वोलीदीमीर जेलेंस्की / टीवी शो में राष्ट्रपति बने और असल जिंदगी में भी बन गए प्रेसिडेंट

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  • जेलेंस्की हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति चुने जाने के कारण चर्चा में हैं

Apr 30, 2019, 06:57 PM IST

बायोग्राफी डेस्क. 'सर्वेंट ऑफ द पीपल' टीवी शो में हिस्ट्री का एक प्रोफेसर वेसिल पेट्रोविच (वोलीदीमीर ज़ेलेंस्की) रातों-रात राष्ट्रपति बन जाता है। दरअसल, चुनावी माहौल में एक दिन क्लास में किसी बात को लेकर साथी प्रोफेसर से वेसिल की बहस हो जाती है। राष्ट्रपति की योग्यताएं और लोगों की उम्मीदों पर दिए वेसिल के भाषण को एक स्टूडेंट चुपके से रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर डाल देता है और यह वीडियो वायरल हो जाता है। स्टूडेंट्स ही वेसिल को चुनाव में खड़ा करते हैं, उसके लिए क्राउड फंडिंग करते हैं और बिना किसी खास मेहनत के एक चमत्कार-सा होता है। हिस्ट्री का एक प्रोफेसर वेसिल यूक्रेन के सर्वोच्च पद पर पहुंच जाता है।
 
टीवी शो की यह स्क्रिप्ट तो इसके डायरेक्टर और प्रोड्यूसर्स ने लिखी थी, लेकिन असल जिंदगी में यह स्क्रिप्ट सच हो जाएगी, शो में राष्ट्रपति का किरदार निभाने वाले वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की ने कभी सोचा नहीं था। वोलोदीमीर के अनुसार रियल लाइफ में भी चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने कोई घोषणापत्र नहीं बनाया, न उनके पास कोई अनुभव था, लेकिन इस टीवी सीरिज़ के कारण लोगों ने उन्हें यूक्रेन के शीर्ष पद तक पहुंचा दिया।

शो के नाम से ही बनाई राजनीतिक पार्टी

मूल रूप से एक्टर और कॉमेडियन वोलीदीमीर ज़ेलेंस्की ने मार्च 2018 में शो के टाइटल 'सर्वेंट ऑफ द पीपल' नाम से ही राजनीतिक पार्टी बनाई थी। इस पार्टी के सारे सदस्य वोलीदीमीर की ही प्रोडक्शन कंपनी क्वार्तल 95 के कर्मचारी थे। नए लोगों को राजनीति में लाने और लोगों की उम्मीदों को पूरा करने का उनका शो में किया वादा असल ज़िंदगी में भी हिट हो गया। 

क्रिवॉय रॉग (यूक्रेनियन एसएसआर) में जन्मे वोलोदीमीर के पिता ओलेक्जेंडर क्रिवी रिह इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स में कम्प्यूटिंग हार्डवेयर के प्रोफेसर थे। मां रिम्मा इंजीनियर थीं। 17 साल की उम्र में वोलोदीमीर ने लोकल कॉमेडियन लोगों का ग्रुप 'केवीएन' जॉइन कर लिया। इसके बाद कई साल तक वोलोदीमीर कॉमेडी शो करते रहे और कई बड़े कार्यक्रम के विजेता चुने गए। 1998 में उन्होंने "क्वार्तल 95" प्रोडक्शन कंपनी बनाई थी। 2008 में उन्होंने लव इन द बिग सिटी नाम से फिल्म की। 

वोलोदीमीर बीच-बीच में राजनीतिक बयानबाजी भी करते रहे हैं। यूक्रेन में रूसी कलाकारों को काम करने से रोकने वाले सरकारी फरमान के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई थी। बाद में यूक्रेन और रूस दोनों देश की सरकारों ने एक-दूसरे देशों में कलाकारों के काम करने पर रोक लगा दी थी। 

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