रिव्यूज़

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'बोल बच्चन': पहले बचें, फिर बोलें

फिल्म रिव्यू: हवा में उड़ती जीप एक बस की विंडशील्ड के कांच को चकनाचूर करते हुए गुजर जाती है।

Dainik Bhaskar

Jul 06, 2012, 07:31 PM IST

(मयंक शेखर जाने-माने फिल्म समीक्षक हैं, वे www.dainikbhaskar.com से जुड़े हैं)हवा में उड़ती जीप एक बस की विंडशील्ड के कांच को चकनाचूर करते हुए गुजर जाती है। कुछ समय बाद, एक जीप पानी के ड्रम ले जा रहे एक ट्रक से जा भिड़ती है। बसें पलटी खाती रहती हैं। और अंत में एक कार एक पहाड़ के किनारे पर जाकर लटक जाती है। जब अजय देवगन और अभिषेक बच्चन दर्जनों गुंडों की धुनाई करते हैं और वे मक्खियों की तरह यहां-वहां उड़ते रहते हैं तो हम इन स्टंट सीक्वेंस पर हैरत जताने लगते हैं।





शायद आप सोचें कि यह कोई धांसू एक्शन फिल्म होगी। लेकिन वास्तव में यह तो कॉमेडी है। एक मायने में एक्शन कॉमेडी फिल्में एक लोकप्रिय मनोरंजन विधा मानी भी जाती हैं। रजनीकांत को भारत को जैकी चान कहा जाता है, या बेहतर होगा अगर कहें कि जैकी चान हांगकांग के रजनीकांत हैं।






‘सिंघम’ और ‘गोलमाल 3’ (दोनों फिल्में रोहित शेट्टी द्वारा निर्देशित) के बाद से ही यह माना जाने लगा है कि अजय देवगन अपनी हर फिल्म में छाए रहेंगे। जैसी कि कल्पना की जा सकती है, वे इस फिल्म में भी डार्क शेड्स में हैं। वे मूंछधारी हैं, कंधे चौड़े करके चलते हैं और खिचड़ी अंग्रेजी में गुर्राते हैं। ‘मैं तुम्हें छठी का दूध याद दिला दूंगा’ के बजाय वे कहते हैं ‘मैं तुम्हें मिल्क नंबर सिक्स याद दिला दूंगा।’







अगर आपको लगता है कि इस जुमले का मजेदार होने से दूर का भी नाता है, तो जरा एक और पर गौर फरमाइए। ‘मेहनत सक्सेस की कुंजी है’ के बजाय वे कहते हैं ‘मेहनत सैक्सोफोन का की-होल है।’ बोलचाल की भाषा में इसे ही अंग्रेजी की टांग तोड़ना कहते हैं! आपको हंसी आ सकती है। लेकिन केवल कभी-कभी।






इरादे जाहिर हैं। गुणवत्ता की ज्यादा फिक्र मत कीजिए। करोड़ों कमाने की सोचिए। ‘सिंघम’ और ‘गोलमाल ३’ दोनों ही ‘सौ करोड़ क्लब’ में शामिल हो चुकी फिल्में हैं। पैसा तो निर्माता के खाते में जाता है, लेकिन आजकल दर्शक भी बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों में दिलचस्पी लेने लगे हैं। उन्हें लगता है कि जब किसी फिल्म को इतने सारे लोग देख रहे हैं तो उसमें कोई न कोई बात तो होगी।





तथाकथित सौ करोड़ क्लब में शामिल सभी 12 फिल्मों में से अगर ‘3 इडियट्स’, ‘दबंग’ और ‘रा.वन’ को छोड़ दें तो शेष सभी रीमेक या सीक्वेल हैं। ‘बोल बच्चन’ भी रीमेक है। वर्ष 1971 में प्रदर्शित हुई ऋषिकेश मुखर्जी की प्यारी-मजेदार फिल्म ‘गोलमाल’ की।




अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म में वह भूमिका निभाई है, जो ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म में अमोल पालेकर ने निभाई थी। देवगन उत्पल दत्त सरीखी भूमिका में हैं। वे बॉस हैं। मूल फिल्म में उत्पल दत्त को उन पुरुषों से चिढ़ थी, जो मूंछें नहीं रखते थे, इसीलिए अमोल पालेकर को नकली मूंछें लगानी पड़ी थीं। मूंछों से मोह कहानी की एक मजेदार बुनियाद थी।




इस फिल्म में अब्बास (देवगन) को अपने बॉस से यह तथ्य छुपाना पड़ता है कि वह मुस्लिम है, क्योंकि उसने एक विवादित मंदिर का ताला तोड़ दिया था। लेकिन इस कंफ्यूजन को चुटकी में हल किया जा सकता है। ऐसा तो है नहीं कि उसके हिंदू बॉस को दूसरे धर्मो के लोगों से कोई प्रॉब्लम है। जब बुनियाद में ही कोई दम न हो तो फिल्म की कहानी लचर हो जाती है।





लेकिन, जैसा कि हम पहले ही जानते हैं कि यह एक बेसिरपैर की लचर तरीके से बनाई गई एक्शन कॉमेडी है। बहुत से लोगों को इस बात से कोई दिक्कत न होगी कि उनके मोबाइल पर घिसे-पिटे या सतही एसएमएस जोक्स आते रहते हैं। इस फिल्म में लोगों के सिर के ऊपर से इतनी गाड़ियां उड़ती हुई निकल जाती हैं, जितनी बहुतेरे शोरूम में भी न होती होंगी।





शायद कुछ लोगों को यह सब दिलचस्प लगे। लेकिन इस फिल्म के मेकर्स को फुल स्टॉप की कला के बारे में कुछ नहीं पता। कभी-कभी, देवगन के किरदार की ही तरह, हम भी चीखकर कहना चाहते हैं : ‘बस करो, बहुत हुआ!’ मुझे महान ऋषिकेश मुखर्जी की बेचैन आत्मा के लिए दुख होता है। शायद वे दूसरी दुनिया में कहीं सिर पीट रहे होंगे।




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