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आइरन मैन 3

यह एक ऐसी स्‍पेशल इफेक्‍ट ब्‍लास्‍ट–फेस्‍ट फिल्‍म है, जो दर्शकों को दांतों तले अंगुली चबाने को मजबूर कर देती है।

Dainik Bhaskar

Apr 27, 2013, 09:31 AM IST
movie review: iron man 3

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यह एक ऐसी स्‍पेशल इफेक्‍ट ब्‍लास्‍ट–फेस्‍ट फिल्‍म है, जो दर्शकों को दांतों तले अंगुली चबाने को मजबूर कर देती है। पिछले साल आई द एवेंजर्स की ही तरह इस फिल्‍म की भी समीक्षा-आलोचना करने वालों को मज़ा किरकिरा करने वाले ही कहा जाएगा और ऐसा इसलिए कि इस फिल्‍म का जादू इसकी कहानी में नहीं है, उसके किरदारों में भी नहीं है, इस फिल्‍म का जादू इस बात में है कि हम फिल्‍म के किरदारों के साथ खुद को हवा में उड़ता हुआ महसूस करते हैं।

उनके हाथ आपस में जुड़े होते हैं और जब वे धरती से हज़ारों फ़ीट की ऊंचाई से नीचे छलांग लगाते हैं तो हम रोमांच से भर उठते हैं।

फिल्‍म की पटकथा इसी तरह की एक घटना से दूसरी तक छलांग लगाती रहती है और हमारे दिमाग़ को उलझाए रखने के बावजूद उसके लिए इतनी गुंजाइश भी रख छोड़ती है कि हम उसकी सराहना कर सकें। हॉलीवुड ने इस तरह की तकनीकी रूप से श्रेष्‍ठ फिल्‍में रचने में महारत हासिल कर ली है, जिसमें बच्‍चे और बड़े दोनों ही खुद को सुपर-हीरो की दुनिया में पाकर रोमांचित हो उठते हैं।

यह अकारण नहीं है कि हॉलीवुड दुनिया का सबसे बड़ा फिल्‍म उद्योग है और उसका दर्शक-वर्ग लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तो चीनी भी बड़ी तादाद में अमेरिकी फिल्‍मों के दर्शक बनते जा रहे हैं। भारतीय भी अपवाद नहीं हैं। दुनिया का कोई और फिल्‍म उद्योग आर्थिक रूप से इतना सशक्‍त नहीं है कि बच्‍चों की कॉमिक बुक में पाई जाने वाली फंतासियों को सिनेमा के परदे पर साकार कर सके।

कोई भी इस तरह की कंप्‍यूटर-जनरेटेड फिल्‍म को देखने इसलिए नहीं जाता कि उसमें उसे शानदार अदाकारी देखने को मिलेगी। कुछ बेहतरीन संवादों से ही काम चल जाएगा। रॉबर्ट डाउनी जूनियर, जिनका चेहरा समय के साथ धीरे-धीरे अल पचीनो जैसा लगने लगा है, फिल्‍म की मुख्‍य भूमिका में विश्‍वसनीय लगते हैं। परफॉर्मेंस के स्‍तर पर यह फिल्‍म बहुत अच्‍छी नहीं है, इसलिए वे उचित ही इस कमी को पाटते नजर आते हैं।

इससे हमें यह भी पता चल जाता है कि आइरन मैन फ्रेंचाइजी की कामयाबी का राज क्‍या है। यह सुपर-हीरो सीरिज की तीसरी किस्‍त है। अहिंसा के पुजारी महात्‍मा गांधी की भूमिका में जान डाल देने वाले बेन किंग्‍स्‍ले यहां दुनिया के सबसे घातक आतंकवादी की भूमिका में हैं। या शायद ऐसा नहीं है।

फिल्‍म की गुत्‍थी यह है कि आतंक का चेहरा महज एक मुखौटा है, ताकि असल चेहरा चुपचाप अपने काम को अंजाम दे सके। लिहाजा सुपर-विलेन किलियन तो गाय पीअर्स ही है।

यदि हम शीत युद्ध को भी गिनें (स्‍टेन ली की यह कॉमिक सीरिज पहले-पहल उसी पर आधारित होने वाली थी) तो मनुष्‍य आज तक तीन विश्‍व युद्ध लड़ चुका है। आतंक के खिलाफ जारी लड़ाई चौथा विश्‍व युद्ध हो सकती है। किलियन कहता है कि वह (शायद) हथियारों की मांग और पूर्ति के सूत्र अपने हाथ में रखकर इस लड़ाई पर कब्‍जा जमाए रखना चाहता है।

यह तनिक अजीबो-गरीब किस्‍म की सनक है, लेकिन मुझे ऐसा इसलिए लग रहा है, क्‍योंकि मैं थिएटर में बैठकर सोच रहा हूं, जबकि मुझे तो स्‍क्रीन पर घट रही हैरतअंगेज़ घटनाओं को एकटक देखते रहना चाहिए। आइरन मैन एक मुश्किल वक्‍त से गुजर रहा है, लेकिन वह अब भी दुनिया की रक्षा करने में सक्षम है। उसका साथी जेम्‍स रोड्स, जो कभी वार मशीन कहलाता था, लेकिन अब उसका नाम आइरन पैट्रियट (डॉन चीडल) है, अमेरिका के राष्‍ट्रपति की रक्षा करने के लिए सबसे उपयुक्‍त व्‍यक्ति है।

जहां यह फिल्‍म फंतासियों से भरपूर है, वहीं यह सोचकर अजीब लगता है कि खुद दुनिया भी धीरे-धीरे किस तरह साइंस फिक्‍शन बनती जा रही है। युद्ध के लिए कंट्रोल्‍ड रोबोट्स तैनात करने का विचार वास्‍तव में एक नैतिक दुविधा है, जिस पर अमेरिकी नीति निर्माता हाल के दिनों में बहस करते रहे हैं। निश्चित ही, आइरन मैन कोई रोबोट नहीं है, लेकिन वह अपने आविष्‍कर्ता धनकुबेर टोनी स्‍टार्क की एक अपराजेय ढाल तो है ही, जिसके पास अद्भुत शक्तियां हैं।

मुझे पता नहीं कि मैं यहां मैं बहुसंख्‍य भारतीयों का प्रतिनिधित्‍व कर पा रहा हूं या नहीं, लेकिन मैं आइरन मैन की फिल्‍में देखते, उसकी सराहना करते और उसके बारे में सपने देखते हुए बड़ा नहीं हुआ हूं। मेरे बचपन का प्‍यार हमेशा स्‍पाइडरमैन, सुपरमैन और बैटमैन के ही खाते में दर्ज रहेगा।

शायद यही कारण है कि द अमेजिंग स्‍पाइडरमैन, द डार्क नाइट राइजेस और सुपरमैन श्रंखला की फिल्‍में मुझ पर ज्‍यादा गहरा असर डालती हैं। लेकिन रॉबर्ट डाउनी जूनियर का काम देखकर जी करता है कि देरी से ही सही, आइरन मैन को भी उसी कतार में शामिल कर लूं। शायद इस तरह की चीज़ों के लिए कभी भी बहुत देर नहीं होती। तो फिर देर किस बात की है…

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