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करगिल के वीर शहीदों को भूल गई प्रदेश की सरकार

महुअल महाल में शहीद का स्मारक। सिटी रिपोर्टर| सिसवन कारगिल युद्ध को 19 साल गुजर गए हैं। जब यह युद्ध छिड़ा तब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 26, 2018, 04:30 PM IST

करगिल के वीर शहीदों को भूल गई प्रदेश की सरकार
महुअल महाल में शहीद का स्मारक।

सिटी रिपोर्टर| सिसवन

कारगिल युद्ध को 19 साल गुजर गए हैं। जब यह युद्ध छिड़ा तब सैकड़ों वीर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इन जांबाज जवानों में अपने जिले के भी दो सपूत भी शामिल थे। उन्होंने जान की बाजी लगाकर दुश्मनों को मार गिराया था। इन वीर जवानों की स्मृति में 26 जुलाई को विजय दिवस मनाया जाता है। सीवान आज अपने इन सपूतों को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। पूरा बिहार अाज गर्व महसूस कर रहा है कि इस युद्ध में उसके जवानों ने भी देश के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई और हंसते-हंसते खुद की जान को न्यौछावर कर दिया।

शहीद हरेकृष्ण राम की स्मृति में नहीं बन सकी रोड : हसनपुरा प्रखंड के महुवल-महाल निवासी हरे कृष्ण राम 5 जुलाई, 1999 को कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गये थे। 12 जुलाई 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने शहीद के पैतृक गांव महुवल महाल पहुंच कर उनके परिजनों को ढाढ़स बंधाया था। उन्होंने दरौंदा से हाथोपुर होते हुए महुवल-महाल तक जानेवाली सड़क को उनके नाम पर करने, गांव में स्वास्थ्य केन्द्र बनवाने व समाधि स्थल पर आदमकद प्रतिमा लगाने का आश्वासन दिया था। परंतु, दरौंदा से हाथोपुर होते हुए महुवल महाल तक बड़ी सड़क उनके नाम से नहीं हो सकी। सिर्फ महुवल-महाल गांव स्थित जीन बाबा के पास से शहीद हरे कृष्ण राम के घर तक ईंटीकरण ही किया गया़ गांव में बिजली, स्वास्थ्य केन्द्र खोलने व समाधि स्थल पर प्रतिमा लगाने की बात धरी की धरी रह गई। एक-दो वर्ष तक बड़े पदाधिकारियों फूल चढ़ाईं थीं।

रम्भू सिंह की शहादत पर लोगों को था गर्व

शहीद रम्भू सिंह कारगिल युद्ध में 19 साल पहले शहीद हुए थे। इनका जन्म 16 मार्च 1972 को हुआ था। उन्होंने 28 दिसंबर 1990 में देश की सेवा के लिये सेना की नौकरी हासिल की। इनका योगदान जम्मू में हुआ था। 20 जून 1999 में कारगिल युद्ध में पाकिस्तानियों से लड़ाई करते समय शहीद हो गए।

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