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12 साल बाद डगमारा बहूद्देशीय पनबिजली परियोजना का रास्ता साफ, 11.68 करोड़ से नए डीपीआर को मंजूरी

2 वर्ष पहले
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सुपौल के निर्मली अनुमंडल अंतर्गत डगमारा में पूर्व प्रस्तावित परियोजना स्थल जहां हाइड्रल प्रोजेक्ट का होना था निर्माण।

नए सिरे से डीपीआर बनाने के प्रस्ताव को मिला अप्रूवल

डगमारा हाईड्रोइलेक्टिक पावर प्लांट के नए सिरे से प्रस्ताव को कल ही कैबिनेट ने पास कर दिया है। अब परियोजना के डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अभी फिलहाल परियोजना के निर्माण पर आने वाली लागत के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डीपीआर तैयार होने के बाद ही लागत के बारे में बताया जा सकता है। अभी डीपीआर बनाने के प्रस्ताव को अप्रुवल मिला है। सर्वेश्वर कटियार, चीफ इंजीनियर, बिहार स्टेट हाईड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरशन

केन्द्रीय जल संसाधन विभाग की एजेंसी वैपकास बनाएगा डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट

इस परियोजना से क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से भी राहत मिलेगी। कोसी में हनुमाननगर बराज निर्माण के बाद वर्ष 1965 में केन्द्रीय जल आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष कंवरसेन ने डगमारा में दूसरे बराज की जरूरत बताया था। ताकि कोसी के कटाव को निचले स्तर पर भी कंट्रोल किया जा सके। 1971 में बिहार जल संसाधन विभाग द्वारा गठित तकनीकी समिति ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी और बराज के कारण बने ऊंचे जलस्तर में जल विद्युत परियोजनाओं की संभावनाओं को इसके साथ जोड़ा था। वर्ष 2007 में परियोजना निर्माण में एशियन डेवलपमेंट बैंक ने रुचि दिखाई। इसके बाद डगमारा परियोजना के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का कार्य केन्द्रीय जल संसाधन विभाग की एजेंसी वैपकास को दिया गया।

तब केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने नहीं दी थी सहमति

इसके बाद वैपकास द्वारा बनाए गए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन को 2010 में केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण में अनुमति के लिए जमा किया गया था। प्रतिवेदन के जांच के दौरान प्रस्तावित परियोजना से नेपाल के बड़े भू-भाग डूब होने के कारण केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने परियोजना पर अपनी सहमति नहीं दी थी। साथ ही केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, केन्द्रीय जल आयोग भारत सरकार द्वारा परियोजना को और निचले स्तर में ले जाने का सुझाव दिया गया था। इसको लेकर डगमारा परियोजना को और नीचे लाकर वर्तमान बराज से करीब 31 किमी की दूरी पर निर्माण का प्रस्ताव दिया गया था। इस संबंध में परियोजना के विस्तृत प्रतिवेदन दिसंबर 2011 में केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण को सौंपा गया था। इस पर केन्द्रीय जल संसाधन विभाग एवं केन्द्रीय जल आयोग की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। परियोजना की स्वीकृति के संबंध में 25 अप्रैल 2012 को केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण में परियोजना की तकनीकी स्वीकृति के लिए अंतर मंत्रालयी समिति में विस्तृत चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई के लिए सहमति बनी थी।

जल संसाधन व केंद्रीय जल आयोग की सैद्धांतिक सहमति भी मिली

बहुप्रतीक्षित डगमारा पनबिजली परियोजना वर्षों से विभागीय औपचारिकताओं में फंसी थी। पहले डगमारा परियोजना को कोसी बराज से 31 किमी की दूरी पर बनाने का प्रस्ताव था। परियोजना का डिटेल रिपोर्ट दिसंबर 2011 में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को सौंपा गया था। इस पर केन्द्रीय जल संसाधन विभाग और केन्द्रीय जल आयोग की सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है। कई बार विवादों में उलझे इस परियोजना का सर्वेक्षण भी पूरा किया जा चुका था।

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