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Children's Day: स्कूल से ज्यादा सिखाती हैं ये फिल्में, हर बच्चे को देखनी चाहिए

14 नवंबर को बाल दिवस यानि चिल्ड्रेन्स डे है। देखिए ये बेहतरीन फिल्में जो आपको देंगी बड़ा सरप्राइज।

Dainik Bhaskar

Nov 13, 2017, 03:09 PM IST
Childrens Day: Best films made for Children in Bollywood so far
14 नवंबर को बाल दिवस यानि चिल्ड्रेन्स डे (Children's Day) है। इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था। चूंकि उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आज इस मौके पर हम आपको बताएंगे उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में जिन्हें देख बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं। भले ही आज बच्चों के लिए कम फिल्में बनाई जाती हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब हिंदी सिनेमा में बच्चों के लिए खूब फिल्में बनीं।

कुछ बेहतरीन फिल्में है जो इस बाल दिवस (Children's Day या चिल्ड्रेन्स डे) पर बच्चों के लिए अच्छा तोहफा साबित होंगी।

मिस्टर इंडिया

मिस्टर इंडिया...इस फिल्म को हिंदी सिनेमा के इतिहास में बच्चों के लिए बनी सबसे बेहतरीन फिल्म माना जाता है। अनिल कपूर और श्रीदेवी के लीड किरदारों वाली इस फिल्म में बच्चों का काफी अहम रोल था। किस तरह अनाथ बच्चे 'एकता में बल है' की तर्ज पर एकजुट रहते हुए गुंडों से अकेले लोहा लेते हैं, किस तरह वो गरीबी का सामना करते हुए भी खुश रहते हैं, हर परिस्थिति
का सामना करते हैं, यह सब शेखर कपूर की इस फिल्म में बड़े ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया।

स्टेनली का डिब्बा

अमोल गुप्ते की यह फिल्म काफी एंटरटेनिंग है। हम अक्सर जो चीजें बच्चों को करने के लिए मना करते हैं, वही करते हैं और इस विचार को अमोल गुप्ते ने फिल्म में इमोशंस की चाशनी में लपेटकर बहुत ही अच्छे तरीके से परोसा।

तारे जमीं पर

हमें किसी भी बच्चे को कमतर नहीं समझना चाहिए। हर बच्चा स्पेशल होता है, उसमें कुछ ना कुछ खास जरूर होता है और आमिर खान की फिल्म 'तारे जमीं पर' ने यही चीज दिखाई। कहानी एक dyslexic बच्चे की है जो पढ़ाई में बहुत ही कमजोर है, हमेशा डांट खाता है, लेकिन आर्ट में उसका कोई सानी नहीं।
लेकिन एक टीचर उसकी मदद करता है और उसकी खामियों को पहचान कर दूर करता है। इसका असर उस बच्चे की बढ़िया परफॉर्मेंस के रूप में देखने को मिलता है।

I Am Kalam

नील माधव पंडा की नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म 'आय एम कलाम' उन बच्चों के लिए किसी आदर्श से कम नहीं है जो माकूल परिस्थितियां और जरूरत की चीजें ना होने के बाद भी बड़ा बनने का सपना देखते हैं। यह फिल्म एक ऐसे ही लड़के की कहानी बताती है जो हर हाल में अंग्रेजी सीखना चाहता है, स्कूल जाना चाहता है और बड़ा आदमी बनकर अपने परिवार
का सपोर्ट बनना चाहता है।


अंजलि

यह एक ऐसी बच्ची की कहानी दिखाती है जो मानसिक रूप से विक्षित है और मरने वाली है, लेकिन जो चीज उसके पास है वो किसी के पास नहीं..और वो है लोगों को माफ करना और उन्हें स्वीकार करना, निस्वार्थ सभी से प्यार करना। लेकिन कैसे अंजलि अपनी यही खूबी सभी को सिखाकर इस दुनिया को अलविदा कह जाती है, वो बड़ा ही मार्मिक सीन पैदा करता है।
फिल्म को 3 नेशनल अवॉर्ड मिले और इसे 1991 में भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए ऑफिशयल एंट्री भी चुना गया था, लेकिन इसे कोई नॉमिनेशन नहीं मिला।
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Childrens Day: Best films made for Children in Bollywood so far
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