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12 बजे तक 550 मरीज, डॉक्टर एक, चार घंटे में सभी का इलाज

सदर अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का हाल बहुत बुरा है। यहां एक मरीज पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 20, 2018, 12:50 PM IST

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    सदर अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का हाल बहुत बुरा है। यहां एक मरीज पर 30 सेकंड से भी कम समय डाॅक्टरों द्वारा दिया जा रहा है। इलाज के नाम पर इस नाइंसाफी से मरीजों में आक्रोश है। गुरुवार को ओपीडी में दोपहर 12 बजे तक 550 से अधिक मरीजों की भीड़ थी। लेकिन ओपीडी में मात्र एक डॉ. वीरेन्द्र प्रसाद मौजूद थे। मरीजों का इलाज ओपीडी में मौजूद डॉ. वीरेन्द्र प्रसाद द्वारा दोपहर 12 बजे तक किया गया। ओपीडी में मौजूद डॉक्टर ने लाॅन्च ब्रेक करते हुए चार घंटे में सभी 550 मरीजों का जांच व इलाज करने के बाद सबकी छुट्टी थी।

    तीन दिनों से रोज जांच के लिए बुलाया जा रहा है

    लक्ष्मीपुर आंदर से आए सुशील कुमार ने बताया कि डॉक्टर पूरी बीमारी सुने बिना ही पर्ची पर दवा लिख दिए और वापस भेज दिए। पूछने पर कहा कि दवा खाओ ठीक हो जाओगे। वहीं मौजूद मरीज मछौती निवासी रिंकू देवी ने बताया कि ब्लड जांच और कफ जांच के लिए उसे पिछले तीन दिनों से रोज बुल ाया जा रहा है लेकिन भीड़ का हवाला देकर जांच नहीं किया जा रहा है।

    ओपीडी में मौजूद डॉक्टर के पास मरीजों की भीड़।

    क्या कहते हैं संबंधित अधिकारी

    अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध न होने को लेकर सदर अस्पताल के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी विश्व मोहन ठाकुर ने बताया कि अल्ट्रासाउंड का संचालन जितेंद्र द्वारा की जा रही थी लेकिन उनके लाइसेंस की अवधि पूरी हो चुकी है। लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया चल रही है, अभी शुरू होने में समय लगेगा। ठाकुर विश्वमोहन, डीपीएम, सदर अस्‍पताल

    बिना बीमारी सुने दवा लिखने लगते हैं डाॅक्टर

    अल्ट्रासाउंड कक्ष में महीनों से ताला बंद।

    26 से उपलब्ध नहीं है अल्ट्रासाउंड की सुविधा

    सदर अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधा के नाम पर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष बना हुआ है लेकिन इसमें महीनों से ताला बंद है। यह सुविधा पिछले 26 अप्रैल से उपलब्ध नहीं है। मरीज अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं।

    क्या कहते हैं उपाधीक्षक

    चिकित्सकों की कमी से कभी कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। चिकित्सकों का पूरा प्रयास होता है कि मरीजों की पूरी बात सुन व समझकर ही दवा लिखी जाए। डाॅ. एमके आलम, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल सीवान

    नहीं उठा सिविल सर्जन का फोन | अस्पताल में ओपीडी की व्यवस्था के बारे में पूछने के लिए कई बार सिविल सर्जन डाॅ. शिवचन्द्र झा को फोन किया गया, लेकिन उनकी तरफ से फोन रिसीव नहीं किया गया।

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