पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

जब भी आमना-सामना होता था, सुषमा स्वराज कभी हाल पूछना नहीं भूलती थीं

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बात 2011-12 की है, जब पुनर्वासन को लेकर एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी को आठ दिन के दौरे पर श्रीलंका भेजा गया था। प्रह्लाद जोशी भी कमेटी में शामिल थे। सुषमा स्वराज उस कमेटी की चेयरमैन थीं। उसी कमेटी का सदस्य के होने के नाते उनके साथ दौरे पर जाने का मुझे अवसर मिला था। इसके बाद जब भी सामना होता था तो वह हाल पूछना नहीं भूलती थी। वे कई भाषाओं की जानकार थीं। सुषमा जी उर्दू, पंजाबी, हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा मलयालम की भी जानकार थीं। उनके चेहरे में कभी भी परेशानी के भाव नहीं दिखाई देते थे। पूर्व विदेश मंत्री स्वराज से 2009 में ही सांसद बनने के बाद पहचान हुई थी। वे हर मामले में एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी थीं। इसके बाद उनसे कई बार मिलने का मौका मिला। जब भी मिला, उनका अपनत्व की भावना से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सका। अपने सहयोगी को काफी सपोर्ट करती थीं। वे बुहत ही व्यवहार कुशल एवं गरिमामयी महिला थीं। उनके निधन से देश की राजनीति का एक अनमोल सितारा टूट गया।

(जैसा कि सुपौल संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद सह भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विश्मोहन कुमार ने बताया।)

खबरें और भी हैं...