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MOVIE REVIEW: MAN OF STEEL

हालांकि मुझे पता नहीं कि इस फिल्‍म के शीर्षक में सुपरमैन को मैन ऑफ स्‍टील क्‍यों कहा गया है

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2013, 05:48 PM IST
movie review: man of steel superman

हालांकि मुझे पता नहीं कि इस फिल्‍म के शीर्षक में सुपरमैन को मैन ऑफ स्‍टील क्‍यों कहा गया है, लेकिन हमें बताया जाता है कि वह जिस क्रिप्‍टन ग्रह से आया है, उसकी भाषा में उसकी छाती पर अंकित एस के निशान का मतलब उम्‍मीद है। यह थोड़ा अजीब लगता है, क्‍योंकि क्रिप्‍टन में यूं तो धाराप्रवाह अंग्रेजी बोली जाती है और मुख्‍य विलेन जनरल जोड (माइकल शैनन) तो भारी अमेरिकन उच्‍चारण के साथ अंग्रेजी बोलता है।

लेकिन वास्‍तव में जॉड का यह अमेरिकी उच्‍चारण कोई विचित्र बात नहीं है। जो भी सुपरहीरो इस दुनिया को बचाने का बीड़ा उठाते हैं या जो भी सुपर विलेन दुनिया का बेड़ा गर्क करने की ठान लेते हैं, वे अमेरिकी ही होते हैं। हम यह सब सुनते-समझते ही बड़े हुए हैं कि पूरी दुनिया एक तरफ और अमेरिका एक तरफ। आजकल के बच्‍चों का तो मुझे पता नहीं, लेकिन 1990 के दशक की भारतीय पीढ़ी के दिल में आज भी सुपरमैन का एक खास स्‍थान है। हमने उसे सबसे पहले वीएचएस पर देखा था और यही वह समय था, जब हम टीवी पर स्‍पाइडरमैन और हीमैन को देखा करते थे। अलबत्‍ता उसके बाद हीमैन मुझे नजर नहीं आया। जिस तरह हिंदुओं के तीन देव होते हैं, उसी तरह तब बच्‍चों के भी ये तीन हीरो होते थे और सभी का कोई न कोई पर्सनल फेवरेट होता था। मेरा फेवरेट यकीनन नीली-लाल पोशाक वाला सुपरमैन था, जिसके माथे पर एक लट झूलती रहती थी।

यह फिल्‍म सुपरहीरो विधा का और दोहन करने के लिए सुपरमैन की उत्‍पत्ति के बारे में बात करती है। इससे होता यह है कि यह फिल्‍म तमाम सुपरमैन फिल्‍मों की प्रीक्‍वेल बन जाती है। हम देखते हैं कि क्रिप्‍टन ग्रह पर महत्‍वाकांक्षाओं का साम्राज्‍य है, वहां के प्राकृतिक संसाधनों की कतई कद्र नहीं की जाती है और उसके शासक नस्‍ल और राजनीति को लेकर पिछड़े विचारों से ग्रस्‍त हैं। इस तरह हम क्रिप्‍टन में अपनी पृथ्‍वी की छवि भी देख सकते हैं। क्रिप्‍टन को उसके विवेकशून्‍य लोग ले डूबते हैं, हो सकता है हमारी धरती के साथ भी ऐसा ही हो।

रसेल क्रो ने नष्‍ट होती धरती के मुख्‍य वैज्ञानिक की भूमिका निभाई है। वे काल-एल (या सुपरमैन) के पिता हैं, जो जैसे-तैसे अपने नन्‍हे बेटे को क्रिप्‍टन से बचाकर ले आते हैं। वर्ष 1978 में बने एक अद्भुत संस्‍करण में यह भूमिका मार्लन ब्रांडो ने 30 लाख डॉलर में निभाई थी। क्रो भले ही ब्रांडो न हों, लेकिन वे इस भूमिका को एक गरिमा जरूर प्रदान कर देते हैं। क्‍लार्क केंट (सुपरमैन के सौतेले पिता) की भूमिका में केविन कोस्‍टनर भी ऐसा ही कर दिखाने में कामयाब होते हैं।

