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MOVIE REVIEW: सत्या-2

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2013, 09:59 AM IST

सत्या अपने गांव से मुंबई आता है और वहां अपने बचपन के दोस्त नारा के साथ ठहरता है।

movie review: satya 2
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पॉलटिकल थ्रिलर और अंडरवर्ल्ड पर फिल्में बनाने के मशहूर राम गोपाल वर्मा इसी जॉनर की एक और फ़िल्म 'सत्या 2' लेकर आए हैं. फ़िल्म में खास बात ये है कि रामू ने इस बार सारे नए चेहरों को मौका दिया है.
कहानी : फ़िल्म की कहानी घूमती है सत्या(पुनीत सिंह) के इर्द-गिर्द जो कि अपने गांव से मुंबई आता है इस इरादे के साथ कि वो हिंदुस्‍तान में ऑग्रेनाइज्‍ड क्राइम को रीस्‍टैब्‍लिश और री-डिस्‍कवर करेगा. मुंबई में वह अपने बचपन के दोस्त नारा के साथ ठहरता है। नारा के जरिए उसे बिल्डर पवन लहोटी की कंपनी में नौकरी मिल जाती है।
पवन के जरिए वह पूर्व गैंगस्टर आर.के. और दूसरे बिल्डर संघी के संपर्क में आता है। आर.के. और संघी की आपसी रंजिश के कारण एसीपी भारती दोनों के पीछे पड़ता है।
तब आर.के. सत्या की मदद से संघी और एसीपी को ठिकाने लगाने का प्लान बनाता है। योजना को अंजाम देने के बदले सत्या को 25 लाख रुपए इनाम में मिलते हैं।
उन पैसों से फ्लैट खरीदकर अपनी पत्नी चित्रा और मां को भी मुंबई बुला लेता है। परिवार और सत्या का दोस्त नारा, सत्या की हकीकत से अंजान है और जब हकीकत परत™दर™परत खुलती है, तब शुरू होता है खून™खराबे और रिश्तों में भारी उथल™पुथल का सिलसिला।
एक्टिंग: सत्या के रोल में नए एक्टर पुनीत सिंह ने बढ़िया काम किया है. पहली ही फ़िल्म में उन्होंने जबर्दस्त कॉन्फिडेंस के साथ एक टफ रोल प्ले किया है। ऐसी फिल्मों में एक्ट्रेसेस के लिए कुछ खास करने के लिए नहीं होता इसलिए नई एक्ट्रेस अनायिका सोती कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई हैं। स्पेशल अपीयरेंस में आराधना गुप्ता भी इंप्रेसिव नहीं लगी हैं. महेश ठाकुर ने जरूर अपनी एक्टिंग से प्रभावित किया है।
निर्देशन: बतौर निर्देशक राम गोपाल वर्मा इस फ़िल्म में कुछ नयापन नहीं ला पाये हैं। कहानी कमजोर है और ऐसी कहानियों पर खुद रामू ही कई फिल्में बना चुके हैं।'सरकार', 'सत्या', 'कंपनी' जैसी बेहतरीन क्राइम बेस्ड फिल्में बना चुके राम गोपाल वर्मा की यह फ़िल्म उनकी सबसे कमजोर फिल्मों में से एक कही जा सकती है.
म्यूजिक: म्यूजिक भी बेहद कमजोर है और पुराने गानों को मॉडिफाई करके ही पेश किया गया है। संजीव™-दर्शन, नितिन रैकवार, कार्य अरोरा, श्री डी बतौर म्यूजिक डायरेक्टर बहुत ही कमजोर म्यूजिक बना पाए हैं।
क्यों देखें: क्राइम बेस्ड फिल्मों के शौक़ीन हैं तो फ़िल्म देखने का रिस्क उठा सकते हैं वरना फ़िल्म में ऐसा कुछ खास नहीं जिसे आप मिस भी कर दें तो फर्क पड़ेगा। हां नए कलाकारों को जरूर दाद देनी चाहिए कि उन्होंने कमजोर कहानी में भी बढ़िया अभिनय करके कुछ हद तक दर्शकों को सीट से बांधे रखने में कामयाबी पाई है।

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