कद-काठी के कारण शुरू की थी स्पिन गेंदबाजी, अब बन गए हैं रफ्तार की मिसाल

3 वर्ष पहले
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  • एशेज के आखिरी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में छह विकेट लेकर सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज की दौड़ में बने हुए हैं

लाइफ-मैनेजमेंट डेस्क. वेस्टइंडीज के हीरो बन सकते थे, लकिे न उन्होंने चुना इंग्लैंड के लिए सुपरहीरो बनना। आज के समय के सबसे खतरनाक गेदबाजों में गिने जाते हैं- जॉफ्रा आर्चर। वे अपनी तेज रफ्तार बॉलिंग और खतरनाक बाउंसर्स के कारण चर्चा में रहते हैं।

1) बचपन से था क्रिकेट को लेकर जुनून

जॉफ्रा आर्चर का जन्म 1 अप्रैल 1995 को बारबाडोस, ब्रिजटाउन में हुआ था। उनके पिता का नाम फ्रैंक आर्चर है जो कि एक ब्रिटिश निवासी थे। उनकी मां का नाम जॉली है और वे बारबाडोस की हैं। पिता के ब्रिटिश निवासी होने की वजह से ही जॉफ्रा के पास ब्रिटिश नागरिकता भी है। क्योंकि उनका जन्म बारबाडोस में हुआ था इसलिए उनमें क्रिकेट को लेकर जुनून शुरू से ही था। दरअसल यहां के लोग क्रिकेट को खूब पसंद करते हैं। ब्रिजटाउन के ही एक स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने क्रिकेट में भी खूब ध्यान लगाया। वहां पर क्रिकेट खेलते हुए वे स्पिन गेंदबाजी किया करते थे। गेंदबाजी की तरह ही बैटिंग में भी वे काफी अच्छे थे। अपने लाजवाब टैलेंट की वजह से ही वे अपने स्कूल की टीम को कई बार चैंपियनशिप जितवाने में भी मदद कर चुके हैं।  

जॉफ्रा की कद-काठी बाकि बच्चों की तरह नहीं थी, इसीलिए उन्होंने स्पिन गेंदबाजी को अपनाया था। लेकिन 2013 में उन्होंने तेज गेंदबाजी को अपना हथियार बनाया। यहीं से वे निकल पड़े एक नई मंजिल की तरफ। हालांकि इस दौरान वे वेस्टइंडीज की अंडर 19 टीम की तरफ से भी मैच खेल चुके थे, लकिे न एक चोट की वजह से उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इससे वे बेहद निराश हुए और दोगुनी मेहनत के साथ क्रिकेट के मैदान पर फिर से उतरे। 2015 में बारबाडोस में जन्मे इंग्लिश क्रिकेटर क्रिस जॉर्डन ने जॉफ्रा को खेलते हुए देखा। वे उनकी गति और बाउंसर्स को देखकर बहुत प्रभावित हुए। जॉफ्रा से मिलकर उन्होंने इंग्लैंड के क्रिकेट क्लब के लिए उन्हें खेलने का सुझाव दिया। जॉफ्रा भी तरुतं ही तैयार हो गए थे और इस तरह उनके इंग्लैंड सफर की शुरुआत हुई। फर्स्टक्लास डेब्यू के साथ ही जॉफ्रा ने अपनी गेंदबाजी से ऐसी छाप छोड़ी कि सबसे लोकप्रिय टी-20 लीग आईपीएल में भी उन्हें 2018 में खेलने का मौका मिल गया।

राजस्थान रॉयल्स की टीम से खेलते हुए उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी को खूब प्रभावित किया। यही समय था जब सभी को लगने लगा था कि इंग्लैंड की वर्ल्ड कप टीम में भी उन्हें होना चाहिए। जॉफ्रा आर्चर के लिए इंग्लैंड की वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव-सा था। क्योंकि नियमों के मुताबिक उन्हें कम से  कम सात साल तक इंग्लैंड के नागरिक के रूप में देश के अंदर ही रहना पड़ता। नियम के अनुसार तो जॉफ्रा 2022 से पहले इंग्लैंड से नहीं खेल सकते थे, लकिे न इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड ने वर्ल्ड कप से कुछ समय पहले ही अपने नियमों में बदलाव किया और इंग्लैंड में रहने वाले 7 साल के नियम को 3 साल कर दिया। अब जॉफ्रा इंग्लैंड की टीम में खेल सकते थे।

3 मई 2019 को जॉफ्रा ने आयरलैंड के खिलाफ इंग्लैंड की तरफ से अपना अंतरराष्ट्रीय ओडीआई डेब्यू किया। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी उन्हें खेलने का मौका मिला। वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड के पहले स्क्वॉड का जब एलान किया गया तो उसमें जॉफ्रा का नाम नहीं था। इस पर कई बड़े खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई। बाद में इंग्लैंड की फाइनल वर्ल्ड कप टीम में उन्हें चुन लिया गया। अपने परफॉर्मेंस के दम पर उन्होंने दिखा दिया कि वे किसी भी टीम के लिए कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं। वे वर्ल्ड कप में अपनी टीम की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मैच में सुपर ओवर खेलने का मौका भी दिया गया। उन्होंने इंग्लैंड को वर्ल्ड कप जितवाने में अहम भूमिका निभाई और एशेज सीरीज में भी अपनी घातक गेंदबाजी का नजारा पेश किया।

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