पूर्व एडीएम की पेंशन से 5 साल तक 10% कटौती

Supaul News - सुपौल के पूर्व एडीएम शशिभूषण पाठक के विरुद्ध भ्रष्टाचार के एक मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 साल तक पेंशन...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:20 AM IST
Supaul News - 10 deduction for 5 years from former adm pension
सुपौल के पूर्व एडीएम शशिभूषण पाठक के विरुद्ध भ्रष्टाचार के एक मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 साल तक पेंशन राशि के 10 फीसदी कटौती का संकल्प पत्र जारी किया है।

राज्यपाल के आदेश से विभाग के अपर सचिव रामविशुन राय द्वारा यह संकल्प पत्र जारी किया गया है। जिसमें निगरानी के छापेमारी के दौरान जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में एक लिपिक के अलमीरा से नगदी बरामद होने के बाद तत्कालीन एडीएम द्वारा उसे बचाने का उल्लेख है। जारी पत्र में बताया गया है कि कोसी प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा 23 अप्रैल 2014 को एडीएम श्री पाठक के विरुद्ध आरोप पत्र व साक्ष्य उपलब्ध कराया गया था। इसमें निगरानी के छापे के दौरान बड़ी राशि के साथ पकड़े गए दो आरोपी को एडीएम द्वारा आरोप मुक्त करने का प्रयास किया गया।

5 जून 2014 को प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा श्री पाठक से स्पष्टीकरण पूछा गया। लेकिन आरोप पत्र के साथ सभी साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद उनके द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। लिहाजा विभाग द्वारा 1 सितंबर 2014 को एडीएम के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही आरंभ हुई। 30 नवंबर 2014 को एडीएम सेवानिवृत्त हो गए। वहीं 1 दिसंबर 2014 से विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43बी के तहत संपरिवर्तित कर दिया गया। 6 दिसंबर 2017 को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव सह जांच आयुक्त द्वारा एडीएम के विरुद्ध आरोपों को अप्रमाणित बताया गया। 7 जून 1018 को विभागीय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जांच रिपोर्ट से असहमति व्यक्त की गई।

अनुशासनिक प्राधिकार ने इन बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट से जताई असहमति : निगरानी दल की छापेमारी में नाजिर प्रभाकर लाल दास व आशु लिपिक चंद्रहास वर्मा के अलमीरा से नगद राशि की बरामदगी हुई थी। जांच के क्रम में नाजिर श्री दास ने बताया कि उनके सरकारी अलमीरा से प्राप्त राशि पुत्री की शादी के लिए रखी थी, जो उन्होंने अपने संबंधियों से मदद स्वरूप लिया था। उन्होंने राशि काे चंदा बताया। लेकिन जांच पदाधिकारी ने संबंधित लोगों से इसकी पुष्टि नहीं की। आशु लिपिक श्री पाठक द्वारा अपने बचाव में लिखित बयान 6 अगस्त 2018 को समर्पित किया गया। जिस पर प्राधिकार ने असहमति जताई।

समाहरणालय, सुपौल

लोक सेवा आयोग से मांगी गई थी सहमति

जारी संकल्प पत्र में बताया गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 दिसंबर 18 को विभागीय दंड प्रस्ताव बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति के लिए भेजा गया था। 9 मई 2019 को आयोग ने इस पर अपनी सहमति दी। जिसके बाद सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन एडीएम शशिभूषण पाठक के विरुद्ध बिहार पेंशन नियमावली के प्रावधानों के तहत पेंशन राशि से 10 फीसदी राशि की कटौती पांच वर्षों तक करने का संकल्प पत्र जारी किया गया है। गौरतलब है कि 28 जनवरी 2006 को सुपौल के जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में निगरानी का छापा पड़ा था।

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