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Movie Review ‘शाहिद’ / Movie Review ‘शाहिद’

Subhash K Jha

Oct 16, 2013, 12:00 AM IST

'शाहिद' एक ऐसी फिल्म है जो सामाजिक-राजनैतिक वास्तविकता में एक दुर्लभ अनभ्यस्त यात्रा कराती है जिसकी हमारे सिनेमा को बहुत ज्यादा ज़रूरत है।

Movie Review Shahid
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अक्षय कुमार की फिल्म 'बॉस' के साथ आज एक और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतरी है 'शाहिद'। इस फिल्म की कहानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता रहे शाहिद आजमी की जिंदगी पर आधारित है, जिनकी 32 साल की उम्र में ही हत्या कर दी गई थी।
शाहिद को 2010 में उनके ही ऑफिस में अज्ञात हत्यारों ने मार डाला था। आतंकवादी बनने की कोशिश से लेकर कठोर आतंकवादी-निरोधक कानून के अंतर्गत गलत ढंग से जेल में डाले जाने और फिर मानव अधिकारों (खासकर भारत के मुसलमान अल्पसंख्यकों के लिए) के चैंपियन बनने तक शाहिद एक ऐसे लड़के की प्रेरणादायी जीवन यात्रा की पड़ताल करती है, जो भारत में बढ़ते सांप्रदायिक हिंसा को देखते हुए मानव अधिकारों के लिए एक ऐसा मसीहा बन जाता है, जिसकी उम्मीद नहीं की जा सकती थी। इस फिल्म में राज कुमार ने शाहिद का किरदार निभाया है और उनके साथ हैं प्रभलीन संधू और बलजिन्दर कौर।
एक्टिंग: राजकुमार यादव ने शाहिद आज़मी के किरदार को परदे पर बड़ी कुशलता से जीवंत कर दिया है। हर सीन में उन्होंने अपनी बेहतरीन कलाकारी की झलक दिखाई है। काई पो छे, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर, रागिनी एमएमएस और लव सेक्स और धोखा जैसी फिल्मों में नजर आ चुके राजकुमार ने इस फिल्म में अपने करियर का बेस्ट परफॉरमेंस दिया है।खुद राजकुमार ने भी इस फिल्म को एक इंटरव्यू में अपने लिए बेहद खास करार दिया था। फिल्म के कुछ दृश्यों को फिल्माते वक्त वह बेहद भावुक हो गए थे और उन्हें सामान्य होने में कुछ वक्त भी लगा था।
निर्देशन: हंसल मेहता के प्रयास को दाद देनी चाहिए, जिन्होंने पूरी तरह से कमर्शियल हो चुके सिनेमा के दौर में शाहिद जैसी दिल को छू लेने वाली फिल्म बनाई। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भले ही बहुत दर्शक न बटोर पाए, मगर अच्छे सिनेमा की सारी खासियतें इस फिल्म में भरपूर हैं। हंसल मेहता जैसे नए पीढ़ी के निर्देशक इस व्यावसायिक दौर में इस बात की उम्मीद लेकर आए हैं कि देश में अभी भी बेहतरीन सिनेमा बनाने वाले मौजूद हैं।
यही वजह है कि इस फिल्म को टोरंटो, दुबई और मुंबई समेत अनेक फिल्म फेस्टिवलों में काफी सराहना मिली है।14वें मुंबई फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म ने सिल्वर गेटवे ट्रॉफी जीती, जबकि हंसल मेहता को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड मिला। न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल और स्टट्गार्ट के इंडियन फिल्म फेस्टिवल में भी हंसल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड दिया गया।
क्यों देखें: बेहतरीन सिनेमा देखने की चाहत रखते हैं तो इस फिल्म को जरूर देखें, लेकिन मसाला मनोरंजन फिल्मों के शौकीनों को फिल्म रास नहीं आएगी। साथ ही, राजकुमार यादव की बेहतरीन अदाकारी और हंसल मेहता के बढ़िया निर्देशन की वजह से फिल्म देखने लायक है। हमारी तरफ से इसे 4 स्टार।

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