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मूवी रिव्यू: म्‍यूजिकल लव स्‍टोरी है ‘एक दीवाना था’

गौतम मेनन ने अपनी ही तमिल फिल्म ‘विन्नैथांडी वरुवाया’ का हिंदी रिमेक बनाया है। यह सचिन और जैस्सी की प्रेम कहानी है।

Dainik Bhaskar

Feb 17, 2012, 10:45 AM IST

गौतम मेनन ने अपनी ही तमिल फिल्म ‘विन्नैथांडी वरुवाया’ का हिंदी रिमेक ‘एक दीवाना था’ के नाम से बनाया है। यह सचिन और जैस्सी की प्रेम कहानी है।

सचिन ने हाल ही में अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है, लेकिन उसकी रुचि फिल्मों में है। दिन भर वह फिल्म सेट पर, निर्देशकों के ऑफिस के बाहर और अपने दोस्तों जो कि असिस्टेंट डॉयरेक्टर्स हैं के साथ बिताता है।सचिन अपने परिवार के साथ जुहू रहने चला जाता है और यहां वह पहली बार जैस्सी को देखता है। सचिन अपना दिल उस खूबसूरत लड़की को दे बैठता है। जब उसे पता चलता है कि जैस्सी उसके घर के ऊपर ही रहती है तो वह उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए हर मुनासिब कोशिश करता है।

उससे बात करने का बहाना ढूंढता है।जैस्सी मलयाली क्रिश्चियन है। उसके माता-पिता बेहद रूढि़वादी हैं। साथ ही वह उम्र में सचिन से एक वर्ष बड़ी है। सचिन जानता है कि प्यार में उसकी राह मुश्किल है। एक दिन हिम्मत जुटाकर जैस्सी के सामने वह अपने दिल की बात बता देता है कि वह उसे चाहता है।

जैस्सी कहती है कि उसके दिल में सचिन के लिए ऐसी कोई भावना नहीं है। वह सचिन को अपना दोस्त बनने के लिए जोर देती है। दोस्त बनते ही वह सचिन से मिलने और बात करने की जरूरत महसूस करती है। यह सचिन और कन्फ्यूज जैस्सी की म्यूज़िकल लव स्टोरी है जिसमें प्यार है, दर्द है, खुशी है।



स्टोरी ट्रीटमेंट:दो बिलकुल अलग पृष्ठभूमि और सोच वाले की लोगों की प्रेम कहानी को दिखाने का प्रयास कमजोर किया गया है|पहला हिस्सा तो बेहद कमजोर है लेकिन दूसरे भाग में कहीं कहीं फिल्म की कहानी से भावनात्मक जुडाव होने लगता है| कुल मिलाकर कहें तो फिल्म बेवजह खींची हुई लगती है|


स्टार कास्ट: साउथ फिल्म की कहानी को बॉलीवुड के हिसाब से ढालने में निर्देशक की मेहनत तो तो लगती है मगर इसे सफल बनाने का सबसे ज्यादा दारोमदार फिल्म की स्टार कास्ट पर आकर टिक जाता है| प्रतीक बब्बर ने अपने किरदार में इमोशंस डालने की कोशिश की है मगर कई जगह वह कमजोर पड़ते नजर आते हैं| इसके अलावा एमी जैक्सन कैमरे पर कांफिडेंट जरूर नजर आती हैं मगर अपने किरदार में जान डालने में वह भी कोई खास सफल नहीं हो पाईं हैं|

निर्देशन:गौतम मेनन ने एक फ्रेश लव स्टोरी बनाने की कोशिश की है| हालांकि कमजोर कहानी की वजह से उनका यह प्रयास विफल साबित हुआ है| प्रतीक और एमी से कुछ हद तक गौतम ठीक ठाक अभिनय करवाने में सफल साबित हुए हैं|


डायलॉग्स/सिनेमटोग्राफी/म्यूज़िक:डायलॉग्स बिलकुल भी प्रभावशाली नहीं हैं| सिनेमटोग्राफी ठीक है मगर एडिटिंग पक्ष भी बेहद कमजोर है|ए.आर रहमान का संगीत अच्छा है और होसाना....गाना काफी पसंद किया जा रहा है|


क्यों देखें:प्रतीक-एमी की फ्रेश जोड़ी और इनकी बढ़िया ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री की वजह से फिल्म एकबार तो देखी जा सकती है|







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