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किशोर दा के बेटे को फेसबुक पर पड़ती है गाली, जानें क्यों ताने देते हैं लोग?

किशोर कुमार के बेटे के मुताबिक उनके अनरिलीज्ड गाने चोरी हो चुके हैं।

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2016, 12:00 AM IST
अमित कुमार, किशोर कुमार और रूमा गांगुली। (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार और रूमा गांगुली। (फाइल)
मुंबई: 4 अगस्त को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सिंगिंग लीजेंड किशोर कुमार का जन्मदिन है। 4 अगस्त, 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्में किशोर कुमार ने अलग-अलग भाषा में 1500 से ज्यादा गाने गाए है। किशोर दा के बर्थडे के मौके पर dainikbhaskar.com ने उनके बेटे अमित कुमार के साथ से खास बातचीत की, इस इंटरव्यू में उन्होंने कई दिलचस्प और शॉकिंग बाते बताई। अमित बोले- फेसबुक पर मिलती है लोगों से गाली...
बातचीत के दौरान जब अमित कुमार से किशोर दा के कुछ ऐसे गानों के बारे में पूछा गया जो अब तक रिलीज नहीं हुए हैं। इसपर वे बोले, "देखिए, मैं एक गलतफहमी दूर करना चाहता हूं, किशोर दा के जितने भी अनरिलीज्ड गाने हैं। वो किशोर फिल्म्स की लैब से चोरी हो चुके हैं, लोग मुझे फेसबुक पर गाली भी देते हैं। वो कहते हैं की मैं उनके गाने रिलीज नहीं करता हूं, ये सब गलत है।"

किशोर दा की कहानी बेटे अमित कुमार की जुबानी जानने के लिए, आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें...

अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)

खुद की पहली रिकॉर्डिंग याद आती है ?

 
जी बिल्कुल याद आती है जब 1965 में पिताजी (किशोर कुमार) पहली बार मुझे माइक के पास लेकर आए। मुझे तो कुछ भी नहीं पता था, सबको देखता था कैसे लोग गाते थे। मेरे पिताजी, मां सब गाते थे, लेकिन मैं उतना मैच्योर नहीं था। फिर बाबा (किशोर कुमार) को कई रिकॉर्डिंग में देख कर लगा कि इस माइक में गाते हैं। फिर पिताजी ने फिल्म 'दूर का राही' में मुझसे गीत गंवाया। गीत के बोल थे 'मैं एक पंछी मतवाला रे, मतवाला और निराला रे..'। उन्होंने खुद मेरे ऊपर लिखा, वो पहली बार मैंने बॉम्बे लैब, प्रभा देवी में रिकॉर्ड किया था। पिताजी उस वक्त मेरे साथ थे, मेरा मनोबल बढ़ रहे थे और जैसे ही मैंने गाना शुरू किया तो सब कहने लगे की मेरी आवाज तो रूमा (मेरी मां) जैसी है। लेकिन जब उस गाने को बाबा ने इसी बंगले पर (किशोर कुमार का बंगला) फिल्माया तो उस वक्त मुझे आम के पेड़ पर बिठा दिया था और मैंने डफली बजाकर वो गीत गाया। फिर जब फिल्म में उन्होंने एडिटिंग के वक्त वो गीत देखा तो उन्हें पसंद नहीं आया। फिर उन्होंने ये गाना काट दिया और वो फिल्म में नहीं दिखाया गया। 
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)

किशोर कुमार के साथ लाइव शो भी आप किया करते थे ?

हां, मैं बाबा के साथ शो करता था। लेकिन गाने के बजाय मैं एक परकशनिस्ट हुआ करता था। मम्मी भी कोलकाता शिफ्ट हो गई। उस वक्त भी मैं मम्मी के साथ स्टेज पर वाद्य यंत्र बजाता था और कभी-कभी गाना गाता था। लेकिन 1969 में जब बाबा ने 'आराधना' से कमबैक किया, फिर उनके साथ-साथ अलग जगहों पर शो किया करता था। 
 

आपने अकेले स्टेज शो कब शुरू किया और किसके गाने गाते थे ?

जी, मैं 1973-74 में कोलकाता में ही स्टेज शो करना शुरू किया। बाबा (किशोर कुमार) के गाने गाता था। लेकिन ये बात जब मम्मी को पता चली तो वो नाराज हो गई और उन्होंने बाबा को फोन करके कहा कि अमित आपके गाने गाता है। स्टेज पर परफॉर्म करता है। हालांकि, यह बात सुनकर बाबा बहुत खुश हुए, उस वक्त बाबा ने कोलकाता आकर मेरा शो देखे। 
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)

सुना है वो आपके शो को छुप-छुप कर देखते थे ?

