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पूर्व पति,बहन की पहले ही हो चुकी मौत, अब इस एक्ट्रेस के परिवार में कोई नहीं बचा

लंबी बीमारी के बाद वेटरन एक्ट्रेस शम्मी आंटी(89) का मंगलवार को निधन हो गया।

Danik Bhaskar

Mar 07, 2018, 12:23 PM IST

मुंबई. लंबी बीमारी के बाद वेटरन एक्ट्रेस शम्मी आंटी(89) का मंगलवार को निधन हो गया। 40s में एक्टिंग करियर की शुरुआत करने वालीं शम्मी ने 2012 तक इंडस्ट्री में काम किया। उन्होंने करीब 200 फिल्मों में काम कर हिन्दी सिनेमा में अपनी अहम योगदान दिया है। 1931 में एक पारसी फैमिली में जन्मीं शम्मी आंटी का असली नाम नरगिस रबाड़ी था। नहीं बचा शम्मी की फैमिली में कोई मेंबर....


- शम्मी के पिता पारसी मंदिर में Agyari में पुजारी थे। जब वे महज 3 साल की थीं तभी उनके पिता की डेथ हो गई थी।
- उनकी मां पारसी त्यौहारों में खाना बनाकर पैसे कमाया करती थीं। वहीं उनकी बड़ी बहन मणि रबाड़ी फैशन डिजाइनर थीं।
- मणि ने 1967 से 1994 तक न सिर्फ एक्ट्रेसेस के बल्कि कई फिल्मों के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन किए। हालांकि शम्मी की बड़ी बहन और मां दोनों ही अब इन दुनिया में नहीं हैं।

- बात अगर शम्मी की पर्सनल लाइफ की करें तो उन्होंने 1970 में शम्मी ने प्रोड्यूसर सुल्तान अहमद से शादी की थी। हालांकि ये शादी नहीं चल सकी और कपल का तलाक हो गया।
- न सिर्फ एक्स हसबैंड बल्कि शम्मी का भी 89 साल की उम्र में निधन हो गया है। आज इस पैकेज में हम आपको बता रहे हैं उनसे जुड़ीं 8 अहम बातें, जो वाकई उन्हें लीजेंड बनाती हैं। जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें....

1. जब नरगिस से बनीं शम्मी आंटी

 

पारसी फैमिली में जन्मीं शम्मी आंटी का असली नाम नरगिस रबाड़ी था। नरगिस के शम्मी बनने में सबसे बड़ा हाथ डायरेक्टर तारा हरीश का रहा। उन्होंने की शम्मी की ये सलाह दी कि इंडस्ट्री में पहले से ही नरगिस दत्त हैं इसलिए वे अपनी नाम बदल लें। 

2. 18 की उम्र में किया डेब्यू


शम्मी ने 18 साल की उम्र में डायरेक्टर तारा हरीश की फिल्म 'उस्ताद पेद्रो'(Ustad Pedro- 1949) से डेब्यू किया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। शम्मी की दूसरी फिल्म 1951 में 'मल्हार' आई, जिसने उन्हें रातोंरात फेमस बनाया, लेकिन उनकी डगर इतनी आसान नहीं थी। इसलिए जब 1952 में दिलीप कुमार और मधुबाला के साथ उनकी तीसरी फिल्म 'संगदिल' वो फ्लॉप हो गई और उनके करियर का ग्राफ वापस नीचे गिर गया।

3. नरगिस की दोस्त बनीं नरगिस रबाड़ी


नरगिस दत्त और नरगिस रबाड़ी यानी शम्मी आंटी काफी अच्छे दोस्त थे। दोनों की मुलाकात फिल्म मल्हार की शूटिंग के दौरान हुई थी यहां इनकी दोस्ती हो गई। बता दें, दोनों के परिवारों के रिश्ते काफी अच्छे थे इसीलिए जैसे की शम्मी की मौत की खबर नरगिस की बेटी प्रिया को मिली वो तुरंत दौड़ीं चली आई थीं। 

4. साइड एक्ट्रेस बनकर रह गईं शम्मी


शम्मी ने अपना करियर बतौर फीमेल लीड शुरू किया था लेकिन फिल्म 'संगदिल' की असफलता के बाद उनके करियर की ग्राफ गिर गया। उन्होंने इसके बाद सपोर्टिंग रोल करने शुरू कर दिए। इसी की नतीजा रहा कि वे कॉमेडी एक्ट करने लगीं और बाद में यही उनकी पहचान बन गई। उन्होंने Jhalak (1955), Bandish (1955), Azaad (1955), Halaku (1956), Son of Sinbad (1955), Raj Tilak (1958), Khazanchi (1958), Ghar Sansar (1958), Aakhiri Dao (1958), Kangan (1959), Bhai-Bahen (1959) और Dil Apna Aur Preet Parai (1960) जैसी फिल्में कीं। वहीं 1962 से 1970 के बीच शम्मी ने कॉमेडी और वैम्प रोल के भरपूर Half Ticket (1962), Ishaara (1964), Jab Jab Phool Khile (1965), Preet Na Jane Reet (1966), Aamne-Saamne (1967), Upkar (1967), Ittefaq (1969), Sajan (1969), Doli (1969), Raja Saab (1969) and The Train (1970) जैसी फिल्में कर ऑडियंस पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी। 

5. शादी के बाद भी नहीं छोड़ी एक्टिंग


शम्मी ने प्रोड्यूसर सुल्तान अहमद से शादी कर ली। शादी के बाद भी उनका फिल्मी करियर नहीं धमा और उन्होंने इसके बाद 1973 में 'हीरा', अमिताभ बच्चन स्टारर 'गंगा की सौगंध'(1978) जैसी फिल्मों को असिस्ट किया। 

6. आर्थिक तंगी से गुजरीं शम्मी आंटी


1985 में शम्मी ने 'पिछलता आसमान' नाम की फिल्म प्रोड्यूज की थी, जिससे उन्हें काफी ज्यादा फाइनेंशियल लॉस हुआ। उनके दोस्त और सुपरस्टार राजेश खन्ना इस फिल्म का हिस्सा बनने वाले थे। शम्मी की आर्थिक परेशानी को देखते हुए राजेश खन्ना ने उनका साथ दिया। वे उस दौरान टेलीविजन सीरीज प्रोड्यूज कर रहे थे इसी से शम्मी को उन्होंने छोटे परदे पर इंट्रोड्यूज कराया। 

7. टेलीविजन की ग्रांडमदर 


शम्मी आंटी ने छोटे परदे पर भी काफी पॉपुलैरिटी हासिल की। उन्होंने 'देख भाई देख', 'जबान संभाल के', 'श्रीमान श्रीमति', 'कभी ये कभी वो', 'फिल्मी चक्कर' जैसे कई सीरियल्स में काम किया और टीवी की फेवरेट ग्रांडमदर बन गईं। 

 

8. बॉलीवुड में दूसरी शुरुआत


शम्मी आंटी एक्टिंग स्किल्स को लेकर काफी डिमांड में रहीं। उन्होंने टीवी के बाद 1990 से 2000 के बीच सिल्वर स्क्रीन पर 'कूली नंबर-1', 'हम', 'मर्दों वाली बात', 'गुरुदेव', 'गोपी-किशन', 'हम साथ-साथ हैं' और 'इम्तिहान' जैसी सक्सेसफुल फिल्मों में काम किया।

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