए। किसान सुबह में उठे और खेतों की तरफ गए। जैसे ही खेत में पानी लगे हुए देखा। वे रोपनी कार्य में जुट गए। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह बारिश हुई तो रोपनी कार्य में तेजी आ जाएगी। बारिश बंद होने से किसान निराश हो गए थे और वे धान की रोपनी करना भी बंद कर दिए थे। जिले में अंतिम बार 4 जुलाई को ही बारिश हुई थी। इसके बाद से बारिश बंद हो गया था। हालांकि एक व दो जुलाई को ठीक-ठाक बारिश हुई थी। जबकि 3 व 4 जुलाई को हल्की बारिश हुई थी। उसी बारिश के बाद किसानों ने कुछ रोपनी की थी। बारिश के लिए लम्बे समय से इंतजार कर रहे किसानों की नींद शनिवार की अहले सुबह ढाई बजे खुली। किसानों ने देखा तो झमाझम बारिश हो रही थी। यह देख किसान खुश हो गए और उसी समय भगवान से विनती करने लगे कि यह बारिश और थोड़ी देर तक होते रहे। जब देर तक बारिश होने लगी तो किसानों ने रोपनी का कार्यक्रम अहले सुबह ही बना लिया। सुबह में वे खेतों में गए। ट्रैक्टर व हल बैल से खेतों की जुताई कराकर उसे रोपनी लायक बनाया और बिचड़े को लेकर रोपनी में जुट गए।

दो जुलाई तक 23 एमएम व चार जुलाई तक 30 एमएम बारिश हुई थी, इधर 16 दिनों में हल्की बारिश हुई थी

जिले के बसंतपुर में धान की रोपनी करते मजदूर।

मक्का व अरहर की होने लगी खेती| किसान मक्का व अरहर की खेती भी करने लगे। अभी बारिश से खेतों में पानी लगा हुआ है। लेकिन जैसे ही ऊंचाई वाले खेत से एक दो दिनों में पानी हटेगा। मक्का व अरहर की बुआई भी तेजी से होगी। जिले में 65 एमएम बारिश हुई है। जबकि दो जुलाई तक 23 एमएम व चार जुलाई तक 30 एमएम बारिश हुई थी। इधर 16 दिन के अंदर कही कही हल्की बारिश हुई थी। इस तरह औसत 3 एमएम बारिश हुई थी। लेकिन शनिवार की सुबह हुई बारिश से धान की रोपनी लायक बारिश हो गई।

अभी तक जिले में महज 10 फीसदी ही रोपनी हुई थी। जबकि जिले में 98 हजार हेक्टेयर में रोपनी करनी है। इस तरह रोपनी का लक्ष्य काफी पीछा है। जबकि रोपनी करने का उत्तम समय 10 जुलाई तक ही है। वैसे 30 जुलाई तक भी रोपनी की जा सकती है। लेकिन 30 जुलाई तक भी रोपनी पूरी होने की संभावना नहीं है। हालांकि किसान चाहकर भी 17000 हेक्टेयर में रोपनी नहीं कर पाएंगे। कारण कि उसके लायक किसानों ने बिचड़ा भी तैयार नहीं किया है। बिना बिचड़ा रोपनी नहीं हो पाएगी। इधर जो बिचड़े डाले गए हैं। उसमें से भी कुछ सूख गए हैं या पानी के अभाव में विकसित नहीं हुआ है।

जिले में महज 10 फीसदी ही रोपनी हुई

क्या कहते हैं डीएओ


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