क्‍लार्क का बचपन मुश्किलों में बीतता है। उसे अपनी विशेष शक्तियों के बारे में पता है, लेकिन उसे सख्‍त हिदायत दी गई है कि वह उनका इस्‍तेमाल न करे, नहीं तो पूरी दुनिया को पता चल जाएगा कि वह कौन है। सुपरमैन की किंवदंती पुरानी है। सबसे पहले वह वर्ष 1938 में एक कॉमिक स्ट्रिप में नमूदार हुआ था। तब से अब तक उसकी कहानी धर्म और मिथकों की ही तरह हमारी संस्‍कृति का एक हिस्‍सा बन चुकी है। हॉलीवुड समय-समय पर अपने तमाम सुपर-हीरो की कहानियों को अपडेट करता रहता है, काश हम भी अपने मिथकीय चरित्रों के साथ ऐसा ही करें। पिता क्‍लार्क से कहते हैं कि तुम धरती के लोगों को अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरणा दोगे। सभी धर्मों के मिथकीय चरित्र भी तो यही करते हैं।

बैटमैन ट्रायलॉजी वाले क्रिस्‍टोफर नोलन सुपर-हीरो की कहानियों को गहराई देने में माहिर हैं और वे इस फिल्‍म के कथालेखकों में से एक हैं। फिल्‍म के पहले 45-50 मिनट इतने कसावट भरे हैं कि हमें लगता है उनके लिए महीनों इंतजार किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद, आधी फिल्‍म पूरी होने के बाद हमें लगने लगता है कि शायद नोलन और उनके सहलेखक डेविड गोयेर ने निर्देशक जैक स्‍नाइडर को सिनोप्सिस थमाते हुए बाकी की फिल्‍म अपने अनुसार पूरी करने को कह दिया होगा। जब सुपरमैन जनरल जोड से मुठभेड़ करता है तो स्‍नाइडर कहानी के इन खाली हिस्‍सों को धमाकों और विस्‍फोटों से पाट देते हैं। शायद पटकथा में एक घंटे की कहानी के बाद उन्‍हें केवल कोरे पन्‍ने ही उपलब्‍ध होंगे। या शायद 300 और वॉचमैन जैसी फिल्‍में बनाने वाले स्‍नाइडर को यही तौर-तरीका पसंद होगा। लेकिन जब आप नौवीं बार यही दृश्‍य देखते हैं कि एक इमारत ढह रही है और लोग बदहवास भाग रहे हैं (शायद यह दृश्‍य 9/11 से प्रेरित है) तो हम इन लोगों की जिंदगी और मौत की परवाह करना छोड़ देते हैं। अलबत्‍ता हम सुपरमैन की भूमिका में ब्रिटिश अभिनेता हेनरी कैविल से जरूर जुड़ाव महसूस करते हैं। वे सिर से लेकर पैर तक सुपरमैन लगे हैं।

फिल्‍म निश्चित ही 3डी में है और उसे आईमैक्‍स 3डी में दिखाया जा रहा था। यदि स्‍टूडियो का बस चलता तो दर्शकों को सीधे परदे पर ही लाकर खड़ा कर देता। लेकिन यदि सच पूछो तो मुझे ऐसा नहीं लगा कि ‘मैन ऑफ आइरन’ से मेरा दिल का नाता है और आप समझ सकते हैं क्‍यों। लेकिन क्‍या मुझे यह फिल्‍म देखकर अच्‍छा लगा? यकीनन। तो क्‍या मैं इसे एक बार फिर देखना चाहूंगा? जी, नहीं। तो क्‍या मैं इस फिल्‍म का अगला पार्ट देखना चाहूंगा? बिलकुल। यह जानने के लिए कि डेली प्‍लेनेट का रिपोर्टर बनने और लुई लेन की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो जाने के बाद अब सुपरमैन क्‍या करेगा। और यदि इस फिल्‍म के निर्देशक को बदल दिया जाता है, तब तो इस फिल्‍म के लिए मेरी बेकरारी और बढ़ जाएगी।

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