मूवी रिव्यू / हंसाते-हंसाते बेरोजगार और अकेलेपन के शिकार लोगों की दुर्दशा बयां करती है 'ड्रीम गर्ल'



Dream Girl Movie Review
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Dream Girl Movie Review

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 09:11 AM IST
रेटिंग 4/5
स्टारकास्ट आयुष्मान खुराना, नुसरत भरुचा, अन्नू कपूर
निर्देशक राज शांडिल्य
निर्माता

एकता कपूर

म्यूजिक डायरेक्टर मीत ब्रदर्स
जॉनर  कॉमेडी ड्रामा
अवधि 132 मिनट

 

 

बॉलीवुड डेस्क.  कपिल शर्मा के कॉमेडी शोज की रीढ़ रहे राज शांडिल्य की यह पहली डायरेक्टोरियल पेशकश है। यहां भी वे अपनी राइटिंग से गहरा असर छोड़ गए हैं। मथुरा में बृज की जमीन पर उन्होंने कॉमेडी के पंच और क्रिएशन से हंसी की बेहतरीन रासलीला रचाई है। फिल्म वैसे पूरी तरह आयुष्मान के किरदार करम को समर्पित है। इसकी थीम छोटे शहरों में पढ़े-लिखे बेरोजगार युवकों की हालत के जिम्मेदार सिस्टम पर एक तंज है।

जानते हैं कैसी है 'ड्रीम गर्ल'

  1. करम के पिता जगजीत (अन्नू कपूर) की मथुरा में छोटी सी दुकान है। बेरोजगार करम की अनूठी खूबी लड़की की आवाज में बातें करना है। इसके दम पर उसे कॉलसेंटर में जॉब मिल जाती है। वहां वह पूजा नाम की लड़की की आवाजें निकालकर अपनी मीठी बातों से लोगों की तन्हाई दूर करता है। आलम यह होता है कि टोटो, महावीर, हवलदार, लेडी पत्रकार यहां तक कि खुद उसका बाप भी पूजा के प्यार में पड़ जाता है और शादी को तैयार हो जाता है। करम की जिंदगी में भी माही के प्यार की दस्तक होती है। इस बीच पूजा के चाहने वाले करम की जिंदगी में महाभारत खड़ी करते हैं और वह इस चक्रव्यूह से खुद को कैसे बचाता है, फिल्म इसी को लेकर है।

  2. फिल्म की राइटिंग स्मार्ट है। करम के रोल में आयुष्मान खुराना ने 'अंधाधुन' और 'बधाई हो' के बाद एक और यादगार परफॉरमेंस दी है। आवाज और बॉडी लैंग्वेज के जरिए उन्होंने लोगों को भरपूर हंसाया है। माही और स्माइली बने नुसरत भरुचा व मनजोत सिंह ने अपने किरदारों को डिसिप्लीन में रखा है। डायरेक्टर राज शांडिल्य ने छोटे शहरों के लोगों के भाव, ड्रेसिंग सेंस का इस्तेमाल कॉमेडी गढ़ने में किया है। डायलॉग व एडिटिंग सधे हुए हैं। मीत ब्रदर्स के संगीत ने समां बांधा है। फिल्म कहीं भी निराश करती नजर नहीं आती।

  3. देखें या नहीं... हंसी से खुशी मिलती है तो जरूर देखें।

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