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फिल्म रिव्यू: 'अग्निपथ'

यह फिल्म स्क्रीनप्ले के मामले में अमिताभ की अग्निपथ से बिलकुल अलग है।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2012, 04:36 PM IST

कहानी:1990 में अमिताभ बच्चन को लेकर करण जौहर के पिता यश जौहर ने ‘अग्निपथ’ नामक फिल्म का‍ निर्माण किया था।

अमिताभ को उत्कृष्ट अभिनय के लिए श्रेष्ठ कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। अमिताभ ने अपने बोलने के अंदाज और आवाज में बदलाव लाकर संवाद बोले थे, जिसके कारण दर्शकों को ज्यादार संवाद समझ में ही नहीं आए। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म फ्लॉप रही, लेकिन बाद में लोगों ने इस फिल्म को वीडियो और टीवी पर देखा और सराहा। यह फिल्म यश जौहर के दिल के बेहद करीब थी और इसी बात को ध्यान में रखकर करण जौहर लगभग 22 वर्ष बाद इसी फिल्म का रीमेक लेकर आए हैं जिसमें थोड़े-बहुत बदलाव किए गए हैं।

मांडवा नामक छोटे से गांव में रहने वाले विजय दीनानाथ चौहान (ऋतिक रोशन) को उसके पिता ने आदर्श, सिद्धांत और ईमानदारी की बातें सिखाई हैं। विजय की जिंदगी में तब भूचाल आ जाता है जब ड्रग डीलर कांचा (संजय दत्त) उसके पिता को मौत के घाट उतार देता है। अपनी मां के साथ विजय मुंबई पहुंच जाता है। उसकी जिंदगी का एक ही उद्देश्य है कि मांडवा लौटकर अपने पिता के नाम पर लगे धब्बे साफ करना, जो कांचा ने लगाया है।

मुंबई में 12 वर्षीय विजय की जिंदगी संवारने का जिम्मा रऊफ लाला (ऋषि कपूर) लेता है। कांचा तक पहुंचने की यात्रा में विजय कई नियम और कानून तोड़ता है। उसके कई रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं। विजय को हर कदम और मोड़ पर उसकी दोस्त काली (प्रियंका चोपड़ा) का समर्थन मिलता है। पन्द्रह साल बाद विजय की कांचा के प्रति नफरत उसे मांडवा ले जाती है, जहां दोनों आमने-सामने होते हैं।

स्टोरी ट्रीटमेंट:इस फिल्म की तुलना पुरानी अग्निपथ से अवश्य की जा रही है मगर आपको बता दें कि यह फिल्म स्क्रीन प्ले के मामले में अमिताभ की अग्निपथ से बिलकुल अलग है| नए किरदार राउफ लाला (जिसे ऋषि कपूर ने निभाया है) ने फिल्म की कहानी में नया ट्विस्ट पैदा कर दिया है| ऋतिक-संजय स्टारर इस फिल्म की कहानी दमदार है| हालांकि ऋतिक-प्रियंका के बीच इंटिमेट सींस कहानी को ज्यादा ही खींच देते हैं|

स्टार कास्ट:ऋतिक रोशन ने बड़े ही कांफिडेंट के साथ अपने किरदार को निभाया है और संजय दत्त के सामने कमजोर नहीं पड़े हैं| संजय दत्त ने कांचा के किरदार में अव्वल दर्जे की परफ़ॉर्मेंस दी है| पहले ही कहा जा रहा था कि संजय इस फिल्म में दमदार अभिनय से सबको चौका देंगे और वह इस मामले में उम्मीदों पर बिलकुल खरे उतरे हैं|

हालांकि संजय से ज्यादा प्रशंसा के पात्र ऋषि कपूर हैं जिन्होंने कमाल की एक्टिंग की है| प्रियंका ने छोटे रोल में अच्छा काम किया है मगर फिल्म में वह न भी होतीं तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता|

निर्देशन:करण मल्होत्रा को निर्देशन के मामले में अभी काफी कुछ सीखना है| फिल्म में कई जगह पर निर्देशक की पकड़ ढीली पड़ती नजर आती है| मगर ऋषि और ऋतिक के बीच फिल्माए गए फाइट सींस बहुत ही बढ़िया तरीके से निर्देशित किए गए हैं| इसके अलावा क्लाइमेक्स में विजय द्वारा कांचा को मारकर बदला लेने वाला दृश्य भी काफी प्रभावी ढंग से फिल्माया गया है |

म्यूज़िक/सिनेमटोग्राफी/डायलॉग्स/एडिटिंग:कैटरीना कैफ के चिकनी चमेली गाने के अलावा फिल्म का कोई गाना कोई खास नहीं है| सिनेमटोग्राफी और डायलॉग्स भी अच्छे हैं| एडिटिंग पर थोड़ा ध्यान दिया जाता तो फिल्म थोड़ी और अच्छी बन सकती थी|कमजोर एडिटिंग की वजह से फिल्म बेवजह खींची हुई लगती है|

क्यों देखें:कलाकारों की जबरदस्त परफ़ॉर्मेंस, साथ ही रीमेक के बावजूद फिल्म की कहानी में फ्रेशनेस ही इसकी खासियत है| इसके अलावा कैटरीना का आईटम नंबर चिकनी चमेली भी दर्शकों को सिनेमा घरों तक जाने को मजबूर कर देगा|






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