प्रधान सचिव ने लगाई थी रोक, डीपीओ की सहमति से आदेश की हुई अवहेलना

Supaul News - शिक्षकों के प्रतिनियोजन से जुड़े एक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। सदर बीईओ द्वारा डीईओ को सौंपे गए...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:20 AM IST
Supaul News - principal secretary imposed stay deferred due to the consent of dpo
शिक्षकों के प्रतिनियोजन से जुड़े एक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। सदर बीईओ द्वारा डीईओ को सौंपे गए प्रतिनियोजित शिक्षकों की सूची में स्पष्ट तौर पर सामने आया है कि प्रधान सचिव के आदेश को ताक पर रख कर स्थानीय अधिकारियों ने मनमर्जी से कई शिक्षकों को प्रतिनियोजित कर दिया। दरअसल विभागीय प्रधान सचिव ने 22 सितंबर 2016 को ही शिक्षकों के सभी प्रकार के प्रतिनियोजन पर स्पष्ट तौर रोक लगा दिया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि विभागीय स्वीकृति के बिना स्थानीय अधिकारी शिक्षकों का प्रतिनियोजन नहीं करेंगे और ऐसा करने पर संबंधित अधिकारियों के निजी वेतन से संबंधित शिक्षकों को प्रतिनियोजन अवधि का वेतन भुगतान होगा। लेकिन 3 जून को सदर बीईओ नरेंद्र झा ने डीईओ के 15 और 29 मई को जारी पत्र के आलोक में प्रतिनियोजित 33 शिक्षकों की सूची सौंपी है। खास बात यह है कि प्रतिनियोजित अधिकांश शिक्षकों की टिप्पणी में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि प्रतिनियोजन तत्कालीन प्रारंभिक एवं सर्वशिक्षा डीपीओ की मौखिक सहमति से किया गया। बीईओ के इस सरकारी पत्र से ही डीपीओ के काले कारनामे सामने आ गए हैं। प्रतिनियोजित शिक्षकों की सूची इस बात को भी दर्शा रही है कि शिक्षकों को उनके मनमाफिक जगह तैनात किया गया। जिससे यह भी साफ है कि अवैध उगाही के बिना प्रतिनियोजन का यह खेल नहीं हुआ है। लेकिन इस पत्र ने बीईओ को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्योंकि बड़ा सवाल यह है कि अाखिर किन परिस्थितियों में बीईओ ने प्रधान सचिव के लिखित आदेश को नजर अंदाज कर डीपीओ के मौखिक सहमति को तरजीह दी?

दो बार आदेश, बीईओ नहीं सुन रहे डीईओ की बात : शिक्षक प्रतिनियोजन का मामला सामने आने के बाद डीईओ अजय कुमार सिंह ने बीते माह गंभीरता दिखाई। पहले 15 मई और फिर 29 मई को दो अलग-अलग आदेश जारी किए गए। पहले आदेश में 3 दिनों के अंदर सभी बीईओ को शिक्षकों का प्रतिनियोजन समाप्त करने तथा प्रधान सचिव के आदेश के बाद से तब तक प्रतिनियोजित सभी शिक्षकों की सूची मांगी गई। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि सूची के साथ प्रतिनियोजन अवधि और प्रस्वीकृति देने वाले अधिकारी का नाम का उल्लेख होगा। 29 मई को एक बार फिर सभी बीईओ को रिपोर्ट समर्पित करने को कहा गया। जाहिर है, रिपोर्ट सामने आएगी तो बीईओ का गड़बड़झाला भी सामने आ जाएगा।

रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई


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