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लव सोनिया / देह व्यापार के दलदल में फंसी युवती के दर्द को दिखाती है फिल्म, मृणाल की एक्टिंग बढ़िया



Danik Bhaskar | Sep 14, 2018, 02:27 PM IST
क्रिटिक रेटिंग 3.5/5
स्टार कास्ट विक्की कौशल, तापसी पन्नू, अभिषेक बच्चन
डायरेक्टर तबरेज नूरानी
प्रोड्यूसर डेविड वूमार्क, तबरेज नूरानी
जोनर थ्रिलर ड्रामा
ड्यूरेशन 120 मिनट

 

 

कहानी: तबरेज नूरानी की फिल्म लव सोनिया देश में होने वाले देह व्यापार की असली छवि प्रस्तुत करती है। नूरानी हमें ऐसी दुनिया में ले जाते हैं जहां पर मां-बाप अत्यधिक गरीब होने पर लड़की को बेचना ठीक समझते हैं। पिता (आदिल हुसैन ) निराशा के कगार पर है और आत्महत्या का विचार कर रहा है क्योंकि उसकी जमीन बंजर हो चुकी है और कर्ज बढ़ता जा रहा है।

 

उसकी दो बेटियां हैं सोनिया (मृणाल ठाकुर) और प्रीति (रिया सिसौदिया) जिनके साथ उसका प्यार और नफरत का रिश्ता है। वह उन्हें इसलिए पसंद नहीं करता क्योंकि वह बेटा चाहता था। जब पिता प्रीति का सौदा कर देता है तो सोनिया इसका विरोध करती है और अपनी बहन को वापस लाने के लिए घर से भाग जाती है। सोनिया भी मुंबई की वेश्यावृति की अंधेरी दुनिया में फंस जाती है। वेश्यालय का मालिक फैजल (मनोज वाजपेयी) चालक और षडयंत्रकारी है। वेश्यालय में दो महिलाएं और हैं माधुरी (ऋचा चड्ढा) और रश्मि (फ्रीडा पिंटो) जो सोनिया की जर्नी को कठिन बनाती हैं। सोनिया की यात्रा और भी अपमानजनक होती जाती है लेकिन, वह हार मानने से इंकार कर देती है। निराशाजनक परिस्थतियों में भी वो लड़ना जारी रखती है।

 

 

डायरेक्शन: नूरानी ने निराश करने वाली परिस्थितियों को दिखाया है लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने अपनी नायिकाओं को उम्मीद छोड़ने या हार मान लेने की इजाजत नहीं दी। नूरानी की 'सोनिया' असली नायिका है जो कि परिस्थतियों में फंसती नहीं और अपने लिए बुने गए जाल से बच निकलती है। हमने यौन उत्पीड़न पर कई फिल्में देखी हैं लेकिन, यह फिल्म सीधे प्रहार करती है क्योंकि नूरानी ने इसमें विश्वसनीय दुनिया को चित्रित किया है, जिसमें तथ्यों का सहारा लिया गया है। कभी-कभी मेलोड्रामा जोन में जाती हुई लगती है। 

 

एक्टिंग: मृणाल ठाकुर का काम असाधारण है। उन्होंने टाइटल रोल बहुत संवेदनशीलता और सूक्ष्मता से किया है। फिल्म में कहीं- कहीं परिस्थितयों की अतिश्योक्ति दिखाई है लेकिन, वे अपने किरदार से जुड़ी रहती हैं और दमदार अभिनय करती हैं। रिया सिसौदिया, जिन्होंने सोनिया की बहन का रोल किया है उनका भी काम अच्छा है।

 

मनोज बाजपेयी ने निर्दयी, और वेश्यालय के मालिक की भूमिका में शानदार अभिनय किया है। ऋचा चड्ढा सेक्स वर्कर बनी हैं। उन्होंने ने भी अच्छा अभिनय किया है लेकिन, कभी-कभी रोल से भटक जाती हैं। फ्रीडा पिंटो ने अतीत में उलझी दुखी महिला का किरदार निभाया है। उनका रोल छोटा लेकिन महत्वपूर्ण है। राजकुमार राव की भूमिका आश्चर्यजनक रूप से छोटी है। उनके जैसा अभिनेता इससे बेहतर डिजर्व करता है। 

 

देखें या नहीं? इस मूवी को एक बार जरूर देखा जाना चाहिए। नूरानी ने इस सब्जेक्ट को चुनकर इस फिल्म में ऐसी दुनिया को दिखाने की हिम्मत की है जो हमारी दुनिया से बहुत अलग है।  

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