एमडीएम का आधे से अधिक स्कूलों में नहीं हो रहा संचालन
जिले के लगभग 12 सौ स्कूलों में शिक्षकों की हड़ताल के कारण एमडीएम का संचालन नहीं हो पा रहा है। पिछले 17 फरवरी से शिक्षक हड़ताल पर हैं और अधिकांश प्रारंभिक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई ठप है। स्कूल के गेट में ताले रहने से बच्चे भी स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि कई स्कूलों में नियमित शिक्षक एमडीएम बनवा रहे हैं पर बच्चों की अनुपस्थिति कम रहने से सभी बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शहर में भी कई स्कूलों में ताले लटके हुए हैं। शिक्षक नहीं आ रहे हैं। एमडीएम भी नहीं बन पा रहा है। लिहाजा बच्चों की हकमारी हो रही है।
गरीब बच्चों को हो रही परेशानी
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले खासकर गरीब तबके के बच्चों को हर रोज पढ़ाई के साथ दोपहर का भोजन आसानी से उपलब्ध हो जा रहा था। जिससे उनकी पढ़ाई के साथ ही भोजन की भी जरूरत पूरी हो रही थी। जिले के 1700 स्कूलों में चार लाख से अधिक बच्चे नामांकित हैं। इनमें 40 से 50 फीसदी बच्चों की उपस्थिति हर रोज स्कूलों में होती है। एमडीएम के संचालन से बच्चे स्कूलों की ओर आकर्षित हुए हैं। इससे स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ी है। इसके बावजूद शिक्षकों की हड़ताल का खमियाजा नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। लिहाजा उन्हें स्कूल का भोजन नसीब नहीं हो पा रहा है।
विभाग भी नहीं दे रहा ध्यान
जिन स्कूलों में एमडीएम का संचालन नहीं हो पा रहा है। वैसे स्कूलों में इसकी वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। विभागीय आंकड़ों में अधिकांश स्कूलों में एमडीएम का संचालन होने की बात कही जा रही है। जबकि जमीनी हकीकत इससे उलट है। बच्चों को कब से एमडीएम नियमित रूप से मिल पाएगा कहना मुश्किल है। इधर, विभागीय अधिकारी का कहना है कि इस संबंध में संबंधित बीआरपी से रिपोर्ट मांगी गई है।