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पांच साल में भी नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त नहीं हुई तैयार, अब होगी आर-पार की लड़ाई : डाॅ. अरुण

Supaul News - सरकार नियोजित शिक्षकों की लंबित मांगों के प्रति उदासीन है। नियोजन के पांच साल बाद भी जहां नियोजित शिक्षकों की...

Jan 16, 2020, 09:35 AM IST
Supaul News - service condition of employed teachers is not ready even in five years now there will be a fight across dr arun
सरकार नियोजित शिक्षकों की लंबित मांगों के प्रति उदासीन है। नियोजन के पांच साल बाद भी जहां नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त तैयार नहीं की गई है वहीं लगातार आंदोलन के बाद भी सरकार समान काम के लिए सामान वेतन नहीं देना चाहती है। सरकार का यह रवैया उच्च तथा उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए घातक है। अगर समय रहते सरकार इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं करती है तो इसका खामियाजा राज्य सरकार को भुगतना पड़ेगा।

अपनी मांगों के लिए अब शिक्षक आर-पार की लड़ाई का शंखनाद करेंगे जिससे बिहार का शैक्षणिक ढांचा चरमरा जाएगा। उक्त बातें बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय संयुक्त सचिव सह बीएनमंडल विवि के सीनेट सदस्य डॉ. अरुण कुमार ने बुधवार को जिला मुख्यालय के गोशाला परिसर स्थित संघ भवन में जिला स्तरीय कन्वेंशन में मौजूद जिले के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह हैरत की बात है कि देश की आजादी के बाद संविधान निर्माता बाबा भीमराव आंबेडकर ने अकेले 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में भारत का संविधान बना दिए थे किंतु बिहार सरकार के तेज-तर्रार हुक्मरान तथा पदाधिकारी पांच साल गुजर जाने के बाद भी नियोजित शिक्षकों के लिए सेवा शर्त भी तैयार नहीं कर पाएं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब कोई बहाना बनाकर शिक्षकों को बरगलाया नहीं जा सकता है। अब नियोजित शिक्षक किसी तरह के झांसे में आने वाले नहीं हैं। वादों व आश्वासन का दौर खत्म हो चुका है। सरकार को अब हर हाल में फैसला लेना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष कृष्ण कुमार ने कहा कि इस बार समान काम के लिए समान वेतन की लड़ाई अंतिम फैसले पर पहुंच कर ही बंद होगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को शिक्षक के पक्ष के फैसला लेना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में किसी असमंजस में नहीं रहे। राज्य के शिक्षक अब सीधे लड़ाई के मूड में है। उन्होंने कहा कि अब ताे सरकार को समझ आ गया होगा कि नियोजित शिक्षक पूरे काम का आधा मानदेय नहीं लेंगे।

कार्यक्रम
समान काम के लिए समान वेतन की लड़ाई इस बार अंतिम फैसले पर पहुंचकर बंद होगी: कृष्ण कुमार

बुधवार को आयोजित कन्वेंशन में मौजूद शिक्षक।

शिक्षकों को खिलौना समझ रही है सरकार : चंदन

राज्य शैक्षिक परिषद के सदस्य चंदन कुमार ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन मामले में सरकार शिक्षकों को खिलौना समझ रही है। आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार कई वादे करती है और जब आंदोलन समाप्त कर दिया जाता है तो वे अपनी पुरानी हरकतों पर आ जाती है। माने शिक्षक सरकार के लिए खिलौना हो। यही कारण है कि यदि सही समय पर सरकार के सामने हम अपनी बात नहीं रखेंगे। यह हठधर्मी सरकार मानने वाले नहीं है।

शिक्षकों ने हर लड़ाई जीती, यह लड़ाई भी जीतेंगे : अजय कुमार

कन्वेंशन में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रमंडलीय सचिव परमेश्वरी यादव तथा जिला सचिव डॉ. अजय कुमार ने कहा कि सरकार के सामने जब तक शिक्षक एकजुट होकर नहीं लड़ेंगे तब तक सरकार शिक्षकों की मांग को अनसुना करती रहेगी। इस आंदोलन काे अंजाम तक पहुंचाना हमारा मकसद है। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन मामले में सरकार ने शिक्षकों को उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा दिया। उच्चतम न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में ही फैसला दिया है बावजूद इसके सरकार इसे लागू नहीं कर शिक्षकों को तबाह कर रही है।

जिलास्तरीय कन्वेेंशन में मौजूद संघ के अधिकारी।

पुराना है शिक्षकों के आंदोलन का इतिहास : सत्यनारायण चौधरी

मधेपुरा सह सुपौल जिले के पूर्व जिला सचिव सत्यनारायण चौधरी ने कहा कि शिक्षकों के संघर्षों का परिणाम है कि सरकार ने पहली बार 1980 में सेवा शर्त लागू किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के संघर्ष का इतिहास को पलट लीजिए, शिक्षक जब-जब आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है तब-तब सरकार को झुकना पड़ा है। इसलिए अपनी मांगों के लिए सभी शिक्षकों को एकजुट होकर लड़नी होगी। कार्यक्रम को परीक्षा सचिव डॉ. संतोष कुमार, कोषाध्यक्ष रमेश साह, संयुक्त सचिव रमेंद्र कुमार, संतोष सुमन, प्रमंडलीय उपाध्यक्ष प्रभात रंजन, पूर्व प्रधानाध्यापक कपिलदेव यादव, अमरेंद्र यादव, कामेश्वर यादव, विजय राम, प्रदीप पासवान, अनिल कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, हरिश्चंद्र मंडल व डॉ. धनंजय कुमार समेत अन्य शिक्षकांे ने संबोधित किया।

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