इंस्पिरेशन / शनाया ट्वेन: बचपन से था गाने का शौक, बड़े होकर बनीं "क्वीन ऑफ कंट्री पॉप"



inspirational life story of Pop Star Shania Twain
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inspirational life story of Pop Star Shania Twain
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Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 01:33 PM IST

एंटरटेनमेंट डेस्क. पॉप स्टार शनाया ट्वेन ऑल टाइम बेस्ट सेलिंग फीमेल आर्टिस्ट्स में से एक हैं। केवल 10 साल की उम्र में ही इन्होंने गाने लिखने शुरू कर दिए थे। 1997 में "कम ऑन ओवर' एल्बम रिलीज हुआ, जिसके 40 मिलियन रिकॉर्ड्स बिके थे। इससे पहले किसी फीमेल आर्टिस्ट ने ऐसी सफलता नहीं देखी थी। शनाया ट्वेन का असली नाम इलीन रेजीना एडवर्ड्स था। उनका जन्म 28 अगस्त 1965 को विंडसर, ओंटेरियो, कनाडा में हुआ। जब वे बहुत छोटी थीं तभी माता-पिता का तलाक हो गया था। लेकिन मां शेरॉन ने जेरी ट्वेन के साथ जल्द ही दूसरी शादी कर ली। जेरी ने शेरॉन की तीनों बेटियों को एडॉप्ट कर लिया था। 

 

3 साल की उम्र में शुरू किया था गाना

 

शनाया का पालन-पोषण एक छोटे-से शहर टिमिन्स में हुआ, जो ओंटेरियो में था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। शनाया को स्कूल टिफिन में ब्रेड और मस्टर्ड सॉस मिलती थी, जिसे गरीबों का नाश्ता कहा जाता था। उन्हें बचपन में केवल एक ही चीज से खुशी मिलती थी, वो था संगीत। वे 3 साल की उम्र से ही गाने गाया करती थीं। 8 साल की थीं जब गिटार बजाना शुरू कर दिया था और 10 साल की उम्र में गाने लिख भी लेती थीं। मां शेरॉन भी बेटी के शौक को प्रोत्साहित करती थीं। मां के प्रोत्साहन की वजह से ही शनाया ने क्लब्स और छोटे इवेंट्स में गाना शुरू कर दिया था। कई बार उन्हें टीवी और रेडियो पर गाने का मौका भी मिलता था। जब 18 की हुईं तो उन्होंने तय किया कि टोरंटो जाकर संगीत में ही करियर बनाएंगी। उन्हें काम भी मिला, लेकिन उससे कमाई इतनी नहीं हो पाती थी कि वे अपने खर्चे उठा सकें। 

 

इलीन ट्वेन से शनाया ट्वेन बनने तक का सफर 

 

1987 में एक कार दुर्घटना में उनके माता-पिता का निधन हो गया। शनाया को तब गहरा सदमा लगा। अपने तीन छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी अब पूरी तरह उन्हीं पर थी। हताश शनाया अपने शहर टिमिन्स वापस लौट गईं और वहीं एक रिजॉर्ट में गाना गाकर पैसे कमाने लगीं। लेकिन उनके मन में तो अपना संगीत बनाने की इच्छा बसी हुई थी। वे अपने खाली समय में गाने लिखा करती थीं। एक दिन उनका डेमो देखकर पॉलीग्राम ने उन्हें साइन कर लिया। उन्हें शनाया का काम तो पसंद आया लेकिन उनका नाम "इलीन ट्वेन' पसंद नही आया। आखिर उनका नाम शनाया ट्वेन रखा गया। 1993 में पहला एल्बम "शनाया ट्वेन' के नाम से ही रिलीज हुआ। यह कुछ खास नहीं चला। 1995 में आया "वुमन इन मी' जो बेहद सफल रहा और 1997 में "कम ऑन ओवर' ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। 1999 में उनके एल्बम "यू आर स्टिल द वन' को 2 ग्रैमी अवॉर्ड्स मिले। बिलबोर्ड्स कंट्री चार्ट पर भी ये टॉप पर था। अगले ही साल उन्हें "कम ऑन ओवर' के लिए भी 2 ग्रैमी मिले। कम ऑन ओवर लगातार 50 हफ्तों तक राज करता रहा। इसे आज भी ऑलटाइम बेस्ट-सेलिंग कंट्री एल्बम माना जाता है। 

 

50वीं सालगिरह पर करेंगी एलबम रिलीज

 

कम ऑन ओवर की रिकॉर्ड तोड़ सफलता के बाद शनाया ने वर्ल्ड टूअर किया और अंतरराष्ट्रीय सितारा बन गईं। 2002 में "अप' रिलीज हुआ। ये उनके पहले के एल्बम्स के मुकाबले कम चला। इस दौरान उनकी शादी भी हुई। 2008 में तलाक हो गया और उनके वोकल मसल्स में खराबी आने लगी। उन्हें गाने में तकलीफ होती थी। इलाज के बाद 2012 में वे पूरी तरह ठीक हो गईं। 2015 में उन्होंने अपने एक शो का लाइव एल्बम रिलीज किया। साथ ही यह घोषणा भी की कि जिस दिन वे 50 साल की होंगी उस दिन भी एक नया एल्बम रिलीज करेंगी। 

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