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मेरे डैड की मारुति / मेरे डैड की मारुति

Mayank Shekhar

Mar 15, 2013, 09:12 PM IST

अगर समय हो तो ड्राइव पर चलें

movie review: mere dad ki maruti
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अगर समय हो तो ड्राइव पर चलें

इससे पहले कि हम इस फिल्‍म को पसंद करना प्रारंभ करें, हमें इस विचार से छुटकारा पाना होता है कि शायद यह हमारे द्वारा अब तक देखा गया किसी ऑटोमोबाइल उत्‍पाद का सबसे लंबा विज्ञापन है। यह ऑटोमोबाइल उत्‍पाद है एर्टिगा : सुजुकी की नई-नवेली कार।

फिल्‍म में एक नौजवान के पिता ने यह सेवन सीटर एसयूवी खरीदा है, ताकि अपने होने वाले दामाद को भेंट कर सके। परिवार में शादी-ब्‍याह का माहौल है। एक रात पार्टी के बाद लड़का कार को बाहर ले जाता है, लेकिन जब वह क्‍लब से बाहर निकलता है तो वह पाता है कि पार्किंग से कार गायब हो चुकी है। जाहिर है, उसे बिलकुल समझ नहीं आता कि अब क्‍या किया जाए।

इस लड़के का पिता एक टिपिकल सेल्‍फ-मेड मिडल क्‍लास भारतीय पिता है, जो ब्‍लैक लेबल व्हिस्‍की को लेकर बेहद पजेसिव है। यहां तक कि वह अपनी बेटी की शादी में मेहमानों को भी जॉनीलीवर ब्‍लैक की बोतल में सस्‍ती शराब भरकर परोस देता है। वह कंजूस-मक्‍खीचूस है और अपने बेटे के प्रति प्‍यार जताने में भी कंजूसी करता है।

यह रोल राम कपूर ने निभाया है। हम उन्‍हें एक लोकप्रिय टीवी सोप ‘बड़े अच्‍छे लगते हैं’ के नायक के रूप में जानते हैं। उन्‍हें देखकर हम समझ जाते हैं कि आखिर क्‍यों लाखों लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। उनके व्‍यक्तित्‍व से एक किस्‍म की ऊष्‍मा और मानवीयता झलकती है, जिसे हम उस टीवी सीरियल के साथ ही इस फिल्‍म में भी महसूस कर सकते हैं।

लेकिन यहां वे एक सख्‍त पिता की भूमिका निभा रहे हैं। उनका बेटा (साकिब सलीम) उन्‍हें यह बताने के बजाय जेल जाना पसंद करेगा कि उनकी नई-नवेली गाड़ी चोरी हो गई है। वह और उसका सबसे अच्‍छा दोस्‍त (प्रबल पंजाबी) हरसंभव कोशिश करते हैं कि घर में एक नई कार ले आएं। उन्‍हें जो सबसे अच्‍छा आइडिया सूझता है, वह यह है कि ‘चलो, एसआरके को ट्वीट करते हैं’, ताकि यह मूवी स्‍टार अपने फॉलोअर्स से कह सके कि वे उनके लिए एक-एक रुपया डोनेट करें। निश्चित ही यह कोई कार चुराने से बेहतर आइडिया होगा।

यह युवाओं की फिल्‍म है। इस तरह की फिल्‍म देखकर घर लौटते समय हमारे जेहन में कई तरह के जुमले घूमते रहते हैं, जैसे नाआआआइस, स्‍वाइइट, डूउउउड वगैरह। हम सभी इस तरह के जुमलों का इस्‍तेमाल करते हैं। अलबत्‍ता, मैं निश्चय नहीं कर पाता हूं कि ये लोग टूटी-फूटी अंग्रेजी बोल रहे हैं, जैसे कि एम लव यू, या उन लोगों का मखौल उड़ा रहे हैं, जो शायद ऐसी भाषा बोलते हों। जो भी हो, फिल्‍म के संवाद जानदार हैं।

यह यशराज फिल्‍म बहुत चतुराई से बॉलीवुड के चिर-परिचित मसालों, जैसे संयुक्‍त परिवार, शादियां, गिद्धा वगैरह को लो-बजट शहरी कूल फिल्‍मों से जोड़ देती है। हालांकि, यह 'देल्‍ही बेली' जैसी कोई फिल्‍म नहीं है, या कॉमेडी का बवाल नहीं है, लेकिन यह एक दिलचस्‍प मजेदार सफर जरूर है, जो एक अटपटे-से विचार पर आधारित होने के बावजूद हमारा मन बहलाने में कामयाब साबित होती है।

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