जी हां, जब बाबा कोलकाता आए तो मैंने उनके लिए सबसे आगे वाली सीट रखी थी। तब बाबा ने कहा- "वो गलती मत करना, क्योंकि मैं अगर सामने बैठूंगा तो कोई तुम्हारा गाना सुनेगा नहीं, सब मुझे ही देखेंगे।" फिर बाबा ने पीछे लाइट के पास खड़े होकर मेरा शो देखा था। वो बहुत ही खुश हुए और उन्होंने मुझे मुंबई बुला लिया। 1974  में षणमुखानंद हॉल में उन्होंने मेरे साथ शो किया। शो का नाम था 'डैडी किशोर एंड सन अमित'। एक रिकॉर्ड है कि 1967 से 1974 तक षणमुखानंद हॉल में किशोर कुमार के जितने भी फ्राइडे शो हुए हैं, वो सब हाउसफुल हुआ करते थे। पिताजी ने ही मुझे इंट्रोड्यूस किया और वहां एस डी बर्मन, कल्याणजी आनंदजी लोग आए हुए थे। तो मुझे सबकुछ मेरे बाबा ने दिया है।  
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)

कहते हैं कि वो मजाक करते-करते सीरियस गीने भी गा दिया करते थे ?

हां, वो तो उनके बाएं हाथ का खेल था। वो एक परफेक्शनिस्ट हुआ करते थे, उन्होंने खुद से कभी अपनी बड़ाई नहीं की और जब सामने आते थे तो बड़े-बड़ों की छुट्टी हो जाया करती थी। 
 

किशोर दा की क्या दिनचर्या होती थी ?

बाबा सुबह जल्दी उठते थे, उसके बाद चाय पीना, पेपर पढ़ना और फिर रिकॉर्डिंग होती थी। उस जमाने के सारे संगीतकार उन्हें कैसेट भेज दिया करते थे, जिसे सुनकर बाबा प्रैक्टिस किया करते थे। फिर वो रिकॉर्डिंग में जाते थे और अगर खाली वक्त होता था तो मेरे साथ बैठकर फिल्म लिखा करते थे। आइडिया का एक्सचेंज किया करते थे, फिर किशोर फिल्म्स की टीम से मिलते थे। 
 

 

अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल) अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)

फिल्मों का चयन कैसा होता था ?

वो एक उम्दा स्टोरी-टेलर थे। यहां तक की हृषिकेश मुखर्जी साहब भी उनके स्टोरी टेलिंग के कायल थे। पिताजी को फिल्म-मेकिंग पसंद थी। डैड कहते थे- "मैं कमर्शियल फिल्में नहीं बनाता हूं। जिसको लेना है ले, नहीं तो जाए।" हालांकि, उस जमाने में हमने दो कमर्शियल फिल्में भी बनाई 'चलती का नाम गाड़ी' और एक बंगला फिल्म 'लुक्कूझूरी', जिससे ये हमारा बंगला भी बना था। दोनों फिल्मों ने प्लैटिनम जुबली किया था। तो ये दोनों मसाला फिल्में थी। बीच में पिताजी ने दो कॉमेडी फिल्में भी बनाई 'बढ़ती का नाम दाढ़ी' और 'चलती का नाम जिंदगी'। वैसे मेरे पिताजी कॉमेडी एक्टर होने के साथ काफी सीरियस इंसान थे। उन्होंने अपनी ट्राईलॉजी 'दूर गगन की छांव में', 'दूर का राही' और दूर वादियों में कहीं', तीनों फिल्में काफी सीरियस बनाई थी। 
 

किशोर दा कुछ यंत्र भी बजा लेते थे?

हां, कम लोगों को पता है की वो एक अच्छे पियानिस्ट थे। यही कारण है की उन्हें हारमोनियम बजाना काफी आसान लगता था। लेकिन उन्होंने अपना ये हुनर सभी के सामने कभी भी ढोल-पीट के नहीं बताया। उन्हें पेंटिंग और स्केचिंग भी बखूबी आती थी और ये सभी उनके छुपे हुए टैलेंट थे। 
 
किशोर कुमार (फाइल) किशोर कुमार (फाइल)

क्या किशोर कुमार की बायोपिक फिल्म बनेगी ? अनुराग बासु ये फिल्म बनाने वाले थे ?

यह बायोपिक नहीं बन रही है क्योंकि काफी समय जा चुका है। पिछले 8 साल से बैठकर सिर्फ बातचीत हो रही थी। कुछ भी आगे नहीं बढ़ा, इसलिए अब ये फिल्म नहीं बनेगी। हम बस ये सोच रहे थे कि क्या हो रहा है, कैसे हो रहा है, लेकिन बात आगे नहीं नहीं बढ़ी और बायोपिक करना भी नहीं चाहिए, कोई क्यों करेगा और कौन करेगा? कोई भी किशोर कुमार जैसा नहीं हो सकता, कोई भी उनके जैसी एक्टिंग और सिंगिंग नहीं कर सकता।
किशोर कुमार (फाइल) किशोर कुमार (फाइल)

'किशोर दा' के गीत आपके लिए क्या हैं ?

वो मेरे लिए सबकुछ हैं, उनके ही गीत से शुरू किया। अब उनके ही गीत से अंत होगा, वो हम सबके भीतर हमेशा रहेंगे। हम सब चले जाएंगे, लेकिन बाबा और उनके गीत अमर रहेंगे। 
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अमित कुमार, किशोर कुमार और रूमा गांगुली। (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार और रूमा गांगुली। (फाइल)
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)
अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)अमित कुमार, किशोर कुमार (फाइल)
किशोर कुमार (फाइल)किशोर कुमार (फाइल)
किशोर कुमार (फाइल)किशोर कुमार (फाइल)
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