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MOVIE REVIEW: 'कृष 3'

आप इंडियन टच में भी हॉलीवुड जैसी साइंस फिक्शन का मजा पूरी फैमिली के साथ उठा सकते हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 01, 2013, 02:30 AM IST
movie review of Krish 3
दिवाली के मौके पर राकेश रोशन 'कृष 3' लेकर आये हैं। यूं तो हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्में ही दर्शकों को लुभाती हैं, उन्हें सुपरमैन, स्पाइडरमैन जैसे कैरेक्टर्स खासे पसंद आते् हैं, मगर अब बॉलीवुड भी इसमें पीछे नहीं हैं। कृष फिल्मों की सीरीज इसी का एक सबूत है कि आप इंडियन टच में भी हॉलीवुड जैसी साइंस फिक्शन का मजा पूरी फैमिली के साथ उठा सकते हैं। हालांकि, बॉलीवुड में भी इन फिल्मों का कांसेप्ट बुराई पर अच्छाई कीं जीत वाला ही है।
कहानी: कहानी वहीं से शुरू होती है जहां कृष में ख़त्म हुई थी। फ़िल्म 'कृष' में विलेन डा. सिद्धांत आर्या (नसीरुद्दीन शाह) को मात देने के बाद कृष्णा अपने पिता रोहित (ऋतिक रोशन) को मौत के मुंह से बाहर निकालता है। इसके बाद वह अपने प्यार प्रिया को अपना हमसफ़र बनाता है और उसके साथ एक सुखद जिंदगी बिता रहा है, मगर इन सबके बीच वह बुराई के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए है। वह विज्ञान के जरिए ऐसी तकनीक विकसित करने में लगा हुआ है, जिससे समाज और तरक्की करे। अब दुनिया में अगर कृष्णा जैसे अच्छे लोग हैं तो काल (विवेक ओबेरॉय) जैसे लोग भी हैं, जो समाज में बुराई फैलाना चाहते हैं। वह अपनी ताकत का इस्तेमाल तबाही फैलाने में करते हैं। उसकी आर्मी में इस बार शामिल हैं म्यूटेंट्स जिसे उसने खुद तैयार किया है। इनमें कुछ आदतें इंसानों की हैं और कुछ जानवरों की। इनकी मदद से काल एक ऐसा चक्रव्यूह रचता है जिससे दुनिया तबाह हो सकती है। कृष्णा और उसके पिता रोहित ही दुनिया को इस खतरे से बचा सकते हैं, मगर एक दम से आई इस मुसीबत का तोड़ ढूंढना उनके लिए भी टेढ़ी खीर है। इसी दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्या सच्चाई बुराई का खात्मा करने में सफल हो पाती है? फ़िल्म में यही दिखाया गया है।
निर्देशन: ऐसी फिल्मों में किरदारों से ज्यादा अहम होती है तकनीक। स्पेशल इफेक्ट्स साधारण-सी कहानी में भी जान डाल देते हैं। यही इस फ़िल्म के साथ भी हुआ है। अच्छाई-बुराई की लड़ाई वाला कांसेप्ट हम कई फिल्मों में देख चुके हैं। ऐसे में फ़िल्म की खासियत हैं इसके स्पेशल इफेक्ट्स जिन पर सबसे ज्यादा काम भी किया गया। राकेश रोशन ने फ़िल्म के तकनीकी पक्ष पर सबसे ज्यादा मेहनत की है और इसका असर फ़िल्म पर साफ़ नजर आता है। निर्देशन का तो राकेश रोशन को कई सालों का अनुभव है ही और कृष जैसी फिल्मों के जरिए वह पहले से ही बच्चों और फैमिली ऑडियंस के खास पसंदीदा रहे हैं। इस फ़िल्म में भी उनका निर्देशन बढ़िया है।
एक्टिंग: परदे पर ट्रिपल रोल करना आसान नहीं होता, मगर ऋतिक ने इस चैलेंज को बहुत ही अच्छे से निभाया है। रोहित, कृष्णा और सुपरहीरो कृष के रोल में उन्होंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की है। नेगेटिव रोल में विवेक ओबेरॉय फिट बैठे हैं। विवेक पहले भी विलेन का किरदार कर चुके हैं और उन्हें हीरो की बजाए विलेन के रूप में अपना करियर आगे बढ़ाना चाहिए।
म्यूजिक: फ़िल्म का म्यूजिक काफी कमजोर है। यही फ़िल्म का सबसे वीक प्वाइंट है। राकेश रोशन संगीत पर थोडा और ध्यान देते तो फ़िल्म देखने में दर्शकों को और मजा आता।
क्यों देखें: दिवाली के मौके पर फैमिली अच्छी मूवी देखना चाहते हैं तो फ़िल्म आपको निराश नहीं करेगी। इसे एक बार देख सकते हैं। हमारी तरफ से फ़िल्म को 3.5 स्टार।
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