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अमिताभ ने बताया- 'बालासाहब की वजह से बची थी कभी उनकी जान'

हाल ही में दिवंगत बाला साहेब ठाकरे की बायोपिक 'ठाकरे' का लॉचिंग इवेंट आर्गनाइज किया गया था।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 06:56 PM IST

मुंबई। हाल ही में दिवंगत बाला साहेब ठाकरे की बायोपिक 'ठाकरे' का लॉन्चिंग इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था। इस इवेंट में अमिताभ बच्चन को आमंत्रित किया गया था। उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने भी अमिताभ के साथ स्टेज शेयर किया। इस खास मौके पर अमिताभ ने बाला साहेब के साथ अपनी रिश्ते को लेकर बातचीत की। इसके अलावा कई ऐसे किस्से भी शेयर किए जिससे उनकी घनिष्ठता का पता चलता है। पेश है बातचीत के कुछ अंश...

बेहद खास रिश्ता रहा है बाला साहब के साथ

अमिताभ कहते हैं, "मेरे लिए यह मौका बहुत खास है, बाला साहब ठाकरे जी के साथ मेरा बेहद निजी और पारिवारिक संबध रहा है। उनका कोई भी कार्यक्रम होता था तो वह मुझे बुलाते थे और मैं जाता था। आज तो मुझे यहां आना ही था, क्योंकि यह कार्यक्रम बाला साहब जी का है। संजय राउत की कलम तलवार की तरह चलती है, इसलिए मुझे उनसे डर लगता है। संजय जी से मेरा अनुरोध है कि इस फिल्म को सिर्फ तीन घंटे की न बनाएं, बालासाहब के पूरे व्यक्तित्व को मात्र तीन घंटे में नहीं दिखाया जा सकता है। इसलिए आपसे मेरी प्रार्थना है कि इस फिल्म को और समय दें। बाला साहब के साथ मेरा पारिवारिक संबंध रहा। जिस दिन से मैं उनसे मिला, न जाने क्यों उनको लगा कि मैं उनके परिवार का एक सदस्य हूं। यह प्यार उनकी उदारता और बड़प्पन था।"

शादी के बाद बुलाया था घर

अमिताभ बताते हैं, "लगभग चालीस साल पहले जब मैं उनसे पहली बार मिला तो उन्हीं दिनों मेरा विवाह हुआ था। उन्होंने मुझे फोन करके कहा- तुम्हारा विवाह हो गया है। मैं तुम्हारी पत्नी से मिलना चाहता हूं, तुम घर आओ। मैं उनके घर मातोश्री गया। घर में आई ने जिस तरह जया का स्वागत किया, वह ऐसा था जैसे वह अपनी बहू का सम्मान कर रही हों। उसी दिन मैंने तय कर लिया कि बाला साहब मेरे लिए पिता समान हैं और मेरा संबंध इनके साथ हमेशा रहेगा।"


जब बाला साहेब ने पहुंचाया था हॉस्पिटल

अमिताभ कहते हैं, "बातें तो बहुत सी हैं, लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो शायद किसी को पता भी न हों। 1982 में जब मैं फिल्म 'कुली' की शूटिंग के दौरान घायल हुआ था तो कुछ दिन तो मैं बेंगलुरु में बेहोश रहा। लेकिन जब यह तय हुआ कि अब मुझे बेहोशी की ही हालत में मुंबई शिफ्ट किया जाएगा तो हवाई जहाज से मुझे मुंबई भेजा गया। उस दिन बहुत बारिश भी हो रही थी। मुझे हवाई अड्डे से सीधा ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाना था, लेकिन उस समय भारी बारिश की वजह से कोई भी एम्बुलेंस नहीं आ रही थी। उस वक्त मुझे बाला साहब की शिवसेना की एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया था। अगर उस दिन सही समय पर एम्बुलेंस नहीं आती तो मेरी हालत और ज्यादा खराब हो जाती।

अगली स्लाइड्स में पढ़ें अमिताभ के शेयर किए कुछ और किस्से...

हर मुश्किल में दिया था साथ

 

अमिताभ ने बताया, "ऐसी ही और भी घटनाएं हैं। जब मेरे ऊपर कई बार कोई आरोप लगाया जाता, तब बाला साहब मुझे फोन करते और पूछते यह सब क्या सुन रहा हूं, क्या यह सच है? घर आओ, मैं बात करना चाहता हूं तुमसे। ऐसा ही एक आरोप जब लगा तो उन्होंने मुझे पूरे परिवार के साथ अपने घर बुलाकर मुझसे पूछा- अब बताओ क्या यह सच है?मैंने कहा- इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं। तब बाला साहब ने मुझे कहा अब बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। अभी बाहर बहुत तूफान चल रहा है। जब यह तूफान रुक जाएगा, तब अपनी बात कहना। मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा। उस समय जब कोई मेरे साथ नहीं था, तब बाला साहब का यह साहस देना बहुत बड़ी बात थी।"  

 

 

अंतिम समय में बाला साहब के कमरे में सिर्फ अमिताभ ही गए थे

बाला साहब जब अपनी आखरी सांसें ले रहे थे, तब उनके कमरे में जाने का अवसर मुझे उद्धव जी ने दिया था। उस कमरे में बाला साहब के अलावा उनके एक सहयोगी, आदित्य और मैं था। एक इंसान जिसे हमने इतना मजबूत देखा हो, वह आज बेड पर लेटा हो और कुछ बोल नहीं पा रहा हो, यह असहनीय दृश्य था। हम लोग लगातार प्रार्थना कर रहे थे कि उन्हें कुछ न हो, लेकिन ईश्वर की जो इच्छा थी, वह हुआ। वह क्षण मैं कभी नहीं भूल पाता हूं।"