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जब अपने बारे में मुमताज़ की इस भविष्यवाणी को सुनकर चौंक गए थे अमिताभ बच्चन

अमिताभ बताते हैं - ‘मुमताज ने मेरी हर तरह से मदद की थी।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 02:51 PM IST

‘बाम्बे टू गोवा’ फ्लॉप होते ही जैसे अमिताभ की फ्लॉप फिल्मों का दौर शुरू हो गया। ‘प्यार की कहानी’ भी औंधे मुंह गिरी। इस फिल्म से एक रोचक कहानी जुड़ी है। पहले अमिताभ इसमें साइड हीरो थे और मेन हीरो थे उस जमाने के चॉकलेटी हीरो जितेंद्र। तभी फिल्मों में सीलिंग का चक्कर शुरू हो गया, जिसका अर्थ था कि एक अभिनेता एक साथ छह से ज्यादा फिल्मों में काम नहीं कर सकता है।फ्लॉप हीरो बन चुके थे अमिताभ...

उस वक्त जितेंद्र के पास कई फिल्में थीं, जिनका गेटअप उन्हें पसंद था उनको उसको छांट-छांटकर अपने पास रख लिया। बाकी फिल्मों से पीछा छुड़ा लिया। इनमें ‘प्यार की कहानी’ भी शामिल थी। बाद में निर्माता ने जितेंद्र की जगह अमिताभ को ले लिया, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई। एक समय ऐसा भी आया, जब अमिताभ बच्चन को फ्लॉप हीरो के रूप में जाना जाने लगा।

कई फिल्में आईं, जिनमें ‘एक नजर’, ‘रास्ते का पत्थर’, ‘बंशी बिरजू’ शामिल थीं। ये आईं और नौ दो ग्यारह हो गईं। उसके बाद फिल्म ‘बंधे हाथ’ आई, जिसने थोड़ा बिजनेस किया। उसमें उस वक्त की मशहूर हीरोइन मुमताज थीं। फिल्मालय स्टूडियो में व्यक्तिगत रूप से अमिताभ की मुलाकात मुमताज से हुई थी।

मुमताज़ ने की थी एक भविष्यवाणी...

अमिताभ उन दिनों संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे। मुमताज ने स्टारों जैसे नाज-नखरे दिखाए बिना उनसे बड़ी गर्मजोशी और बेतकल्लुफी से बातें की थीं। अमिताभ बताते हैं - ‘मुमताज ने मेरी हर तरह से मदद की थी। उस वक्त भी मेरे पास कार नहीं थी। कहीं आने-जाने के लिए मुझे जब सवारी की जरूरत पड़ती थी तो मुमताज जी की मर्सिडीज कार हाजिर हो जाती थी। एक बार मुमताज ने मुझसे कहा था कि देखना! एक दिन तुम मुझसे भी बड़ी कार खरीदोगे।

उनकी ये भविष्यवाणी सुन बिग बी चौंक गए थे क्योंकि तब उनके पास इतने पैसे नहीं थे लेकिन बाद में सच हो गई। कुछ ही दिनों बाद मैंने बड़ी कीमती कार खरीद ली थी। मुमताज के साथ मैंने सिर्फ ‘बंधे हाथ’ फिल्म में काम किया था। मैंने उन्हें बहुत मिलनसार पाया। मुमताज विनोदी और साफ दिल औरत हैं।

नोट:(ये संपादित अंश चर्चित लेखक तरुण इंजीनियर की पुस्तक "बॉलीवुड का शहंशाह - अमिताभ बच्चन' से लिया गया है। 240 पृष्ठों की किताब राजा पॉकेट बुक्स, बुराड़ी, दिल्ली ने प्रकाशित की है।)