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चिकेन की तरह मटन के दामों नहीं आई गिरावट, देशी मछलियां उपलब्ध नहीं

एक वर्ष पहले
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कोरोना वायरस के संभावित खतरा को देखते हुए लोग मीट-चिकेन और बाहरी मछली खाना छोड़ दिए हैं। लोग खासकर देशी मछली खोज रहे हैं। देशी मछली की बिक्री बढ़ने के कारण बाजार में देशी मछली नहीं मिल रहा है। 300 से 700 रुपए किलो देशी मछली मिल रहे हैं। यही कारण है कि जिले में नॉनवेज की मांग घट गई है। पिछले चार-पांच दिनों में चिकने और बाहरी मछलियों के दामों में काफी गिरावट आई है। होली में जहां चिकेन 120 रुपए किलो तक बिका, वहीं बाहरी मछली भी दो सौ रुपए किलो बिक रहा था। रेस्टोरेंट और होटलों में भी नॉनवेज खाने वालों की संख्या कम हो गई है। अभी खड़ा चिकेन 40 से 50 रुपए और बाहरी मछली 70 रुपए किलो बिक रहा है। हालांकि मटन के दामों गिरावट नहीं आई है। अभी भी मीट 400 से 600 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

80 से 100 किलो मीट बेचते थे, अब 20 किलो की होर ही बिक्री : मीट, चिकेन और बाहरी मछली व्यवसायी का कहना है कि जब से राज्य में कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया गया है तब से मीट, चिकेन और बाहरी मछली की बिक्री घट गई है। मटन व्यवसायी ने बताया कि हर दिन 80 से 100 किलो मीट बेचते थे, लेकिन चार-पांच दिन से 15 से 20 किलो मीट की ही बिक्री हो रही है। कोरोना वायरस के संभावित खतरा का असर सबसे ज्यादा चिकेन और बाहरी मछली पर पड़ा है। मीट खरीदने के लिए कुछ-कुछ ग्राहक आते भी हैं लेकिन चिकेन और बाहरी मछली के लिए इक्का-दुक्का ग्राहक ही आते हैं।

बाहरी मछली खाने में कोरोना के खतरे का डर

शनिवार को मछली खरीदने आए सुरेश कुमार ने बताया कि देसी मछली खरीदने के लिए आए थे। शहर के सभी चौक-चौराहे पर मछली खोज किए। लेकिन किसी के पास देसी मछली उपलब्ध नहीं था। सभी के पास बाहरी मछली है। बाहरी मछली खाने में कोरोना वायरस के खतरे का डर लग रहा है। वहीं राजकिशोर कुमार ने बताया कि देशी मछली बाजार में उपलब्ध नहीं है। चिकेन और मीट नहीं खरीदेंगे। चिकेन और मीट बनाने से पहले बकरा या मुर्गा का स्वास्थ जांच नहीं की जाती है। ऐसे में मीट खाना ठीक नहीं है।
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