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बढ़े तापमान से हवा के कम दबाव के कारण बूंदाबांदी, आंधी-बारिश व ओलावृष्टि का अलर्ट
जिले में शुक्रवार को सुबह से सूरज के दर्शन नहीं हुए। आसमान में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलती रही। इसके बाद दोपहर में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। इन सब कारणों से तापमान में गिरावट देखी गई। इधर, तीन दिनो तक आंधी व बारिश के जारी अलर्ट से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। किसानों को बाली लग चुकी गेहूं को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। किसानों को आंधी एवं बारिश से गेहूं, सरसों, मक्का के फसल खराब होने का भय सताने लगा है। दूसरी आेर मौसम में तेजी से होने वाले बदलाव से जिले के अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसके साथ ही शादी का सीजन होने से आमलाेगों भी परेशान दिखाई दे रहे हैं। इस बीच शुक्रवार को जिले के अधिकतम तापमान में 02 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में गुरुवार को अधिकतम तापमान 31.6 एवं न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। जबकि शुक्रवार को अधिकतम 29 एवं न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस रहा।
पश्चिमी विक्षोभ ने किया सपोर्ट
कृषि विश्वविद्यालय सबौर के सहरसा अंतर्गत अगवानपुर स्थित अनुसंधान केन्द्र के कनीय कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. देवन कुमार चौधरी ने कहा कि वातावरण में मौजूद अधिक नमी व अचानक बढ़े तापमान से लोकल लेवल पर बने हवा के कम दबाव वाले क्षेत्र को पश्चिमी विक्षोभ का कुछ हद सपोर्ट मिल गया है। इससे हल्की बारिश होगी।
बारिश, वज्रपात, ओलावृष्टि के आसार
मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को जिले में आंधी के साथ तेज बारिश, वज्रपात एवं ओलावृष्टि होने की संभावना है। जिले में 03 एमएम एवं रविवार को 01 एमएम वर्षापात की संभावना है। शनिवार को अधिकतम 28 एवं न्यूनतम 18, रविवार को अधिकतम 28 एवं न्यूनतम 16, सोमवार को अधिकतम 29 एवं न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस रहने के आसार हैं।
किसानों को वैज्ञानिक की सलाह
इस बाबत कृषि विश्वविद्यालय सबौर के सहरसा अंतर्गत अगवानपुर स्थित अनुसंधान केन्द्र के कृषि मौसम वैज्ञानिक अशोक पंडित ने कहा कि वर्तमान मौसम में रस्ट की बीमारी के खिलाफ गेहूं के फसल की लगातार निगरानी करने की सलाह दी जाती है। अगर ब्लैक, भूरा, पीला रस्ट के लक्षण गेहूं के पौधे में दिखाई देते हैं तो डाइथेन एम 45 नामक दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ मिला कर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। गरमा मूंग व उड़द की बुआई के लिए खेत तैयार करें एवं जिनका खेत तैयार है, वे अभी की बारिश का लाभ लेते हुए बुआई कर सकते हैं। बुआई से पूर्व बीजों का राईजोबियम कल्चर से उपचार करना चाहिए। बैगन की फसल में शूट एवं फ्रूट बोरर की नियंत्रण के लिए 01 एमएल स्पिनोशेड 48 ईसी नामक दवा 04 लीटर पानी में घोल कर फसल पर छिड़काव करें। गर्भवती जानवरों में प्यूपरल बुखार से बचाने के लिए 50 से 60 ग्राम खनिज मिश्रण हर दिन खिलाना चाहिए।
आंधी और बारिश के अलर्ट से किसानों के माथे पर दिख रही चिंता की लकीरें मौसम में बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीजों की बढ़ी संख्या
सुपौल में दाेपहर में हल्की बारिश के बीच गुजरते लोग।