रिव्यूज़

--Advertisement--

MOVIE REVIEW: 'वार छोड़ न यार'

पश्चिम में तो युद्ध पर संगीतमय ऑपेरानुमा फिल्में भी बनी हैं मगर हमारे यहां यह फिल्म पहली कोशिश है।

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2013, 12:06 AM IST
movie review of war chod na yaar
इस फिल्म का नाम जितना इंट्रेस्टिंग है, उतना ही सब्जेक्ट भी। यह युद्ध पर बनी पहली कॉमेडी फिल्म है। युद्ध का नाम लेते ही हम एक गंभीर माहौल बन जाता है, मगर इस फिल्म में इसे रोचक और लाइट तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है।
इस तरह की फिल्में और किताबें विदेशों में प्रचलित हैं। पश्चिम में तो युद्ध पर संगीतमय ऑपेरानुमा फिल्में भी बनी हैं, मगर हमारे यहां यह फिल्म पहली कोशिश है। शरमन जोशी इंडियन आर्मी के कैप्‍टन राज की भूमिका में हैं और जावेद जाफरी पाकिस्तानी फौजी(कुरैशी) बने हैं। सरहद के आर-पार रहने के बावजूद यह दोनों अच्छे दोस्त बनने के बेहद करीब होते हैं, मगर निजी रिश्तों को ताक पर रखकर इन्हें एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ने को मजबूर होना पड़ता है, क्योंकि सरकार ने इन्हें इसी काम के लिए सरहद पर तैनात कर रखा है। ये दोनों जो अपनी पीस पोस्‍टिंग्‍स के दौरान एक-दूसरे से जोक्‍स शेयर करते थे, अब बुलेट्स शेयर कर रहे हैं। इनके घरों और शहरों की हालत एक जैसी है। जंग का असर दोनों के जानने वालों के लिए एक-सा है, पर ये एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, क्योंकि इनके देश अलग हैं। इसी दौरान आती है वार रिपोर्टर रुत दत्‍ता (सोहा अली खान) जो सरहद के हालात जानना चाहती है।
एक्टिंग:
शरमन जोशी और जावेद जाफरी की एक्टिंग काबिले-तारीफ है। दोनों ने अपने किरदारों को बहुत ही बेहतरीन तरीके से निभाया है। शरमन की गंभीर डायलॉग डिलीवरी और टाइमिंग बहुत ही अच्छी है, वहीं उनके साथ जावेद जाफरी की ट्यूनिंग को भी पूरा क्रेडिट दिया जाना चाहिए। सोहा हर बार की तरह कुछ खास नहीं कर पाईं। उनकी एक्टिंग दमदार नहीं लगी।
निर्देशन:
फ़राज़ हैदर की यह पहली फिल्म है, मगर उन्होंने अपने सधे हुए निर्देशन से यह साबित कर दिया है कि वह लंबी पारी खेल सकते हैं। गंभीर विषय को हलके-फुल्के अंदाज में पेश करना आसान काम नहीं होता, मगर फ़राज़ कहीं भी विषय से भटकते नहीं हैं।
क्यों देखें:
अलग हट कर विषय, कॉमेडी, कलाकरों की दमदार एक्टिंग की वजह से फिल्म देखनी चाहिए। हमारी तरफ से इसे 3 स्टार्स।
X
movie review of war chod na yaar
Click to listen..