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Film Review: रज्जो

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2013, 12:51 PM IST

इस सप्ताह 'रामलीला' के साथ बॉक्स ऑफिस पर रज्जो भी रिलीज़ हुई है।

Film Review of Rajjo
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इस सप्ताह 'रामलीला' के साथ बॉक्स ऑफिस पर 'रज्जो' भी रिलीज़ हुई है। फ़िल्म में कंगना रनोट ने मुख्य किरदार निभाया है। फ़िल्म की कहानी है रज्जो (कंगना रनोट) की जो नागपाड़ा के एक कोठे की तवायफ है। रज्जो अपने इलाके की सबसे मशहूर तवायफ है। एक दिन रज्जो के कोठे पर ब्राह्मण परिवार का चंदू (पारस अरोड़ा) आता है। वह रज्जो के डांस और गायिकी का दीवाना हो जाता है और उसे दिल दे बैठता है। पारस रज्जो से शादी कर अपना घर बसाना चाहता है, मगर इसमें रोड़े अटकाने आ जाता है हांडे भाऊ। वह भी रज्जो को अपना बनाना चाहता है। वो इन दोनों को अलग करने के लिए हर पैंतरा अपनाता है और इस कोशिश में शुरू हो जाती है एक ऐसी जंग, जिसका अंजाम बेहद खतरनाक हो सकता है। रज्जो किसकी होती है? कौन रज्जो को पाने में कामयाब होता है, फ़िल्म इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
निर्देशन: फ़िल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं। सिनेमा की फील्ड में विश्वास पाटिल का नाम नया है। वह मराठी के चर्चित साहित्यकार भी हैं। सामाजिक ताने-बाने और ऐतिहासिक संदर्भों से भरपूर `पानीपत', `संभाजी', `महानायक' जैसे उपन्यासों के जरिए पाटिल पाठकों के बीच तो लोकप्रिय हैं ही, 50 से ज्यादा पुरस्कार और सम्मान भी हासिल कर चुके हैं, मगर फ़िल्म के लिए उन्होंने जो विषय चुना वो अब काफी पुराना-सा लगता है।
अर्से बाद कंगना एक गैंग्‍सटर से नहीं कॉमन और अच्‍छे आदमी के प्‍यार में दीवानी हैं और उसकी खातिर जान देने को रेडी हैं। फिल्‍म का म्‍यूजिक ठीक है और सांग जुल्‍मी काफी हद तक हिट है। कंगना ने अपना पार्ट ईमानदारी से प्‍ले किया है, लेकिन पारस कुछ नर्वस लगे हैं। कुल मिलाकर कहा जाये तो फ़िल्म काफी कमजोर है और इसे न भी देखें तो आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आपने कुछ मिस किया।

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