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मूवी रिव्यूः गली गली चोर है

भारत के मौजूदा पॉलिटिकल हालात पर रूमी जाफरी की नाकाम सटायर।

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2012, 10:41 AM IST

यूं तो बॉलीवुड में भारतीय पॉलिटिक्स पर कई सटायर बनाए जा चुके हैं। इनमें जाने भी दो यारो, वेलकम टू सज्जनपुर जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने जैसा इम्पैक्ट पैदा किया वैसा इम्पैक्ट दिखाने में गली गली चोर है नाकाम है। डायरेक्टर रूमी जाफरी की यह फिल्म वैसे तो आम आदमी के दर्द को दिखाने की बात कहती है लेकिन बीच रास्ते में कहीं भटक जाती है। रूमी ने आज के समय के सबसे चर्चित मुद्दे भ्रष्टाचार को फिल्म में इतने कमजोर ढ़ंग से उठाया है कि दर्शक इससे खुद को जोड़ ही नहीं पाता है। वीना मलिक का आइटम सांग फिल्म में केवल एक सेक्स तड़के की तरह ही लगती है।

फिल्म की कहानी भारत (अक्षय खन्ना) के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक आम आदमी, कैशियर और रामलीला में पार्ट टाइम में हनुमान बनता है। भारत भोपाल में अपने पिता शिवनारायण (सतीश कौशिक) और पत्नी निशा (श्रिया सरन) के साथ रहता है जो एक स्कूल टीचर है। भारत अपने इलाके के भ्रष्ट विधायक से निराश है और अपने घर का एक कमरा उसके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को उपयोग करने के लिए दे देता है। इसके बाद से भारत के लिए परेशानियों की शुरुआत होती है। एक सामान्य जीवन जीने की चाहत रखने वाला भारत गंदी राजनीति व भ्रष्टाचार का शिकार हो जाता है।



स्टार कास्टःफिल्म की सारी जिम्मेदारी अक्षय खन्ना के कंधों पर ही है और उन्होंने इसे बखूबी निभाया भी है। श्रिया शरण पर्दे पर जितनी सुंदर दिखीं हैं उतनी ही सुंदर उन्होंने एक्टिंग भी की है। खासकर अक्षय और श्रिया के बीच एक पति-पत्नी के रूप में झगड़ा करना बिल्कुल नैचुरल लग रहा था। मुग्धा गोडसे के लिए फिल्म में करने लायक कुछ भी नहीं था और उन्होंने अपनी एक्टिंग से इसे साबित भी कर दिया। वहीं सहायक भूमिकाओं में सतीश कौशिक, विजयराज, मुरली शर्मा और अन्नू कपूर ने रंग जमाया है।



डायरेक्शनःरूमी जाफरी ने भ्रष्टाचार और राजनीति के वर्तमान हालात को ध्यान में रखकर यह फिल्म बनाई है लेकिन वे समाज में मौजूदा भ्रष्टाचार को दिखा पाने में सुस्त नजर आए हैं। उन्होंने फिल्म में एक आम आदमी को गंदी राजनीति से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया है। हालांकि उन्होंने अपने स्टार कास्ट से उम्दा अभिनय करवाने की पूरी कोशिश की है जिसमें वे कुछ हद तक ही सफल हो पाएं हैं।





डायलॉग्स/सिनेमैटोग्राफी/म्यूजिक: डायलॉग्स प्रभावी, रियलिस्टिक व नैचुरल रहे हैं और साथ ही इसमें पंचेज भी अच्छे हैं। सिनेमैटोग्राफी ठीकठाक है। टाइटल सांग गली गली चोर है अपील करती है। वीना मलिक का चर्चित आइटम नंबर महंगी हुई है अंगड़ाई से फिल्म को कोई फायदा नहीं हुआ। हां, अलबत्ता इससे एक गंभीर विषय पर बनी फिल्म का मजाक ही बना है। फिल्म में इस्तेमाल किए गए आउटफिट्स व बैकग्राउंड एक मध्यम वर्गीय परिवार की स्थिति को सही ठहराते हैं और पूरी फिल्म को और भी रियलिस्टिक बना देते हैं।





क्यों देखें: परिवार के साथ एक साफ-सुथरी फिल्म देखना चाहते हैं तो सिनेमाहॉल का रूख कर सकते हैं।



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