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सदर अस्पताल से बिना इलाज के लौटे 500 मरीज, निजी भी बंद

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शनिवार को सदर अस्पताल समेत प्राइवेट...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 29, 2018, 09:10 AM IST

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    नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शनिवार को सदर अस्पताल समेत प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टर हड़तला पर रहे। हड़ताल के कारण जहां सदर अस्प्ताल में ओपीडी ठप रही, वहीं दूर दराज से दवा इलाज के लिए आए करीब 500 से अधिक मरीज दवा व इलाज के बिना ही लौट गए। हड़ताल के दौरान इमरजेंसी केस भी टालने की कोशिश की गई। चिकित्सकों का कहना था कि मांगे नहीं मानी जा रही है। हड़ताल में सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर दोनों शामिल रहे। जिसके कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नौतन से आए मरीज रामकिशुन ने बताया कि हड़ताल की जानकारी उन्हें नहीं थी और रजिस्ट्रेशन कराने के बाद जब ओपीडी में दिखाने गए तो वहां डॉक्टर नहीं मिले। दोपहर 12 बजे तक करीब 300 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया था, जबकि 200 से अधिक मरीज दो बजे तक पहुंच चुके थे।

    निजी कॉलेजों व अभिमत विश्वविद्यालयों में 50% सीटों की फीस का निर्धारण, प्रबंधन के विवेकाधिकार पर 50% सीटों के फीस निर्धारण को छोड़ देता है। वे मनमाना शुल्क निर्धारित कर सकेंगे। वर्तमान बिल गरीब विरोधी है। ब्रिज कोर्स की अनिवार्यता हटा दी गई है, परंतु ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल के लिए आधारित क्षमता निर्माण के नाम पर प्राधिकरण को निहित करना मिक्सोपैथी और परिणाम स्वरुप झोलाछाप डॉक्टरों को सत्यापित करने का एक नया तरीका है।

    दोपहर 12 बजे तक 300 ने रजिस्ट्रेशन कराया था, 200 से अधिक मरीज दो बजे तक पहुंचे

    सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

    रजिस्ट्रेशन के लिए लगी भीड़।

    निजी अस्पतालों में भी लटके रहे ताले

    केन्द्र सरकार की नीति के खिलाफ जिले के प्राइवेट डॉक्टर भी हड़ताल पर रहे। इससे निजी अस्पतालों में भी ताले लटके रहे। आईएमए सीवान शाखा की कार्यकारिणी की बैठक अध्यक्ष डॉ. शशिभूषण सिन्हा की अध्यक्षता में शुक्रवार की रात सचिव डॉ. शरद चौधरी के निवास पर हुई। जिसमें यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जिले के सभी डॉक्टर व सभी अस्पताल नेशनल मेडिकल काउंसलिंग के गठन के विरोध में हड़हताल पर रहेंगे।

    आईएमए का कहना है कि कुछ संशोधन कर आंशिक रूप से सरकार अपने मनमर्जी के अनुसार इस बिल को लागू कर रही है। जिसका देश के सभी चिकित्सक विरोध करते हैं। मौजूदा 5 से 9 तक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के निर्वाचित प्रतिनिधित्व को बढ़ाने और 25 से 29 तक सदस्यों की कुल संख्या में वृद्धि के संबंध में संसदीय स्थाई समिति की सिफारिश को अस्वीकृत कर दिया गया है, जिससे लोकतांत्रिक विरोधी चरित्र को बनाए रखा गया है । प्रत्येक स्वायत्त बोर्ड में एक निर्वाचित सदस्य होने के लिए संसदीय स्थाई समिति की सिफारिश भी अस्वीकृत कर दी गई है।

    सरकार मनमर्जी बिल को कर रही लागू

    इमरजेंसी केस भी टालने की कोशिश, चिकित्सकों का कहना था कि मांगे नहीं मानी जा रही

    ग्रामीण क्षेत्रों में दिखा हड़ताल का असर

    सीवान | आइएमए द्वारा आहूत एक दिवसीय हड़ताल का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामने आया। गोरेयाकोठी, पचरुखी, महराजगंज, दरौली, सिसवन, रघुनाथपुर, बड़हरिया सहित ग्रामीण क्षेत्र के सभी अस्पतालों में आउटडोर सेवाएं बाधित रही। मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। हड़ताल का असर पीएचसी में भी देखने को मिला। पचरुखी पीएचसी में इलाज कराने आई कलावती देवी, मुन्नी देनी, पुष्पा देवी ने बताया कि उसे बुखार है। लेकिन इलाज नहीं हुई।

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