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मूवी रिव्यू- फैटसो

रजत कपूर के दमदार डायरेक्शन और रणबीर शौरी की बेहतरीन एक्टिंग के लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है।

Dainik Bhaskar

May 03, 2012, 06:52 PM IST

1941 में हॉलीवुड फिल्म बनी थी 'हियर कम्स मिस्टर जॉर्डन'। लेख टंडन ने 1968 में इस फिल्म की हिंदी रीमेक 'झुक गया आसमान' बनाई। उसमें राजेंद्र कुमार और सायरा बानो लीड रोल में थीं। 2012 में उसी स्टोरी प्लॉट को फिर से डायरेक्टर रजत कपूर ने फिल्म 'फैटसो' में गढ़ने की कोशिश की है।





नवीन(पूरब कोहली) और नंदिनी(गुल पनाग) का प्रेम परवान चढ़ रहा होता है कि नवीन का एक्सी़डेंट हो जाता है। इस एक्सीडेंट में नवीन के दोस्त सुदीप(रणबीर शौरी) की मौत हो जाती है। लेकिन, यमराज गलती से उनको छोड़कर नवीन की आत्मा को लेकर चले जाते हैं।




इधर नवीन के शरीर का दाह-संस्कार किया जाता है उधर यमराज को अपनी भूल का पता चलता है। अब, नवीन की आत्मा को फैटसो में प्रविष्ट कराया जाता है। फैटसो के शरीर में नवीन नंदिनी का प्रेम हासिल करने में लग जाता है। वह इसमें कामयाब कैसे हो पाता है, यही आगे फिल्म की कहानी है।




स्टोरी ट्रीटमेंट/डायरेक्शन- इस फिल्म की स्क्रीनप्ले में बहुत सारे झोल हैं। एक तरफ तो नंदिनी सुदीप की तरफ आकर्षित होती है। नवीन नंदिनी से प्रेम करता है। नवीन को सुदीप का शरीर मिल जाता है। लेकिन, उसके बावजूद उसे नंदिनी को अपना बनाने में उसे बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।




इस जटिल कहानी और खराब स्क्रीनप्ले को रजत कपूर ने बढ़िया डायरेक्शन दिया है। रजत कपूर मंजे हुए एक्टर हैं और उनका अनुभव इस फिल्म में काम आया है।




स्टार कास्ट- रणबीर शौरी ने इसमें बहुत अच्छी एक्टिंग की है। उनकी एक्टिंग इस फिल्म की जान है। गुल पनाग ने ठीकठाक एक्टिंग की हैं। पूरब कोहली, गुंजन बक्षी और नील भूपालम भी अपनी भूमिका में फिट दिखे हैं।




म्यूजिक/डायलॉग्स/सिनेमेटोग्राफी/एडिटिंग- इस फिल्म का म्यूजिक साधारण है। डायलॉग्स भी सामान्य स्तर का है। सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। एडिटिंग सही नहीं है इसीलिए फिल्म देखते हुए ऐसा लगता है जैसे कहानी को फिल्म में घसीटा जा रहा है।




क्यूं देखें- रजत कपूर के दमदार डायरेक्शन और रणबीर शौरी की बेहतरीन एक्टिंग के लिए इस फिल्म को देखा जा सकता है।




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