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Movie Review: गोरी तेरे प्यार में

निर्देशक पुनीत मल्होत्रा अपनी इस फ़िल्म को एक गहरे अर्थ वाली फ़िल्म के रूप में दर्शाते हैं। उनका ये भी कहना है कि ये फ़िल्म किसी भी अन्य रोमांटिक बॉलीवुड कॉमेडी फ़िल्म से कहीं अलग है।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2013, 12:04 AM IST
Film Review: Gori Tere Pyar Mein
कहानी: ‘गोरी तेरे प्यार में’ कहानी है श्रीराम (इमरान खान) और दिया (करीना कपूर) के प्यार की। बैंगलोर में जन्मा श्रीराम एक नौजवान आर्किटेक्ट है जिसके लिए रिश्तों की कोई अहमियत नहीं है। जहां एक ओर दुनिया की हर बात से बेपरवाह श्रीराम है वहीं दुनिया को बदलने की चाहत रखती है उसकी गर्लफ्रेंड दिया शर्मा, जो की एक सामाजिक कार्यकर्ता है।
शुरुआत में उनका यह अनौपचारिक रिश्ता समय के साथ भावनात्मक रूप ले लेता है। लेकिन आखिरकार जटिल परिस्थितियां, अलग अलग आदर्श और मनोवृत्तियां दोनों को अलग कर देती हैं। बहरहाल श्रीराम को बाद में यह एहसास होता है कि दिया के लिए उसका प्यार एक जिस्मानी रिश्ते से कहीं ज़्यादा है और वो उसके बिना नहीं रह सकता। लेकिन दिया अब आगे निकाल चुकी है और गुजरात के एक गांव झुमली में बस चुकी है।
जब श्रीराम दिया का दिल जीतने झुमली पहुंचता है तो वो उसे इंकार कर देती है। लेकिन इस बार उसे मनाने के लिए श्रीराम किसी भी हद तक जाने को तैयार है। झुमली के लोगों की मदद करने की कोशिश कर श्रीराम दिया को मनाना चाहता है मगर उसे इस तरह की आदत नहीं है। वो अपनी पूरी कोशिश करता है कि दिया को यह यकीन दिला सके कि वो बदल गया है और अब वो उसके गांववालों के जैसा ही हो गया है।
मगर क्या श्रीराम अपने प्यार को वापस पा सकेगा? क्या वो झुमली में बदलाव ला सकेगा?फ़िल्म की कहानी इसी जवाब को ढूंढती हुई आगे बढ़ती है.
निर्देशन:
फ़िल्म रिलीज़ से पहले निर्देशक पुनीत मल्होत्रा अपनी इस फ़िल्म को एक गहरे अर्थ वाली फ़िल्म के रूप में दर्शा रहे थे। उनका ये भी कहना था कि ये फ़िल्म किसी भी अन्य रोमांटिक बॉलीवुड कॉमेडी फ़िल्म से कहीं अलग है।फ़िल्म देखने के बाद उनके दावे गलत लगते हैं. फ़िल्म दर्शकों के मन में छाप छोड़ने में नाकामयाब साबित होती नजर आती है क्योंकि पुनीत का निर्देशन प्रभावशाली नहीं लगता। फ़िल्म बोझिल लगती है क्योंकि न फ़िल्म में लव एंगल ठीक से डवलप हो पाता है और न यह कोई सोशल मैसेज देने में कामयाब होती दिखती है.
एक्टिंग: ‘आइ हेट लव स्टोरीज़’ के बाद पुनीत ने दूसरी बार इमरान के साथ काम किया है और इसीलिए चीजों को समझने-समझाने में भी काफ़ी आसानी हुई है मगर इमरान अपने किरदार में जान नहीं डाल पाए. इमरान ने कोशिश तो बहुत की मगर उनके चेहरे पर किसी तरह के एक्सप्रेशंस नजर ही नहीं आ पाते।यही वजह है कि दर्शक उनके किरदार से खुद को कनेक्ट नहीं कर पाते। करीना ने इस फ़िल्म को क्यों साइन किया, ये समझ से परे है मगर फिर भी वह अपने किरदार को पूरी तल्लीनता से निभाती हुई दिखती हैं. उनका देसी लुक दर्शकों को खासा पसंद आएगा।
कमियां: अगर आप इस फिल्म से यह उम्मीद लगा के बैठे हैं कि यह एक बेहतरीन कॉमिक या रोमांटिक फिल्म होगी तो आप को भारी निराशा होगी। फिल्म में तो रोमांस है ना ही कॉमेडी, दरअसल यह फिल्म ब्रेकअप और पैचअप की ऐसी कहानी जो एक समय के बाद बेहद नीरस लगने लगती है।
यह एक ऐसी मसाला कॉमेडी है जिसे हर दूसरे सप्ताह बॉलीवुड के निर्देशक दोहराते हैं। ये फिल्में तो फिर भी पैसा वसूल होती हैं पर इस फिल्म में न तो कोई कहानी है न ही वो दर्शकों को हंसा पाती है। पूरी फिल्म में इमरान और करीना एक-दूसरे से फ्लर्ट करते नजर आते हैं। फिल्म में गानों को जबरदस्ती ठूसा गया है तो फिल्म की गति भी बहुत धीमी है। इससे यह फिल्म और भी उबाऊ हो जाती है। कुल मिलाकर कहा जाये तो यह फ़िल्म आपके मिस भी कर दें तो आपको फर्क नहीं पड़ेगा।
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