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मूवी रिव्यू: 'एजेंट विनोद'

Dainik Bhaskar

Mar 23, 2012, 02:32 PM IST

इस फिल्म की कहानी सीक्रेट एजेंट विनोद के इर्दगिर्द घूमती है, जो कई देशों द्वारा खेले जा रहे गेम से भलीभांति परिचित है।

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स्टोरी: फिल्म की कहानी एजेंट विनोद (सैफ अली खान)के इर्द गिर्द घूमती है जो कि एक रॉएजेंट है। उसका काम पूरी दुनिया में कुछ श्रृंखलाबद्ध तरीके से घट रही घटनाओं के बीच कनेक्शन का पता लगाना है।

उसके पास कई जानकारियां हैं। उज्बेकिस्तान में एक्स केजीबी ऑफिसर को टॉर्चर करने के बाद मौत के घाट उतार दिया जाता है। कहा जाता है कि इस केजीबी ऑफिसर के पास न्यूक्लियर बम के सारे राज थे।

वहीं इस घटना के बाद मास्को में एक इंडियन सीक्रेट एजेंट का राज खुल जाता है और उसे गोली मार दी जाती है क्योंकि वह कोड मैसेज भारत भेज रहा था।

भारत में रॉ के हेड के हाथ अधूरा मैसेज लगता है जिसमें 242 नंबर रहता है। इसी गुत्थी को सुलझाने में लगे विनोद की मुलाकात पाकिस्तानी जासूस रूबी (करीना कपूर) से होती है। दोनों का मकसद एक ही है और क्या वह इसमें कामयाब हो पाते हैं?फिल्म की कहानी इसी पर आधारित है।

स्टोरी ट्रीटमेंट: फिल्म मेकिंग के मामले में एजेंट विनोद नया बदलाव ला सकती है। फिल्म के पहले चालीस मिनट दिलचस्प हैं और दर्शकों को कंफ्यूज कर देते हैं कि आगे कहानी क्या मोड़ लेगी। कहानी को इस तरह से लिखा गया है ताकि इसका सस्पेंस बरक़रार रहे।

मगर फिल्म के कुछ दृश्य बेहद तर्कहीन नजर आते हैं। जैसे दो बार धोखा खाने के बाद भी एजेंट विनोद रूबी पर कैसे भरोसा कर लेते है यह बात समझ से परे नजर आती है।

इसके अलावा रूबी बेवजह डेंजर जोन में एंट्री कर लेती है जबकि उसे पता है वहां दुश्मन छुपा बैठा है। जेम्स बांड की तरह हर बार एजेंट विनोद अपने दुश्मनों को चकमा देने में कामयाब हो जाता है जिससे कहीं कहीं कमजोर पड़ती नजर आती है।


स्टार कास्टः- सैफ अली खान इसमें बहुत खूबसूरत, आकर्षक और बुद्धिमान नज़र आए हैं। जासूस के रोल में उनका प्रदर्शन बहुत बढ़िया है। करीना ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है और बहुत ही नेचुरल परफॉर्मेंस दिया है। सैफ और करीना के जोड़े को अपनी लव केमेस्ट्री दिखाने का बहुत कम मौका मिला है।

विलेन के रूप में आदिल हुसैन भी प्रभावित करते हैं। इसके अलावा राम कपूर, प्रेम चोपड़ा, रवि किशन, शाहबाज खान, मरियम जाकरिया और गुलशन ग्रोवर अपने छोटे रोल से ही दर्शकों पर छाप छोड़ने में कामयाब होते हैं। मलिका हैडन आईटम सॉन्ग में सबको झूमाने में कामयाब रही हैं।


निर्देशनः-श्रीराम राघवन ने 'जॉनी गद्दार' के निर्देशन के जादू को फिर से इस फिल्म में बिखेरा है और दर्शकों को सीट से बांधने में कामयाब रहे हैं। फिल्म में चल रही कहानी में फ्लैशबैक का उपयोग ज्यादा किया गया है, जिसके कारण इंटरवल से पहले फिल्म कहीं-कहीं अपना जादू खो बैठती है।

इंटरवल के बाद, कहानी में रफ्तार आती है और 'एजेंट विनोद' के कारनामों से दर्शकों का खूब मनोरंजन होता है।


म्यूजिक/डायलॉग्स/सिनेमेटोग्राफी/एडिटिंग:- 'एजेंट विनोद' का गीत-संगीत पक्ष मनोरंजक है। 'प्यार की पुंगी' दर्शकों के दिल को खुश कर देती है। लेकिन रिमिक्स मुजरा सॉन्ग साधारण है। इस फिल्म का संपादन और सिनेमेटोग्राफी पक्ष मजबूत है और यह हॉलीवुड की फिल्म क्रैंक 1 और 2 की याद दिलाता है।

ब्रुस विलिस की तरह एजेंट विनोद भी चलती कार के दरवाजे को पकड़कर दुश्मनों पर गोलियां बरसाता है। डायलॉग शानदार हैं और फिल्म में जान फूंक देते हैं।


क्यूं देखें:- कलाकारों के शानदार प्रदर्शन, डायलॉग, सिनेमेटोग्राफी और बेहतरीन स्क्रीनप्ले के लिए इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए।





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