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पड़ोसियों का खुलासा, अलग ही दुनिया में रहती थीं श्रीदेवी, नहीं करती थीं किसी से बात

पड़ोसियों के मुताबिक, पिछले कुछ वक्त से श्रीदेवी काफी इंट्रोवर्ट (अंतर्मुखी) रहती थीं।

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 01:00 PM IST
श्रीदेवी। श्रीदेवी।

मुंबई। श्रीदेवी के निधन के 72 घंटे बाद मंगलवार रात 10 बजे उनका पार्थिव शरीर मुंबई पहुंचा। एयरपोर्ट से उन्हें लोखंडवाला स्थित ग्रीन एकर्स घर ले जाया गया। इस दौरान बॉलीवुड से लेकर श्रीदेवी के पड़ोसी तक सब गमगीन दिखे। उनके पड़ोसियों के मुताबिक, पिछले कुछ वक्त से श्रीदेवी काफी इंट्रोवर्ट (अंतर्मुखी) रहती थीं। यहां तक कि वो उन पड़ोसियों से भी बातचीत नहीं करती थीं, जो कि उन्हें रोज मॉर्निंग वॉक पर मिलते थे। ग्रीन एकर्स बिल्डिंग में वो बिल्कुल किसी प्राइवेट पर्सन की तरह रहती थीं। जैसे कहीं खो गया था उनका चुलबुलापन...


- फिल्मों में जिस तरह से श्रीदेवी का नटखट और चुलबुलापन दिखता था, रियल में वो बिल्कुल भी नजर नहीं आता था। ऐसे लगता था कि जैसे वो अपनी पुरानी दुनिया खो चुकी हैं। यहां तक कि हमने तो कभी उन्हें हंसते हुए ही नहीं देखा।
- श्रीदेवी की बिल्डिंग के पड़ोस में ही रहने वाले एक शख्स ने बताया, मैं मॉर्निंग वॉक से वक्त सुबह-सुबह रोज उनसे मिलता था, लेकिन वो कभी भी बात नहीं करती थीं। यहां तक कि वो कभी हंसती भी नहीं थीं।
- वो हमेशा अपने फोन पर किसी से तमिल में बात करती रहती थीं। ऐसा लगता था, जैसे वो अपनी दुनिया खो चुकी हैं। हालांकि उन्हें किसी के साथ कोई दिक्कत नहीं थी, फिर भी वो खुद को सभी से दूर रखती थीं।


आगे की स्लाइड्स पर, बचपन में मेरे बच्चों के साथ खेलती थीं जाह्नवी, खुशी लेकिन अब...

- पड़ोसी के मुताबिक, बचपन में उनकी दोनों बेटियां जाह्नवी और खुशी उनके साथ खेलती थीं। लेकिन जैसे-जैसे वो बड़ी होती गईं तो उन्होंने भी ये सब बंद कर दिया। 


 

- एक बार श्रीदेवी ने जाह्नवी के बर्थडे पर आस-पड़ोस के सभी बच्चों को इनवाइट किया था। मेरी लड़की भी जाह्नवी और खुशी के साथ खेलती थी। लेकिन जैसे ही बच्चे बड़े हो गए सबकुछ बदल गया। 

- बड़े होने के साथ ही जाह्नवी और खुशी सिर्फ अपने सर्कल में ही रहने लगीं और उनका भी यहां किसी से मेलजोल नहीं रहा। 

 

- श्रीदेवी ने एक बार फिर जाह्नवी के बर्थडे पर मेरे बच्चों को इनवाइट किया था, लेकिन इस बार बर्थडे पार्टी मुंबई से बाहर मड आइलैंड पर रखी गई थीं। ऐसे में मैंने अपने बच्चों को वहां इसलिए नहीं भेजा कि बाहर उनकी देखभाल कौन करेगा।