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मूवी रिव्यू: 4084

बिन पटकथा, स्टार और एक्ट्रेस के भी रोचक है 4084।

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2012, 10:09 AM IST
4084 movieइन दिनों ऐसी फिल्में लगातार बन रही हैं जो कॉमेडी होने के बावजूद विषय को लेकर एक डार्क जोन में खड़ी होती हैं। इन फिल्मों का हास्य डेविड धवन या प्रियदर्शन की फिल्मों के हास्य से अलग होता है। यहां कलाकार चीख-चिल्लाकर या गूंगे बहरे बनकर हास्य नहीं करते। संवादों और अभिनय से हास्य उपजता है। हास्य के साथ-साथ ऐसी फिल्में जिंदगी के किसी स्याह पक्ष को उजागर करने का प्रयास करती हैं। चालीस चौरासी फिल्म ये साली जिंदगी, शार्गिद, भिंडी बाजार, शैतान, शोर इन सिटी, साहब, बीवी और गैंगस्टर जोन वाली फिल्म है। चालीस चौरासी में न तो कोई स्टार है और न ही फिल्म में किसी नायिका को रखा गया है। चरित्र और सपोर्टिग कलाकारों से सजी यह फिल्म आपका मनोरंजन तो करती है पर इसके लिए आपको इंटरवल तक रुकना होगा। फिल्म शुरू अच्छे दृश्यों के साथ होती है पर फ्लैशबैक के फ्लैशबैक फिल्म को रोक देते हैं। अंत का आधा घंटा रोमांचक है। कहानी: यह फिल्म दरअसल चार ऐसे लोगों की कहानी है जो दिल के अच्छे और इरादों से नेक होने के बावजूद काम बुरे करते हैं। इन दिनों इंडस्ट्री में ऐसे चरित्र लगातार देखे जा रहे हैं। यह चार पात्र मुंबई में पुलिस की एक वैन को चुराकर अवैध तरीके से चल रहे मनी एक्सचेंज के अड्डे को लूटने का प्लान बनाते हैं। दिलचस्प तरीके से चल रहे इस प्लान में मोड़ तब आ जाता है जब एक असली पुलिस अधिकारी उनके साथ शामिल होकर उन्हें एक एनकाउंटर में ले जाता है। यह बनावटी पुलिस वाले कैसे रुपया लूटते हैं यही इस फिल्म का रोमांच है। स्टारकास्ट: फिल्म की यूएसपी स्टार कॉस्ट ही है। नसीरुद्दीन शाह की ऐक्टिंग में कितनी लंबी रेंज है इसका एहसास यह फिल्म कराती है। फिल्म के अच्छे संवाद भी उन्हीं के हिस्से आए हैं। वह जहां-जहां बोले दर्शकों की हंसी आती है। नसीरुद्दीन शाह के अलावा केके मेनन, रवि किशन और अतुल कुलकर्णी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। सबसे कम फुटेज रवि किशन के हिस्से आए हैं। अतुल कुलकर्णी को अपने पूरे कॅरियर में इतनी बड़ी भूमिका कभी नहीं मिली है। उन्होंने अच्छा निर्वाह भी किया है। केके मेनन ऐसी फिल्मों में अपने को रिपीट करते दिखते हैं। छोटी सी भूमिका में जाकिर हुसैन और राजेश शर्मा भी लुभाते हैं। निर्देशन: फिल्म के निर्देशक ह्रदय शेट्टी इसके पहले कई कमर्शियल फिल्में बना चुके हैं। इस फिल्म में उनका एक नया रूप देखने को मिला है। कलाकारों से उन्होंने अच्छा अभिनय कराया है। कई अच्छे दृश्य और संवाद भी यहां देखने को मिले हैं। पटकथा के स्तर पर फिल्म कमजोर लगी है। शुरुआत के 15 मिनट के बाद जब यह फिल्म फ्लैशबैक में जाती है तब उनका निर्देशन कमजोर दिखा है। कई दृश्य अच्छे संपादन न होने की वजह से भी कमजोर हो गए हैं। डायलॉग व म्यूजिक: मैं बीड़ी बनी, हुक्का बनी गाना अच्छा बन पड़ा है। फिल्म में जहां-जहां गाने आए हैं वह फिल्म का हिस्सा लगते हैं। फिल्म के डॉयलाग अच्छे हैं। नसीर के हिस्से में जो डायलॉग आए हैं वह बेहतर बन पड़े हैं। क्यों देखें: एक डार्क जोन की कॉमेडी देखने की इच्छा हो तो। यदि साथ रिलीज हुई दूसरी फिल्में न रास आई हो तो भी।
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